मकर संक्रांति / फ्रांस के केंटीन ने मांडू के काइट फेस्टिवल के बारे में सुना तो शामिल होने चले आए



When Canteen of France heard Mandu's Kite Festival, he came join
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When Canteen of France heard Mandu's Kite Festival, he came join

  • केंटीन ने पतंग बनाना भी सीखा, फ्रांस जाकर पतंग बनाएंगे, दोस्तों संग उड़ाएंगे

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 03:27 AM IST

सुनील तिवारी, मांडू  . एक बार पतंगबाजी देखी तो ऐसी दीवानगी छाई कि फ्रांस से हिंदुस्तान खींच लाई। ये हैं फ्रांस के केंटीन। वे तीसरी बार भारत आए हैं। पिछले साल जनवरी में संक्रांति पर्व पर खजुराहो में पतंगबाजी देखी, तो लोगों से उड़ाना सीखा। बहुत मजा आया। इस बार फिर इंडिया घूमने आया तो मांडू काइट महोत्सव के बारे में जानकारी मिली। इस पर शनिवार को यहां पहुंचा। मांडू पहुंचे केंटीन पतंग की दुकान पर पहुंचे और सारी जानकारी ली। तरह-तरह की पतंग देखी। 

 

प्रतियोगिता के बारे में जानने के लिए नातू फाउंडेशन संस्था पहुंचे। संस्था के उदय नातू व कार्यक्रम की संचालनकर्ता पूर्वा नातू से उन्होंने कहा मैं भी इस प्रतियोगिता में भाग लूंगा। केंटीन ने मांडू में पतंग की कला सीखी। वे अपने देश में भी स्वयं पतंग बनाएंगे।

 

वे पेशे से ज्वेलरी के कारीगर हैं साइड में आर्किटेक्ट का भी काम करते हैं। मांडू के ऐतिहासिक रानी रूपमती महल और बाज बहादुर के बीच इस बार जमकर पतंगबाजी देखने को मिलेगी मकर संक्रांति के दिन स्थानीय लोगों के साथ में अन्य प्रांतों के सैलानी पतंग उड़ाने का आनंद उठा पाएंगे। यहां एक फाउंडेशन के द्वारा अन्य प्रांतों से पतंगबाजों को बुलाया जा रहा है।

 

इस आयोजन में सामाजिक संदेश देने की भी कोशिश की जा रही है। मांडू में पर्यटन बड़े इसलिए पतंगों पर मांडू की स्मारकों के फोटो होंगे और स्वच्छता का संदेश देने वाले नारे भी पतंगों पर होंगे। विदेशी सैलानी भी कार्यक्रम को लेकर उत्साहित हैं।  रंग बिरंगी पतंगों पर मांडू के महलों और राजा रानी के फोटो हाेंगे। मकर सक्रांति के दिन यहां आना रे लिखा होगा।

 

पतंग महोत्सव की खास बात यह है कि इस उत्सव को पूरा मांडू रुप में बनाया जा रहा है इसमें जो भी प्रतिभागी शामिल होंगे वे भी पतंग उड़ाएंगे। कार्यक्रम को और आकर्षक बनाने के लिए बार नाथू फाउंडेशन द्वारा पतंग पर और आयोजन स्थल पर स्वच्छता से संबंधित नारे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा है कि इस महोत्सव में महाराष्ट्र, गुजरात के लोग आएंगे। वे सैनिकों को पतंगबाजी के गुण भी सिखाएंगे। 

 

विदेशी भी भाग लेने की कर रहे तैयारी  : योजना की जानकारी स्थानीय होटल में भी ठहरे विदेशी सैलानियों को दी जा रही हैं। इसके बाद में विदेशी गाने में भी पतंग महोत्सव के प्रति आकर्षण बना हुआ है। वह आयोजन को लेकर तैयारी कर रहे हैं और जानकारी भी जुटा रहे हैं। यहां पतंग और धागों की दुकानों पर भी उन्होंने जाकर धागों के गट्‌टेे और पतंग की खरीदी की है। यहां पर इन दिनों फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, जापान, दक्षिण कोरिया के विदेशी सैलानी उपस्थित हैं।

 
पतंगबाजी के बाद ओंकारेश्वर जाऊंगा : भास्कर से चर्चा करते हुए फ्रांस के पर्यटक कैंटीन ने बताया हिंदुस्तान कला-संस्कृति और त्योहारों का देश है। यहां की संस्कृति से अभिभूत हूं। मैंने देखा कि किस तरह इंडिया के लोग छोटी-छोटी खुशियों को समेटकर अपने जीवन में खुशियों के रंग भरते हैं। मकर सक्रांति के बाद यहां से ओंकारेश्वर जाऊंंगा। 
 

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