नेत्रदान / फांसी पर लटके नाबालिग की शव की आंखें गायब देख चौंक गए डॉक्टर, रोक दिया पोस्टमॉर्टम



पंचनामें में नहीं आंखें दान करने का जिक्र नहीं था। पंचनामें में नहीं आंखें दान करने का जिक्र नहीं था।
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पंचनामें में नहीं आंखें दान करने का जिक्र नहीं था।पंचनामें में नहीं आंखें दान करने का जिक्र नहीं था।

  • परिजन ने पुलिस को जानकारी दिए बिना रात में ही आंखें दान करवा दी 

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 05:35 PM IST

इंदौर. फांसी लगाने वाले नाबालिग का जब पोस्टमॉर्टम शुरू होने वाला था तो उसका शव देखकर फारेंसिक एक्सपर्ट दंग रह गए। शव की आंखें नहीं थीं, इस पर उन्होंने पोस्टमॉर्टम रुकवा दिया, क्योंकि पुलिस की शव परीक्षण नकल में कहीं भी आंखें गायब होने का जिक्र नहीं था। पुलिस ने पूछताछ की तो पता चला कि परिजन ने रात को ही उसकी आंखें दान करवा दी हैं। बाद में उसका पोस्टमॉर्टम कर शव परिजन को सौंपा।

 

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एरोड्रम पुलिस के अनुसार भोलेनाथ कॉलोनी में रहने वाले अनुराग (17) पिता अशोक ने शुक्रवार रात को फांसी लग ली थी। वह बेरोजगारी से परेशान था और नौकरी नहीं मिल पाने के कारण उसने ऐसा कदम उठाया है। रात को ही पुलिस ने शव बरामद कर जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम के लिए रखवा दिया था। सुबह परिजन जिला अस्पताल पहुंचे और पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के लिए लिखा पढ़ी शुरू करवाई।

 

दोपहर 12.50 बजे एरोड्रम थाने के एएसआई यादव ने फारेंसिक एक्सपर्ट डॉ. भरत वाजपेयी को पंचनामे के कागज सौंपे। जब डॉ. वाजपेयी ने शव देखा तो वे हैरान थे। शव की आंखें गायब थी और पुलिस के पंचनामे में इसका जिक्र भी नहीं था। डॉक्टर चौंक गए कि आखिर आंखें गई कहां। उन्होंने पोस्टमॉर्टम रोक दिया तो परिजन हंगामा करने लगे। डॉक्टर ने एएसआई और परिजन से पूछा। एएसआई ने भी इसकी जानकारी होने से इंकार कर दिया। तब परिजन बोले कि हमने रात को इसकी आंखें दान की है। हमने थाने पर कहा था कि आंखें दान करना चाहते हैं। इसके बाद मुस्कान ग्रुप से चर्चा कर उसकी आंखें दान करवा दी। परिजन ने रात को जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर दिनेश आचार्य को आवेदन देकर आंखें दान करवाई थी।

 

पुलिस के सामने होना था
इस मामले में पुलिस का कहना है कि उन्हें सुबह न तो परिजन ने बताया और न ड्यूटी डॉक्टर की तरफ से कोई जानकारी मिली। जब पूछताछ हुई तो परिजन ने आंखें दान करने की बात कही। जब परिजन को आंखें दान करवाना थी तो पुलिस के सामने आंखें दान करवाना थी। 


पंचनामे में जिक्र नहीं था
डॉ. भरत वाजपेयी का कहना है आंखें दान करना अच्छी बात है, लेकिन कानूनन पुलिस के पंचनामे में इसका जिक्र होना चाहिए। साथ ही उसका प्रमाण पत्र लगवाना चाहिए था। पुलिस केस में बिना पुलिस के जानकारी के शव का कोई भी अंग दान नहीं किया जा सकता है।

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