इंदौर

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1.5 साल से घर में बंद थी युवती, घर वाले किसी को अंदर नहीं जाने देते, मनवाधिकार टीम ने कराया मुक्त, उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया

झाबुआ के झकनावद का मामला, हाथ-पैरों में बंधी थी पॉलीथिन-कपड़े की पटि्टयां, खोली तो दिखे फफोले।

Dainik Bhaskar

Jun 10, 2018, 06:37 PM IST
1.5 साल से कमरे में बंद थी युवती। 1.5 साल से कमरे में बंद थी युवती।

इंदौर। मानसिक रूप से बीमार युवती को परिजनों ने पिछले 1.5 साल से एक कमरे में बंद कर रखा था। युवती को ना ही कमरे से बाहर निकलने दिया जाता था और ना ही किसी को उसके कमरे में जाने दिया जाता था। आसपास के लोगों ने मामले की सूचना पुलिस के साथ ही मानवाधिकार आयोग को दी। रविवार को आयोग की टीम ने पुलिस की सहायता से युवती को मुक्त करया और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया।


कमरे से आ रही थी असहनीय बदबू
झाबुआ के झकनावदा की इंदिरा कॉलोनी में रविवार को एक मानसिक रूप से बीमार युवती पिछले डेढ़ साल से घर में बंद मिली। उसके हाथ-पैरों में पॉलीथिन और कपड़ों की पटि्टयां बंधी हुई थी। पूरा घर इतना बदबू मार रहा था। कमरे में बदबू इस कदर थी कि जब आयोग, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कमरे में प्रवेश किया तो टीम में शामिल कई सदस्यों को उल्टी हो गई।


पड़ गए थे फफोले
युवती के हाथ-पैरों में पॉलीथित अौर कपड़े की पटि्टयां बंधी थी। टीम के सदस्यों ने जब युवती की पटि्टयां खोली तो फफोले दिखे। इन्हीं में से बदबू आ रही थी। प्राथमिक उपचार के बाद युवती को परिजन के साथ एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज शुरू हुआ।


मुंह के बल लेटी थी युवती
टीम के सदस्यों ने बताया कि युवती का नाम शीतल बामनिया (20) है, जिसके पिता सलीम पशु चिकित्सा विभाग से ड्रेसर के पद से रिटायर हुए हैं। टीम ने जब कमरे में प्रवेश किया तो युवती मुंह के बल खाट पर लेटी हुई थी और उसके हाथ और पैरों में पटि्टयां बंधी हुई थी।


मां और बहन भी मानसिक बीमार
युवती के पिता सलीम ने बताया कि युवती के साथ ही उसकी मां और बहन मरियम भी मानसिक रूप से बीमार है। सलीम का कहना है कि आर्थिक तंगी के चलते वह उनका उपचार नहीं करा पा रहा था। कपड़े बंधे होने के पीछे कारण बताया कि उसकी मां उसे बाहर नहीं निकालने देती है।


अंधविश्वास भी हो सकता है कारण
प्रारंभिक रूप से युवती के हाथ-पैरों में कपड़े व पॉलीथिन बांधने का कारण इलाज के नाम पर आजमाए गए अंधविश्वास को भी माना जा रहा है। हालांकि पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है। मौके पर पहुंचे झकनावदा अस्पताल के डॉ. एमएल चोपड़ा ने बताया कि पॉलीथिन व कपड़े लंबे समय से बंधे हुए थे। कमरा भी बंद था और युवती भी घर में ही बंद रहती थी, हवा नहीं लगने और अत्यधिक गर्मी के कारण फफोले हो गए हैं।

1.5 साल से कमरे में बंद युवती को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 1.5 साल से कमरे में बंद युवती को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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1.5 साल से कमरे में बंद थी युवती।1.5 साल से कमरे में बंद थी युवती।
1.5 साल से कमरे में बंद युवती को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।1.5 साल से कमरे में बंद युवती को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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