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दिल्ली-चंडीगढ़ तक महेश्वरी साड़ी भेज रही हैं केरियाखेड़ी की महिलाएं

2 वर्ष पहले
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  • महेश्वर क्षेत्र की महिलाएं ऑर्डर पर सप्लाय करती है मेलों में भी भेजती हैं 
  • इधर... रेगवां की 11 महिलाएं चूल्हे-चौके के बाद करती हैं मशरूम की खेती 

खरगोन. महेश्वर के लाडवी पंचायत की केरियाखेड़ी की महिलाओं की तैयार महेश्वरी साड़ी दिल्ली व चंडीगढ़ तक जा रही है। वहीं रेगवां की 11 महिलाएं चूल्हे-चौके के बाद मशरूम की खेती करती हैं। इसके अलावा नावड़ाटौड़ी के सांई स्व सहायता समूह की 11 दीदीयों की आठ साल पहले पांच हैंडलूम से शुरूआत हुई थी। अब हर साल सवा लाख रुपए की बचत हो रही है।


लाडवी पंचायत की केरियाखेड़ी की पांचवीं पास 35 वर्षीय हेमलता खराड़े की 11 महिलाओं की टीम के साड़ी कारोबार का देशभर में नाम है। हेमलता ने समूह व प्रशिक्षण लेकर गांव में हैंडलूम सेंटर खोल रखा है। उनके महिला समूह को साड़ियाें व सूट के देशभर से ऑर्डर आते हैं। 


हेमलता के पति सुरेंद्र खराड़े बताते हैं 2012 में मां अहिल्या स्व सहायता समूह बनाकर आजीविका मिशन में पांच लाख का लोन लिया। लोन से 11 हैंडलूम खरीदे। समूह में 10 महिलाएं हैं। पहले सभी ने छह माह हैंडलूम का प्रशिक्षण लिया। अब साड़ी व सूट तैयार करते हैं।

 

उनके काम की सफाई को देख बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों से आर्डर मिल रहे हैं। वे भोपाल, इंदौर मेलों के अलावा दिल्ली व चंडीगढ़ भी भेज रही हैं। हर महिला की रोज 350 रुपए आय होती है। समूह हरसाल डेढ़ लाख से ज्यादा की बचत कर लेता है। 


85 दिन में मिलेगा 30 किलो उत्पादन से 20 हजार का लाभ 
बालसमुद के रेगवां में 11 महिलाओं ने समूह बनाकर मशरूम की खेती शुरू की है। सोनखेड़ी की महिलाओं को देखकर उन्होंने गौरी मैय्या स्व सहायता समूह बनाया। 


अध्यक्ष बसंतीबाई पटेल व सचिव शीला पटेल ने बताया 10 बॉय 10 के कमरे में मशरूम की खेती के लिए खरगोन की कंपनी से 1700 रु. में 10 किलो मशरूम बीज खरीदा था। समूह की कविता, सारिका, सुनीता, गायत्री, कलावती, कलाबाई, पुष्पा, आशाबाई, घिसीबाई आदि चूल्हे-चौके के काम के बाद सुबह-शाम स्प्रे करती हैं। 


100 लीटर पानी, 125 ग्राम फार्मोलिन केमिकल व 20 किलो भूसा मिलाकर उसमें मशरूम बीज डाले। 60 पाउच बनाकर कमरे में रखे। इसमें रोजाना सुबह-शाम पानी का स्प्रे चल रहा है। समूह सदस्यों के अनुसार मशरूम की खेती 85 दिनों की है। इसमें पहला उत्पादन 45, दूसरा 25 व तीसरा 15 दिन में 10-10 किलो का होगा। 

 

औषधि के रूप में उपयोगी मशरूम का भाव 600 से 800 रु.प्रति किलो है। बीज उपलब्ध करवाने वाली कंपनी ही इसे खरीदेगी। इस खेती से समूह को 20 हजार रु. के लाभ का अनुमान है। 


नावड़ाटौड़ी में 11 महिलाओं की हरसाल सवा लाख बचत 
नावड़ाटौड़ी के सांई स्व सहायता समूह की 11 दीदीयों की आठ साल पहले पांच हैंडलूम से शुरूआत हुई थी। कड़ी मेहनत से समूह ने दोगुना हैंडलूम कर लिए हैं। अध्यक्ष ममता पति घीसालाल व सचिव नबुदीदी पति रमेश ने बताया सात माह का प्रशिक्षण लेकर बैंक से साढ़े पांच लाख का लोन लिया था। सालाना सवा लाख से ज्यादा की बचत होती है। 

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