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देश को टीबी मुक्त करने का लिया संकल्प, दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

टीबी के बैक्टीरिया सांस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं।

Danik Bhaskar | Jun 11, 2018, 06:49 PM IST

इंदौर। टीबी रोग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला सोमवार को संपन्न हुई। कार्यशाला में देश के विभिन्न शहरों से आए प्रतिनिधियों ने भारत को टीबी मुक्त करने का संकल्प लिया।


- कार्यशाला के दौरान देश भर से आए प्रतिनिधियों ने इंदौर के मुसाखेड़ी, भील कॉलोनी, शांति नगर आदि क्षेत्राें में घर-घर जाकर सर्वे किया। सर्वे में मरीजों का पता लगाने के साथ ही संदिग्घ मरीजों को दवा प्रदान कर उन्हे उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।


- सीटीआई की प्रोग्राम मैनेजर संगीता पाठक ने बताया कि 2 दिन की वर्कशॉप में टीबी की गंभीरता, किन-किन वजह से यह बीमारी फैलती है। इसका उपचार क्या है और इसे कैसे रोका जा सकता है आदि का प्रशिक्षण प्राप्त किया।


- कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एके नायक, जिला क्षय अधिकारी डॉ. विजय छजलानी, एमजीएम मेडिकल कॉलेज में टीबी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सलिल भार्गव आदि उपस्थित थे।

क्या है टीबी
टीबी का पूरा नाम है ट्यूबरकुल बेसिलाइ है। यह एक छूत का रोग है और इसे प्रारंभिक अवस्था में ही न रोका गया तो जानलेवा साबित होता है। यह व्यक्ति को धीरे-धीरे मारता है। टीबी रोग को अन्य कई नाम से जाना जाता है, जैसे तपेदिक, क्षय रोग तथा यक्ष्मा।


- दुनिया में लगभग 7 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं और प्रत्येक वर्ष 25 से 30 लाख लोगों की मौत इससे हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार देश में हर तीन मनट में दो मरीज क्षयरोग के कारण दम तोड़ दे‍ते हैं।


संक्रमण के कारण होता है यह रोग
टीबी रोग एक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। इसे फेफड़ों का रोग माना जाता है, लेकिन यह फेफड़ों से रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है, जैसे हड्डियां, हड्डियों के जोड़, लिम्फ ग्रंथियां, आंत, मूत्र व प्रजनन तंत्र के अंग, त्वचा और मस्तिष्क के ऊपर की झिल्ली आदि।


सांस द्वारा शरीर में प्रवेश करते है बैक्टीरिया
टीबी के बैक्टीरिया सांस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं। किसी रोगी के खांसने, बात करने, छींकने या थूकने के समय बलगम व थूक की बहुत ही छोटी-छोटी बूंदें हवा में फैल जाती हैं, जिनमें उपस्थित बैक्टीरिया कई घंटों तक हवा में रह सकते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में सांस लेते समय प्रवेश करके रोग पैदा करते हैं।