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वसंत ने अबके अदा यूं संवारी है, दर्द के कई रंगों से भर उठी हर क्यारी है

अखिल भारतीय साहित्य परिषद नगर इकाई एवं गांधी विचार मंच ने बुधवार को संस्कार मंडपम सोनासांवरी में काव्य गोष्ठी का...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:15 PM IST
अखिल भारतीय साहित्य परिषद नगर इकाई एवं गांधी विचार मंच ने बुधवार को संस्कार मंडपम सोनासांवरी में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया। प्रो. कश्मीर सिंह उप्पल मुख्य अतिथि थे।

अध्यक्षता जीपी दीक्षित ने की। इस अवसर पर कवियित्री गोष्ठी में तरुण तिवारी ने अपनी कविता कदम जमीन पर निगाहें आसमान रखते हैं सुनाई। आलोक शुक्ल अनूप ने कहा तुम पैसों में जीते हम प्यार मे मरते हैं, तुम रहते मकानों में हम दिल में रहते है।

कवि ब्रजकिशोर पटेल की रचना थी आस्था से बड़ा कोई अस्त्र नहीं होता, संयम से बड़ा कोई शस्त्र नहीं होता, और संस्कारों से बड़ा कोई वस्त्र नहीं होता। भगवानदास बेधड़क बोले, सच कभी किसी से डर नहीं सकता। गांधी तो एक विचार है और विचार कभी मर नहीं सकता। रामकिशोर नाविक ने यह गीत गुनगुनाया-किस्मत ने हमें चंद उजाले नहीं दिए, हमने किसी को गम के हवाले नहीं दिए।

दीपाली शर्मा की रचना थी, इस वसंत ने अबके अदा यूं संवारी है, दर्द के कई रंगों से भर उठी हर क्यारी है। दीपाली शर्मा को मप्र लेखक संघ द्वारा उनके खंड काव्य पीड़ा पीती उर्मिला पर प्राप्त पुरस्कार के उपलक्ष्य में सम्मानित किया गया। भगवानदास ने संत रविदास का परिचय दिया। ब्रजमोहन सिंह ठाकुर ने आभार प्रकट किया।

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