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  • 38 elephants reached from Chhattisgarh in Bandhavgarh Tiger Reserve; Not going back even after 8 months

शहडोल / बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छत्तीसगढ़ से 38 हाथी पहुंचे; 8 माह बाद भी वापस नहीं जा रहे



छत्तीसगढ़ से आया हाथियों का झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भ्रमण कर रहा है। छत्तीसगढ़ से आया हाथियों का झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भ्रमण कर रहा है।
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छत्तीसगढ़ से आया हाथियों का झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भ्रमण कर रहा है।छत्तीसगढ़ से आया हाथियों का झुंड बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भ्रमण कर रहा है।

  • एक माह पहले पर्यटकों को आने से रोक दिया गया था
  • रिजर्व की मुश्किलें बढ़ीं, क्योंकि वहां व्यवस्था नहीं 
  • पश्चिम बंगाल से अफसरों को मदद के लिए बुलाया

Dainik Bhaskar

Jul 07, 2019, 01:52 PM IST

शहडोल/उमरिया. उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (बीटीआर) छत्तीसगढ़ के हाथियों को इस कदर पसंद आ गया है कि वे वहां से जाने को तैयार नहीं हैं। 38 हाथियों का झुंड यहां पिछले 8 महीने से डेरा डाले हुए है। इससे टाइगर रिजर्व प्रबंधन के सामने कई मुश्किलें आ गई हैं, क्योंकि यहां हाथियों के देखभाल की कभी कोई तैयारी ही नहीं रही। जंगली हाथियों की मौजूदगी के चलते रिजर्व में कुछ जगहों पर एक महीने से पर्यटकों को आने-जाने पर रोक है।

 

बीटीआर के अधिकारियों के मुताबिक ये हाथी छत्तीसगढ़ से दो अलग-अलग झुंडों में आए थे। पहली बार में 27 और दूसरी बार में 11 हाथी आए। इनके अलावा दो बच्चों का जन्म भी बीटीआर के जंगल में हुआ। इससे यह माना जा रहा है कि फैमिली फाॅर्मेशन के लिए भी ये स्थान हाथियों के लिए काफी मुफीद है। खेतौली के पास से उमरार नदी बहती है, जहां से हाथी अपनी प्यास बुझाते हैं। अभी 30 हाथी खेतौली के आसपास तो 10 हाथी पनपथा के जंगल में घूम रहे हैं। 

 

क्यों पसंद : बांस की पत्तियां, पानी आसानी से मिल रहा
पनपथा के रेंजर वीरेन्द्र ज्योतिषी के मुताबिक बीटीआर में अधिकांश बांस के जंगल हैं। हाथी बांस की पत्तियां खाना ज्यादा पसंद करते हैं। इसके साथ ही हरे पेड़ों की छाल, पानी भी उन्हें आसानी से मिल रहा है, यही कारण है कि हाथी यहां से छत्तीसगढ़ के जंगलों में नहीं लौट रहे हैं। इसके अलावा बीटीआर में शोर शराबा भी नहीं है। छत्तीसगढ़ में जंगलों के बीच कोयले की खदानों में काम और मशीनों के शोरगुल से परेशान हाथियों ने अपना ठिकाना बदल लिया है।

 

देखभाल : विशेषज्ञों की मदद से योजना बना रहे 
शहडोल सर्किल के सीसीएफ एके जोशी ने बताया कि वे पश्चिम बंगाल के वन अधिकारियों की मदद से इन हाथियों की देखभाल की योजना बना रहे हैं, क्योंकि यहां के स्टाफ को इस बारे में अनुभव नहीं है। वहीं, ताला में हाथियों के संरक्षण को लेकर वर्कशॉप भी शुरू हुई है, जिसमें प. बंगाल के मास्टर ट्रेनर रिजर्व के अफसरों के साथ अनुभव साझा कर रहे हैं। हाथियों के स्वभाव, रहवास,  फैमिली फॉर्मेशन , प्रबंधन और इंसानों से उनके झगड़े कम 

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