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‘व्यापमं: आरोपी की अर्जी HC से खारिज, मुन्ना भाई को नहीं दे सकते जमानत’

व्यापमं घोटाले में गिरफ्तार एक प्रोफेशनल मुन्नाभाई को हाईकोर्ट ने जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया है।

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 08:17 AM IST

जबलपुर. व्यापमं घोटाले में गिरफ्तार एक प्रोफेशनल मुन्नाभाई को हाईकोर्ट ने जमानत का लाभ देने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने कहा है कि आरोपी पर लगे आरोप काफी संगीन हैं और उसके सहयोगी अभी फरार हैं, इसलिए उसे जमानत नहीं दी जा सकती। इस मत के साथ युगलपीठ ने उसकी अर्जी खारिज कर दी।

- युगलपीठ ने यह फैसला हरियाणा के भिवाणी में रहने वाले मुकेश कुमार की ओर से दायर अर्जी पर दिया। आरोपी को 19 जुलाई 2017 को भोपाल से गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से रिंकू गुर्जर और अनिल कुमार नाम के दो आई कार्ड और उसके मोबाइल से 34 एडमिट कार्डस के फोटोग्राफ्स भी बरामद हुए थे।

- उस पर आरोप है कि वह एक प्रोफेशनल मुन्ना भाई है, जो दूसरे उम्मीदवारों के स्थान पर परीक्षाएं देता है। इस मामले में जमानत का लाभ पाने यह अर्जी दायर की गई थी।
सुनवाई के बाद अदालत ने आरोपी पर लगे आरोपों को गंभीरता से लेते हुए उसकी अर्जी खारिज कर दी। शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता नम्रता अग्रवाल ने पैरवी की।


व्यापमं घोटाले का आरोपी करे पासपोर्ट के लिए आवेदन

- वहीं व्यापमं घोटाले में एसटीएफ द्वारा आरोपी बनाए गए ग्वालियर के अविरल प्रसाद को हाईकोर्ट ने पासपोर्ट के लिए आवेदन करने की इजाजत दे दी है। शुक्रवार को चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस अनुराग कुमार श्रीवास्तव की युगलपीठ ने आवेदक पर शर्त लगाई है कि पासपोर्ट बनने के बाद वह कोर्ट की इजाजत के बिना बाहर न जाए।

- आरोपी पर विभिन्न आरोपों के तहत एसटीएफ ने आरोप दर्ज किए थे। उस पर आरोप है कि उसने एमबीबीएस की परीक्षा में खुद नकल की और अपने पीछे बैठे उम्मीदवार को भी नकल कराई। आगे की पढ़ाई के लिए आवेदक ने पासपोर्ट बनवाने के लिए आवेदन किया, लेकिन व्यापमं से संबंधित मामले के दर्ज होने के कारण वह खारिज कर दिया गया था।

- आवेदक की ओर से अधिवक्ता नितिन गुप्ता का पक्ष सुनने के बाद युगलपीठ ने उसे फिर से पासपोर्ट के लिए आवेदन करने की इजाजत देते हुए मामले का निराकरण कर दिया। युगलपीठ द्वारा सुनाए गए िवस्तृत आदेश की फिलहाल प्रतीक्षा है।पी-4

इधर, एनआरआई कोटे के छात्रों ने दी प्रवेश निरस्त करने को चुनौती

- प्रदेश के सात मेडिकल काॅलेजों में एनआरआई कोटे के तहत नियम विरुद्ध तरीके से प्रवेश पाने वाले 107 छात्रों के एडमीशन निरस्त करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। पीड़ित 33 छात्रों की ओर से दायर 3 याचिकाओं में डीएमई द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी है।

- निरस्त किये जाने संबंधी मामले में पीड़ित छात्रों ने हाईकोर्ट की शरण ली है। जस्टिस आरएस झा और जस्टिस राजीव कुमार दुबे की युगलपीठ ने राज्य सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए केवियट दायर करने वाले छात्रों के अधिवक्ता को उक्त याचिका की प्रतियां देने कहा है। मामलों पर अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी।
- गौरतलब है कि प्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस कोर्स वर्ष 2017-18 में नियम विरुध्द तरीके से एनआरआई कोटे मंे अपात्र छात्रों को दाखिला दिये जाने तथा प्रवेश के लिए आयोजित अंतिम काउंसलिंग में दूसरे प्रदेश के व कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों को सीट बेचने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।

- हाईकोर्ट ने डीएमई को निर्देशित किया था कि वे एनआरआई कोटे तथा मॉप अप राऊण्ड में प्रवेश पाने वाले छात्रों के दस्तावेज जब्त कर उनकी जांच करके आवश्यक कार्रवाई करें। उक्त आदेश के परिपालन में डीएमई ने अपनी रिपोर्ट पेश कर कहा था कि एनआरआई कोटे में एडमीशन पाने वाले 107 छात्रों के दाखिले नियम विरुद्ध पाते हुए निरस्त कर दिए गए हैं।

- इस पर प्रवेश निरस्त होने के खिलाफ एनआरआई कोटे के 33 छात्रों ने यह मामला दायर किया है। याचिकाकर्ता छात्रों का आरोप है कि डीएमई ने बिना सुनवाई का अवसर दिए उनके प्रवेश निरस्त किए हैं, जो कि प्राकृतिक न्याय सिद्धांत का उल्लंघन है।

- याचिकाओं में राहत चाही गई है कि डीएमई के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाये।
मामलों पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता छात्रों की ओर से अधिवक्ता शशांक शेखर, आकाश चौधरी, राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता दीपक अवस्थी और केवियट दायर करने वाले छात्रों की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को जवाब पेश करने के निर्देश देकर सुनवाई 8 जनवरी तक के लिए मुलतवी कर दी। पी-4