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ह्यूमन राइट्स के अध्यक्ष पद की कुर्सी खाली, सरकार ने नहीं भरी तो ज्यूडिशियल ऑर्डर से भरेंगे- हाईकोर्ट

कोर्ट ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई 16 अप्रैल को तय की है।

Danik Bhaskar | Mar 14, 2018, 12:20 AM IST
जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को दि जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकार को दि

जबलपुर/भोपाल. पिछले 8 सालों से खाली पड़े राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति के प्रति सरकार के उदासीन रवैये पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। हाईकोर्ट ने कहा कि अब अगर सरकार ने उक्त पद पर नियुक्ति नहीं की तो हम ज्यूडीशियल ऑर्डर पारित कर नियुक्ति कर देंगे। इस आदेश के साथ चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस विजय शुक्ला की बैंच ने सरकार को अंतिम अवसर देते हुए अगली सुनवाई 16 अप्रैल को तय की है।

बैठक हुई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी थी

- कोर्ट ने 9 फरवरी को आदेश दिए थे कि अगर 4 सप्ताह के भीतर चेयरमैन की नियुक्ति नहीं की तो सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा। मामले पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान सामान्य प्रशासन विभाग के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी प्रभांशु कमल हाजिर हुए।

- उन्होंने कोर्ट को बताया कि इस मामले में प्रशासनिक समिति को निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि एक फरवरी को बैठक हुई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बनी।

2015 में दायर किया गया था मामला

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपाण्डे की ओर से यह मामला 2015 में दायर किया गया था। जिसमें आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति न किए जाने को चुनौती दी गई। आवेदक का कहना है कि 14 अगस्त 2010 को जस्टिस डीएम धर्माधिकारी मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उसके बाद पूर्व जस्टिस एके सक्सेना को कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया। उनके रिटायरमेंट के बाद से अध्यक्ष का पद खाली है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने पक्ष रखा।

27 पेशियों से समय ले रही सरकार|

पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से युगलपीठ को बताया गया था कि 7 साल से अध्यक्ष का पद खाली है और सरकार पिछली 27 पेशियों से जवाब के लिए समय ले रही है। इसी दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

ऐसे होता है गठन

मानवाधिकार आयोग अधिनियम 1993 की धारा 21 के तहत आयोग का गठन होता है। इसमें अध्यक्ष समेत 3 सदस्य होते हैं। आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट का सेवानिवृत्त चीफ जस्टिस होता है। एक्ट की धारा 22 के तहत 4 सदस्यीय कमेटी अध्यक्ष का चुनाव करती है। कमेटी में मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और गृह मंत्री होते हैं। एक्ट की धारा 24 के तहत चेयरमैन का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। अधिकतम आयुसीमा 70 वर्ष निर्धारित है।