शिक्षा का अधिकार, फिर भी पढ़ाई अधूरी, क्योंिक स्कूल नदी के पार

bhaskar news | Last Modified - Jan 14, 2018, 06:19 AM IST

21 गांवों के छात्र-छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हैं।
  • शिक्षा का अधिकार, फिर भी पढ़ाई अधूरी, क्योंिक स्कूल नदी के पार

    जबलपुर. शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुए भले ही नौ साल हो गए हैं, लेकिन की स्थिति यह है कि आज भी आदिवासी क्षेत्रों के बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हैं। कई गांवों में स्कूल नहीं हैं, तो वहीं कई स्कूल ऐसे स्थान पर हैं, जहां बच्चों को नदी पार करके स्कूल जाना होता है। जिला शिक्षा केन्द्र के बीआरसी ने एक िरपोर्ट जिला परियोजना समन्वयक को भेजी है, जो चौंकाने वाली है।

    रिपोर्ट में कहा है कि स्कूल नदी पार हैं,जिसके कारण बच्चे प्राथमिक व माध्यमिक कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद पढ़ाई बीच में ही अधूरी छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद महके में हड़कंप है और आनन-फानन में रिपोर्ट जिला पंचायत सीईओ के माध्यम से सरकार के पास भेजी गई है।
    उल्लेखनीय है कि संभागीय मुख्यालय के विभिन्न विकासखंडों के अंतर्गत आने वाले 21 गांवों के छात्र-छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोडऩे को मजबूर हैं।

    इन गांवों में प्राथमिक एवं माध्यमिक तक स्कूल है। प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षा तक की पढ़ाई करने के बाद इनकों पढ़ाई के िलए दूसरे गांव जाना पड़ता है। दूसरे गांव जाने के िलए बीच में नदी पड़ती है, िजसको पार करना खतरों से भरा होता है। जिला शिक्षा केन्द्र अंतर्गत आने वाले पाटन, मझौली, शहपुरा और जबलपुर ग्रामीण के बीआरसी ने एक िलखित पत्र भेजकर यहां स्थायी व अस्थायी पुल बनाए जाने की गुहर लगायी है, ताकि बच्चे सुरक्षित अपना भविष्य बना सकें।

    पाटन विकास खंड अंतर्गत आने वाले गांव
    पाटन विकासखंड अंतर्गत आने वाले गांव चरगवां, अकोना, दोहरा, कूडां, देवरी, मढय़िा, मनकवारा में प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूल ही है। इसके बाद की पढ़ाई करने के िलए छात्र-छात्राओं को कैमोरी आना पड़ता है। इसके िलए उन्हें हिरन नदी पार करनी होती है। यहां केवल एक छोटी सी नाव है, िजसमें रोना सफर करना जोखिम भरा होता है।


    अन्य विकासखंडों में भी स्थिति खराब
    मझौली विकासखंड में घुघरा, मगरकटा, मुरैठ,खिरकाड्डी, शहपुरा में िहनौतिया, जबलपुर ग्रामीण में भेड़ाघाट, कोसमघाट, बम्हनौदा, पिपरिया, टींगनगांव एवं परासिया ऐसे गांव हैं, जहां पर बच्चे नदी पार करने के डर से पढ़ाई छोड़ रहे हैं।

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