Hindi News »Madhya Pradesh »Jabalpur» Unsuccessful Schemes, Chhattarpur Killed 265 Infant Deaths In Ten Months

असफल साबित हो रहीं योजनाएं, छतरपुर में दस माह में 265 शिशुओं की मौत

शासन प्रशासन द्वारा कुपोषण पर रोकथाम के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहें हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके एकदम उलट है। जिले

Bhaskar News | Last Modified - Nov 15, 2017, 08:10 AM IST

छतरपुर. शासन प्रशासन द्वारा कुपोषण पर रोकथाम के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहें हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके एकदम उलट है। जिले में कुपोषण के आंकड़े इस बात के गवाह हैं कि सरकारी तंत्र इसे रोकने में पूरी तरह असफल साबित हो रहा है। अहम सवाल यह है कि इस प्रकरण से जुड़े विभाग की मुखिया जिले की विधायक एवं राज्यमंत्री ललित यादव हैं, जिन्हें अभी यह भी नहीं मालूम कि जिले में कुपोषण कितने खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है।
- जिसमें से अब तक 265 मौतें सरकारी आंकड़े में दर्ज हैं। गैर सरकारी सूत्र तो यह आकड़ा दो गुना बताते हैं, क्योंकि बहुत बच्चे तो अस्पताल की दहलीज तक पहुंच ही नहीं पाते हैं और काल के गाल में समा जाते हैं। शेष|पेज 12
एसएनसीयू की व्यवस्था पर सवाल| जिला अस्पताल में एसएनसीयू विभाग में स्टॉफ की कमी और वेंटीलेटर की वजह से आये दिन बच्चों की मौतें हो रही हैं। जिला अस्पताल के एसएनसीयू की व्यवस्थाओं को लेकर जिले से दो मंत्रियों पर आये दिन आरोप लगाये जाते हैं। एसएनसीयू वार्ड में बच्चों के इलाज को लेकर सभी व्यवस्थाओं में कमी होने के कारण आज भी बच्चों की मौतें होना जारी है।
- राज्यमंत्री ने नहीं दिया जवाब-छतरपुर विधायक एवं महिला बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमति ललिता यादव से बात की गई और पूछा गया कि आपके जिले में कुपोषण से मौत के आंकड़े दिन व दिन बढ़ते जा रहे हैं, तो उन्होंने कहा- मैं बाद में बात करूंगी। इसके बाद लगातार भास्कर द्वारा उनसे बात करने की कोशिश की गई, पर उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
क्या है 265 बच्चों की मौत की वजह
- जिले में कुपोषण से बच्चों की मौत होने पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। जानकारी यह भी दी गई है कि बच्चों में जन्म से ही कुपोषण से मौत हो जाती है। प्रशासन महिलाओं को नियमानुसार पोषण अाहार दे तो कुपोषित बच्चों की संख्या में कमी हो सकती है। प्रशासन की लापरवाही से जिले में प्रतिमाह 25 से 30% शिशुओं की मौत हो रही है और प्रशासन आंख बंद किये बैठा हुआ है।
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