'8 लाख का चाहिए लोन, 10वीं की मार्कशीट है न?'

10 वर्ष पहले
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जबलपुर। कक्षा 10वीं की मार्कशीट पर 8 लाख रुपये लोन दिलाने की बात करते हुए युवक ने धोखे से 45,440 रुपये अपने अकाउंट में जमा करा लिये। जब बेरोजगार युवक को लोन का पैसा नहीं मिला और उसने अपने-आप को ठगा हुआ पाया तो उसने थाने पहुंचकर अपनी आप-बीती पुलिस को सुनाई, जिस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर प्रकरण विवेचना में लिया है। पुलिस ने बताया कि थाने पहुंचकर दर्शनी निवासी विजय चौधरी ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह बेरोजगार है। लोन लेने हेतु उसने गुड़गांव के अजय शर्मा के मोबाइल पर संपर्क किया था, जिन्होंने 10वीं की मार्कशीट पर 8 लाख रुपये मिल जाने की बात की थी। अजय ने उस समय अपने एजेन्ट से भी बात कराई थी, जिन्होंने मार्कशीट, जाति प्रमाणपत्र, बिजली का बिल आदि कागजात ई-मेल करने को कहा था। उसने सारे कागजात 9 अगस्त 2011 को भेज दिये थे। दूसरे दिन अजय ने अकाउंट नम्बर दिया था, जिसमें 4600 रुपये जमा करने को कहा था और तीन-चार घंटे में चार लाख रुपये मिल जाने की बात की। अकाउंट नम्बर सिमरन कौर पिता नेक सिंह निवासी सहस्त्रधारा रोड इन्कलेव गली नम्बर एक देहरादून का था। जिस पर उसने पैसे जमा कर दिये थे। इसके बाद अजय ने बैंक मैनेजर का कमीशन 25,240 रुपये तथा 10 हजार रुपये तहसीलदार के नाम से सिमरन के अकाउंट में जमा करा लिये। इसके बाद फोन लगाने पर अजय से संपर्क नहीं हो सका और उसके अकाउंट में भी रुपये नहीं पहुंचे। पुलिस ने प्रकरण विवेचना में लिया है।