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ग्राउंड रिपोर्ट / 38 सीटें; जहां तीन मंत्री, दो प्रदेश अध्यक्ष और दो पूर्व मंत्रियों की साख दांव पर



assembly election 2018, mahakoshal
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assembly election 2018, mahakoshal

  • महाकौशल के 8 जिलों में हालात दोनों दलों के खिलाफ

Dainik Bhaskar

Oct 13, 2018, 11:40 AM IST

जबलपुर। सबसे अहम चुनावी क्षेत्र महाकौशल। यहां 8 जिलों की 38 सीटें हैं और अभी भाजपा 25 और कांग्रेस 13 पर काबिज है पर इस बार यहां तीन मंत्री (शहपुरा से ओमप्रकाश धुर्वे, विजयराघवगढ़ से संजय पाठक और जबलपुर मध्य से शरद जैन, तीनों ही किसी न किसी मुश्किल में घिरे हैं), दो प्रदेशाध्यक्ष (भाजपा के राकेश सिंह, कांग्रेस के कमलनाथ), दो पूर्व केंद्रीय मंत्रियों (फग्गन सिंह कुलस्ते, प्रह्लाद पटेल) और दो पूर्व मंत्री (बडवारा से मोती कश्यप, जबलपुर पूर्व से अंचल सोनकर) की साख दांव पर लगी है। मौजूदा विधायकों पर सीट बरकरार रखने का भारी दबाव है, क्योंकि एंटी इंकम्बेंसी, किसानों की नाराजगी, सवर्ण आंदोलन और पलायन के मुद्दे गरमाए हुए हैं। 

 

नरसिंहपुर की चारों और कटनी, बालाघाट की आधी सीटों पर फसल का समर्थन मूल्य किसानों के बीच सबसे हॉट टॉपिक बना हुआ है। जबलपुर पश्चिम सीट से कांग्रेसी विधायक तरुण भनोत की दूसरी सीटों पर दखंलदाजी से अन्य कांग्रेसी नाराज हैं। वहीं मौजूदा 13 सीटों पर भी विधायकों द्वारा पांच साल में अपने वादे पूरे नहीं करने के कारण वोटर्स की नाराजगी ने कांग्रेस के सामने मुश्किल खड़ी कर दी है। ऐसे में ये 13 सीटें भी संकट में हैं। 


सक्सेस के साइलेंट किलर : आधा दर्जन सीटें, जहां फैक्टर ही ताकतवर 
- महाकौशल के पूर्वी हिस्से की आदिवासी बहुल सीटों पर गोंगपा की सेंध भाजपा-कांग्रेस के लिए चिंताजनक रही है। गोंगपा की यूथ विंग जीएसयू तथा जयस ने क्षेत्र में अंडर करंट पैदा किया है।
- पिछडे़ क्षेत्र मण्डला, डिंडोरी, सिवनी की कुछ सीटों पर सरकार के प्रति नाराजगी वोटों में कटौती कर सकती है। मण्डला के बिछिया में हालात इतने बिगड़ गए थे कि सीएम को दखल देना पड़ा। 
- मंत्री संजय पाठक की सीट विजयराघवगढ़ पर कांग्रेस की पद्मा शुक्ला चुनौती दे रही हैं। वे भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आईं हैं। सिवनी में निर्दलीय रहे मुनमुन राय के सामने भी ऐसी ही चुनौती है। 

 

चौपाल से... जे बेर कछु लफड़ा पक्कई समझो, मम्मा भी घबराओ है 

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- रामलाल : कैसन बीमारी आई रे प्राणन की पड़ गई। सरकार कछु करत-धरत नई है। दुई रोज पहले कलक्टर बाई केसन गुसियाई रही, नई देखो का फोटू भी तो छपी रही। 
- बैसाखू : जे साहबई लोग तो लुटिया डुबान में लगे हैं। कुल्ल दिनन से सवई ठीक ठाक चलत रहो। अचानक माहौल बदलो। 
- महन्ता : बडडे जे बेर कछु न कछु लफड़ा तो जरूरई हुई। जैसन सरकार रात-दिन एक करन में लगी है, उसे पता चलत है कि हवा टाइट है। मम्मा भी घबराओ दिखत हे। 
- शिव कुमार : कौनऊ कछु कहे, काम तो भओ है। झोपड़िया में रहत रहे, लेंटर वारो मकान बन गओ। बत्ती भी मुफ्तई घाई हो गई है। अनाज पहले से मिलतई रहो।... और का चाही। 
- सुग्रीव सिंह : सरकार अस्पताल खोल दई, स्कूलओ बना दई। अब जा देखन बारो कोई ना हे कि डाक्टर-मास्टर पहुंचत भी है कि नई। एक मास्टरनी के गले में 50 बच्चन खे बान्ध दये है। 

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