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डेढ़ साल से अटकी कैंसर, डिप्रेशन व डायबिटीज की रिसर्च, चिकित्सा शिक्षा विभाग से गायब हुई अनुबंध की फाइल

10 महीने पहले
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  • बीमारियों पर रिसर्च के लिए शुरू होना है मल्टी डिसीप्लनरी रिसर्च यूनिट, मान्यता के लिए डीन को लिखा पत्र

सागर। कैंसर, डिप्रेशन, डायबिटीज जैसी असंक्रामक बीमारियों पर रिसर्च के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की मान्यता पिछले डेढ़ साल से अटकी हुई है। रिसर्च को लेकर बीएमसी में तैयारियां पूरी हैं, वहीं शासन ने मल्टी डिसीप्लीनरी रिसर्च यूनिट (एमडीआरयू) शुरू करने के लिए 4 करोड़ रुपए होना हैं, लेकिन केंद्र से अनुमति न मिलने के कारण अब तक मामला अटका पड़ा।
 
जब दैनिक भास्कर टीम ने मामले की पड़ताल करते हुए यूनिट के शुरू न होने पाने का कारण पता किया तो सामने आया कि रिसर्च को लेकर मप्र शासन और केंद्र के बीच जो अनुबंध हुआ था, उसकी फाइल चिकित्सा शिक्षा विभाग में गुम हो गई है। जिसके चलते केंद्र सरकार की मंजूरी नहीं मिल पा रही। मामले का खुलासा डीएमई से आए एक पत्र के माध्यम से हुआ है, जिसमें डीन से राज्य व केंद्र सरकार के बीच हुए करार की कॉपी मांगी गई है। हालांकि डीन ने कॉपी तो भेजी दी, लेकिन इस पूरे मामले ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही की पोल-खोल दी है।

2018 में भेजा था प्रस्ताव, फिजियोलॉजी विभाग में बनेगी रिसर्च लैब
जानकारी के अनुसार भारत सरकार के प्रोजेक्ट मल्टी डिसीप्लीनरी रिसर्च यूनिट (एमडीआरयू) को सागर में स्थापित करने के लिए बीएमसी प्रबंधन ने 2018 में आवेदन किया था। इसके लिए कैंसर, डिप्रेशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों पर रिसर्च करने के लिए एक प्रपोजल बनाकर भेजा गया। जिसे राज्य सरकार और केंद्र सरकार से अनुमति मिली और दोनों के बीच एमओयू (अनुबंध) भी साइन हो गया। लेकिन इसी बीच चिकित्सा शिक्षा विभाग से अनुबंध की फाइल गायब हो गई और प्रोजेक्ट की मंजूरी के बाद लैब के लिए मिलने वाली 4 करोड़ रुपए की राशि अटक गई। अब डीएमई ने डीन से अनुबंध की कॉपी मांगी है। जिसे दस्तावेजों के साथ लगाकर दिल्ली भेजा जाएगा। बीएमसी में यह रिसर्च लैब फिजियोलॉजी विभाग में तैयार होगी। इसके बाद लैब के लिए वैज्ञानिकों, डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की तैनाती भी की जाएगी।

असंक्रामक बीमारियों की रिसर्च से यह होगा लाभ
कैंसर, हृदय रोग, डायबिटीज और फेफड़ों की बीमारियों जैसे रोगों से होने वाली मौतों के मामले 70% तक बढ़ गए हैं। यह आंकड़ा तीन साल पहले 42% था। देश में इन रोगों के चलते प्रति चार में से एक व्यक्ति को 70 साल की उम्र तक पहुंचने से पहले ही मृत्यु का खतरा बना रहता है। असंक्रामक बीमारी एक ऐसी बीमारी है, जो लोगों के बीच किसी इंफेक्शन से नहीं फैलती। ऐसे में बीएमसी के डॉक्टर असंक्रामक बीमारियों से पीड़ित मरीजों की बीमारियों पर रिसर्च करेंगे और इससे बुंदेलखंड में होने वाली कई नई बीमारियों और उनके कारणों का पता भी चलेगा। प्रदेश में भोपाल और इंदौर के बाद जबलपुर, ग्वालियर और रीवा मेडिकल कॉलेज को एमडीआरयू प्रोजेक्ट की मंजूरी मिल चुकी है, वहीं फाइल गुम होने के कारण सागर मामला अब भी अटका हुआ है।

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