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जबलपुर / सरकार की नई रेत नीति को हाईकोर्ट में चुनौती; कोर्ट ने नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में मांगा जवाब



जबलपुर हाईकोर्ट। - फाइल फोटो जबलपुर हाईकोर्ट। - फाइल फोटो
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जबलपुर हाईकोर्ट। - फाइल फोटोजबलपुर हाईकोर्ट। - फाइल फोटो

  • याचिका में कहा गया है कि नई रेत नीति के प्रावधानों में रेत भंडारण और बेचने के लिए दिए गए लाइसेंस जीरो घोषित कर दिए हैं 

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 08:23 PM IST

जबलपुर. मध्यप्रदेश सरकार की नई रेत नीति-2019 के प्रावधानों को कटघरे में रखते हुए उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। दायर मामले में कहा गया है कि नई रेत नीति के प्रावधानों द्वारा रेत भंडारण और बेचने के लिए दिए गए लाइसेंस जीरो घोषित कर दिए गए हैं। 

 

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरएस झा और न्यायाधीश विशाल धगट की युगलपीठ ने शुक्रवार को मामले की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात मप्र शासन सहित अन्य अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिये हैं।

 

सागर के मकरोनिया निवासी रेत ठेकेदार अभिषेक सिंह द्वारा याचिका दायर की गई है। इसमें मप्र शासन द्वारा जारी रेत नीति 2019 को चुनौती दी गई है। आवेदक का कहना है कि रेत नीति 2019 के नियम 17 (1) व 18 (1) को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (द) से असंगत बताया गया है। आवेदक का कहना है कि रेत नीति 2018 के प्रावधानों के तहत रेत भंडारण के लिए 5 साल और रेत बेचने के लिए 3 साल की अवधि के लिए दिए गए लाइसेंस नई रेत नीति 2019 के नियम 17 (1) व 18 (1) के तहत शून्य घोषित कर दिए गए हैं। 

 

इतना ही नहीं जमा की गई रॉयल्टी संबंधित कलेक्टर को वापस करने का प्रावधान है। आवेदक का कहना है कि उसने पांच माह पूर्व ही लाइसेंस लिया है। जिसके प्रर्वतन अवधि में नये प्रावधान बनाकर बिना समुचित सुनवाई के निरस्त या शून्य नहीं किया जा सकता। मामले में मप्र शासन के खनिज संसाधन विभाग, माइनिंग डायरेक्टर और छतरपुर कलेक्टर को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।

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