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धनुष तोप मामला / जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में सीबीआई का छापा, कंप्यूटर और फाइलें जब्त की

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 05:20 PM IST


धनुष तोप को बोफोर्स का स्वदेशी संस्करण माना जाता है। धनुष तोप को बोफोर्स का स्वदेशी संस्करण माना जाता है।
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धनुष तोप को बोफोर्स का स्वदेशी संस्करण माना जाता है।धनुष तोप को बोफोर्स का स्वदेशी संस्करण माना जाता है।

  • सीबीआई ने धनुष तोप के कलपुर्जों की खरीदी से जुड़े जूनियर वर्क्स मैनेजर बयान दर्ज किए हैं

जबलपुर. जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में बनाई जा रही धनुष तोप के कलपुर्जों की खरीदी में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही सीबीआई की टीम ने यहां छापा मारा है। आरोप है कि तोपों में जो कलपुर्जे लगाए गए हैं, उन्हें जर्मनी का बताया गया, जबकि वह चीन से खरीदे गए कलपुर्जे हैं। धनुष बोफोर्स तोप का स्वदेशी संस्करण है, इसे भारतीय रक्षा जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। गुरुवार को पहुंची टीम ने शुक्रवार को जीसीएफ के जूनियर वर्क्स मैनेजर के घर पर छापा मारा और उनके बयान दर्ज किए। 

 

सीबीआई की टीम गुरुवार को दोबारा जबलपुर पहुंची। उसने गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) पर दबिश देते हुए कलपुर्जों की खरीद से जुड़े कई अहम दस्तावेज और उपकरण सीज कर दिए हैं। टीम ने धनुष तोप में की गई बेयरिंग्स की खरीदी प्रक्रिया से जुड़े जूनियर वर्क्स मैनेजर एससी खपुआ के दफ्तर और घर पर भी छापा मारा है और वहां से कंप्यूटर और अन्य फाइलें जब्त की हैं। 

 

असल में, धनुष तोपों में चीनी कलपुर्जे लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद सीबीआई ने दिल्ली की सिद्ध सेल्स सिंडीकेट कंपनी सहित अज्ञात अधिकारियों के ख़िलाफ एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई टीम इसी केस की जांच के सिलसिले में जबलपुर पहुंची है। 

 

2017 से चल रही है जांच 
2017 में सीबीआई ने इस मामले में दिल्ली की सिद्ध सेल्स सिंडिकेट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। साथ ही जांच एजेंसी ने जबलपुर की गन कैरिज फैक्टरी (जीसीएफ) के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक साज़िश, धोख़ाधड़ी और जालसाज़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामला उजागर होने के बाद 2 दिन तक जबलपुर में सीबीआई की टीम ने कई अधिकारियों से पूछताछ की। धनुष सेक्शन की फाइल भी जब्त की गई है। साथ ही चीन और सिद्ध सेल्स सिंडिकेट के बीच किए गए कई ईमेल भी पकड़े हैं। 

 

सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने प्राथमिकी में कहा कि जीसीएफ के अज्ञात अधिकारियों ने चीन में बने वायर रेस रोलर बियरिंग्स को जर्मनी मेड बताकर ख़रीद लिया। इसकी आपूर्ति सिद्ध सेल्स सिंडिकेट की ओर से सीआरबी-मेड इन जर्मनी के तौर पर की गई थी। ऐसी चार बियरिंग के लिए निविदा जारी की गई और वर्ष 2013 में 35.38 लाख रुपए मूल्य का ऑर्डर सिद्ध सेल्स सिंडिकेट को दिया गया। इसके बाद 7 अगस्त 2014 को ऑर्डर बढ़ाकर छह बियरिंग का कर दिया गया जिसका मूल्य 53.07 लाख रुपए हो गया।

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