पन्ना टाइगर रिजर्व में 10 साल पहले हुई थी बाघों की पुर्नस्थापना की शुरुआत; आज 50 बाघों का कुनबा

3 वर्ष पहले
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  • पेंच टाइगर रिजर्व से लाये लाए गए बाघ टी3 ने इस वंश वृद्धि में निभाई अहम भूमिका
  • पन्ना में बाघ पुर्नरस्थापना की 10वीं वर्षगांठ पर समारोह का आयोजन
  • समारोह में पन्ना वासियों की रही भागीदारी, उन्हें सम्मानित किया गया

पन्ना. पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघ पुर्नस्थापना योजना के एक दशक पूरे होने पर मंगलवार को कामयाबी का जश्न मनाया गया। हर साल 5 नवंबर को बाघ पुर्नस्थापना योजना की सालगिरह मनाई जाती है। असल में इसी दिन पेंच टाईगर रिजर्व से उस नर बाघ को पन्ना लाया गया था, जिसने बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाईगर रिजर्व को फिर से गुलजार कर दिया है।  इस समय पन्ना टाईगर रिजर्व में बाघों की संख्या 50 तक पहुंच गई है। जिनमें अधिकांश इसी नर बाघ टी-3 की संतान हैं। 
 

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पन्ना बाघ पुर्नस्थापना योजना की कामयाबी के 10 साल पूरे होने पर बाघ टी-3 के सम्मान में पन्ना में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर पन्ना बाघ पुर्नरस्थापना में अपना योगदान देने वाले हर किसी अधिकारी, कर्मचारी, फ्रेंड्स ऑफ पन्ना के सदस्यों को सम्मानित और पुरस्कृत किया गया। तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर श्रीनिवास मूर्ति ने बताया कि पन्ना में बाघ पुर्नरस्थापना योजना को शानदार कामयाबी इसलिए भी मिली कि पन्ना वासियों ने अपने खोए गौरव को फिर से हासिल करने के लिए हर तरह की कुर्बानी भी दी। जैसे पन्ना में आज तक किसी भी प्रकार की कोई भी औद्योगिक कारखाना नहीं लगाया गया। 
 

जन समर्थन से बाघ संरक्षण का नारा 
तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक आर श्रीनिवास मूर्ति ने जन समर्थन से बाघ संरक्षण का नारा दिया गया था, जो बाद में कारगर बना और बाघों के संरक्षण के लिए भारी जनसमर्थन मिला। इसे ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय निदेशक केएस भदौरिया ने कार्यक्रम में फ्रैंड्स ऑफ पन्ना के सदस्यों, लोगों को बुलाया और उन्हें सम्मानित भी किया। 

ये है पन्ना में बाघों को बसाने की कहानी 
पन्ना टाइगर रिजर्व में वर्ष 2009 में बाघों की संख्या शून्य हो गई थी, तब तत्कालीन फील्ड डायरेक्टर आर श्रीनिवास मूर्ति ने बाघ पुनर्स्थापना की योजना बनाई और उसे क्रियान्वित करते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व से एक बाघिन बांधवगढ़ से हेलीकॉप्टर द्वारा लाई गई। लेकिन नर बाघ के बगैर बाघों की संख्या नहीं बढ़ती। इसलिए हमने पेंच टाइगर रिजर्व से एक युवा नर बाघ टी3 यहां लेकर आए। इसके बाद कान्हा नेशनल पार्क से दो अनाथ बाघिनों को भी यहां लाया गया। ये दोनों बहनें अपनी मां की मौत के बाद अनाथ हो चुकी थीं और कान्हा नेशनल पार्क में एक बाड़े में रहकर पल रही थी। इन्हें भी पन्ना लाया गया। उस समय 4 बाघिन और 1 नर बाघ लाया गया था। 

 

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