सागर / आरोपी तपश लुप्त प्रजाति के प्राणियों का अंतरराष्ट्रीय तस्कर, उसे जमानत नहीं दी जा सकती : एडीजे कोर्ट



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Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 11:58 AM IST

सागर। जिला कोर्ट में अलग-अलग अदालतों में लगी वन्य प्राणियों के दो तस्करों की जमानत अर्जियां खारिज हो गई। एक अर्जी पर कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि तपश लुप्त प्रजाति के वन्य प्राणियों का अंतरराष्ट्रीय तस्कर है। उसे जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। दूसरे मामले में कोर्ट ने सांभर के सींगों की तस्करी के फरार आरोपी की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। 


जिला अभियोजन के मीडिया प्रभारी ब्रजेश दीक्षित ने बताया कि द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने पेंगोलिन और लाल तिलकधारी कछुए के तस्कर प्रतापगढ़ कोलकाता निवासी तपश पिता तपन बशख की अर्जी पर सुनवाई की। कोर्ट ने तर्क सुनने के बाद कहा कि आरोपी मलेशिया, बांग्लादेश तथा थाईलैंड में अन्य आरोपियों के साथ मिलकर तिलकधारी कछुए जैसे विलुप्त वन्य प्राणी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी में लिप्त है। प्रकरण में इंटरपोल इन्वायरमेंटल सिक्योरिटी द्वारा भी आरोपी को इन देशों में तस्करी करने संबंधी दस्तावेज दिए गए हैं। 


तपश ने इस मामले के अन्य आरोपी विजय गौड़, संपतिया, कमल बाथम को हाईकोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के आधार पर जमानत मांगी है। इस तर्क के संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि आरोपी ने हाईकोर्ट में भी जमानत के लिए याचिका दाखिल की थी। जिसे निरस्त कर दिया गया है। तपश पर तस्करी के अलावा अन्य अपराध करने के आरोप भी हैं। इन परिस्थितियों में आरोपी का जमानत आवेदन स्वीकार योग्य नहीं है। 


सांभर के सींगों के तस्कर की अर्जी भी खारिज 
सांभर के सींग तथा वन्यजीवों के अवयवों की तस्करी के मामले में फरार चल रहे तीसरे आरोपी बरोदियाकलां निवासी महेंद्र पिता मंगल सिंह लोधी की अग्रिम जमानत अर्जी चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश पंकज यादव ने खारिज कर दी। आरोपी ने आवेदन में कहा था कि उसे प्रकरण के मुख्य आरोपी प्रिंस से पारिवारिक विवाद होने के कारण झूठा फंसाया गया है। वह निर्दोष है और समाज में काफी प्रतिष्ठा है। 


सागर का स्थाई निवासी है। उसके फरार होने की संभावना नहीं है। जमानत का लाभ दिया जाए। कोर्ट ने केस डायरी के अवलोकन में पाया कि आरोपी प्रिंस लोधी के घर पर 8 जून को छापामार कार्रवाई के दौरान पुलिस और वन विभाग ने तेंदुए की खाल के दो टुकड़े, सांभर के 6 सींग, जबड़ा तथा 750 ग्राम गांजा जब्त किया था। प्रिंस के बयान के अनुसार अपराध में आरोपी की भी संलिप्तता है। आरोपी के अपराध की प्रकृति व प्रकरण के जांच प्रक्रिया में होने के कारण अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। 

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