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अविवाहित नाबालिग ने बेटी को जन्म दिया, अपनाने से इनकार

दुष्कर्म का शिकार एक और नाबालिग 16 वर्षीय अविवाहित लड़की के अनचाहा प्रसव हुआ और उसने बेटी को जन्म दिया। शादी की तारीख...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:35 AM IST

अविवाहित नाबालिग ने बेटी को जन्म दिया, अपनाने से इनकार
दुष्कर्म का शिकार एक और नाबालिग 16 वर्षीय अविवाहित लड़की के अनचाहा प्रसव हुआ और उसने बेटी को जन्म दिया। शादी की तारीख नजदीक होने तथा परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने से पीडि़ता व परिजन ने दुष्कर्मी के खिलाफ एफआईआर तक नहीं करवाई। नवजात बेटी को अपनाने से इनकार कर दिया। सूचना पर बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ने पीडि़ता व उसके परिवार से संपर्क किया। काफी समझाइश के बावजूद वे नहीं मानें तो मासूम को समिति ने अपने संरक्षण में लिया। बच्ची कमजोर और सामान्य से कम वजन की होने से इलाज के लिए जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती किया है।

16 वर्षीय लड़की से शादीशुदा व्यक्ति ने की थी ज्यादती, 8-9 महीने में चैकअप करवाया तो पता चला

रतलाम ग्रामीण क्षेत्र की एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की की यह दास्तां है। उसके साथ शादीशुदा व्यक्ति ने दुष्कर्म किया। इससे उसे गर्भ ठहर गया। पहले सामान्य पेटदर्द की आशंका के चलते डॉक्टर को नहीं दिखाया। मां जागरूक नहीं है और पिता अक्सर मजदूरी के काम से बाहर रहते हैं। परिजन को भी मालूम नहीं चला। 8-9 महीने में चैकअप करवाया तो पता चला गर्भावस्था है और बच्चा पेट में जिंदा है। पीडि़ता और परिजन दोनों घबरा गए लेकिन समाज और परिवार में बदनामी ना हो, इसलिए किसी को बताया नहीं। कुछ महीनों बाद उसकी शादी होना तय थी, वह रिश्ता न टूटे, इसलिए उन्होंने दुष्कर्मी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की। गर्भवती पीडि़ता घर में कैद होकर रह गई। शुक्रवार को उसने बेटी को जन्म दिया। इसके बाद नाबालिग मां व उसके परिजन ने इस अनचाही बेटी को अपनाने से मना कर दिया। सूचना पर रतलाम जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ. रचना भारतीय व टीम पीडि़ता से मिले। पहले तो पीडि़ता व परिजन को समझाइश दी। एफआईआर के लिए कहा लेकिन वे किसी स्थिति में राजी नहीं हुए। जब नाबालिग मां ने खुद व अनचाही बेटी को खत्म करने तक की चेतावनी दी तो फिर बाल कल्याण समिति ने समझाइश देते हुए फिलहाल बेटी को अपने संरक्षण में ले लिया। समिति अध्यक्ष डॉ. भारतीय ने बताया शनिवार सुबह बच्ची को जिला अस्पताल के शिशु वार्ड में भर्ती करवा दिया है। सीएचएमओ डॉ. प्रभाकर ननावरे व उनकी टीम की निगरानी में बच्ची का इलाज चल रहा है। उसके स्वस्थ होने का इंतजार है। इधर फिर से पीड़िता व परिजन को बच्ची को अपनाने के लिए समझाइश देंगे। यदि वे नहीं अपनाएंगे तो विधिवत रूप से बच्ची को शिशु घर भेजेंगे। वहां से उसके गोद देने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। बच्ची का नाम देव्यानी रखा है।

देव्यानी को गोद में लेकर दुलारती जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डॉ. रचना भारतीय।

अनचाहे बच्चे को मारें नहीं, गोपनीय रूप से समिति को सौंप सकते हैं

जिले में लगातार नाबालिगों के साथ दुष्कर्म और फिर उनके गर्भवती होने के मामले सामने आ रहे हैं। परिजन और पीड़िता दोनों ऐसे बच्चों को अपनाना नहीं चाहते। परेशानी व समाज में बदनामी के डर से वे गर्भपात करवाना चाहते हैं कई बार 20 सप्ताह बाद गर्भपात नहीं होने की स्थिति में बच्चे को जन्म देना कानूनी मजबूरी हो जाती है। ऐसे में यदि किसी के प्रसव होता है और वे बच्चे को अपनाना नहीं चाहते तो उसे नुकसान पहुंचाने की बजाय बाल कल्याण समिति से संपर्क कर सकते हैं। समिति पीड़िता व परिवार की जानकारी गोपनीय रखेगी और बच्चा सुरक्षित हो जाएगा। पीड़िता व उसके परिवार की सामाजिक बदनामी की परेशानी से मुक्ति मिलेगी। जावरा में कुंदन वेलफेयर संस्था ने पिपलौदा रोड स्थित बालिका गृह के सामने एक पालना लगा रखा है। इसमें भी अनचाहे बच्चे को रखकर सुरक्षित हाथों में दे सकते हैं।

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