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साइट देखने आए नए एसई, बोले-ब्रिज निर्माण के लिए मुआवजे का भुगतान करवाएं, जल्दी साइट क्लियर करें

सिटी-चौपाटी रोड की रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण में अभी कई रोड़े हैं। उलझनें कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं।...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:20 PM IST
सिटी-चौपाटी रोड की रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण में अभी कई रोड़े हैं। उलझनें कम होने की बजाय बढ़ती जा रही हैं। इस कारण तमाम तैयारियों के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो रहा। बुधवार सुबह भोपाल से सेतु निगम के नए अधीक्षणयंत्री (एसई) व ईई यहां साइट देखने आए। मौका निरीक्षण के बाद उन्होंने स्थानीय सेतु अमले से कहा ब्रिज निर्माण के लिए मुआवजा भुगतान करवाएं और जल्दी साइट क्लियर करें। वे यह निर्देश देकर चले गए लेकिन मैदानी अमले की मानें तो जब तक रेलवे की ड्राइंग फाइनल नहीं होती, तब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकती है।

रेलवे ब्रिज दो हिस्सों में बनना है। रेलवे की सीमा में निर्माण कार्य रेलवे इंजीनियरों की देखरेख में रेलवे द्वारा तैयार ड्राइंग अनुसार ही होगा। इसे छोड़कर दोनों तरफ का बाकी निर्माण सेतु निगम द्वारा किया जाएगा। सेतु निगम भोपाल के नए एसई के.सी. यादव और उज्जैन ईई बी.सी. टेंटवाल बुधवार सुबह 10.30 बजे मौका देखने आए। इन्होंने सेतु निगम रतलाम एसडीओ आर.पी. गुप्ता व इंजीनियर एम.एल. श्रीवास्तव के साथ साइट देखी। प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी ली और फिर कहा कि ब्रिज निर्माण के लिए तमाम तैयारी पूरी कर लें। मुआवजा भुगतान से लेकर साइट क्लियर करने का काम कर लें ताकि रेलवे की अनुमति आते ही काम शुरू हो सके। दस मिनट ही रुकने के बाद एसई व ईई मंदसौर रवाना हो गए।

ऐसे उलझता जा रहा है ब्रिज निर्माण का काम, कई पेंच फंसे

राज्य सरकार की तरफ से ओवरब्रिज के लिए राशि आवंटित हो गई। निर्माण के टेंडर हो गए। सेतु निगम ने ड्राइंग बना ली और इसके अनुसार 9 जुलाई 2017 को सेतु निगम और राजस्व अमले ने मौके पर प्रभावित दुकान-मकान की नपती भी कर ली। इसी अनुसार मुआवजा रिपोर्ट बनना है। एसडीएम ने मुआवजा मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी को सौंपी है। पीडब्ल्यूडी काम शुरू करे, इसके पहले सेतु निगम द्वारा बनाई गई ड्राइंग में संशोधन का पेंच फंस गया। पहले सेतु निगम ने चौपाटी रोड पर दोनों तरफ के निर्माण चिह्नित किए थे लेकिन 6 जनवरी को विधायक के साथ हुई अधिकारियों की बैठक में नया प्रस्ताव आया कि चौपाटी रोड पर प्रीमियर मिल तरफ की भूमि अधिग्रहण करने पर कम नुकसान होगा और मुआवजा कम देना पड़ेगा। भूमि सरकारी घोषित हुई तो मुआवजा बच भी सकता है। इस प्रस्ताव अनुसार सर्वे करने के लिए ले-आउट बदलना पड़ेगा। सेतु निगम अधिकारियों का कहना है कि ले-आउट बदलने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का लिखित निर्देश चाहिए जो अब तक नहीं मिला। इस चक्कर में मुआवजा मूल्यांकन सर्वे रुका हुआ है। इधर रेलवे के बजट में ओवरब्रिज का प्रावधान अब तक नहीं हुआ। इसलिए रेलवे ने न तो निर्माण अनुमति जारी की और ना ही अपने हिस्से की ड्राइंग बनाई। ऐसे में सेतु निगम यहां निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकता है। दो दिन पहले ही विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय मामले में दिल्ली गए और वहां रेल मंत्री व रेल राज्यमंत्री से मिले। रेल मंत्री ने आश्वासन दिया कि इसी बजट में प्रावधान भी कर लेंगे और निर्माण अनुमति भी जारी कर देंगे। इसके बाद ही रेलवे अपने हिस्से की ड्राइंग बनाएगा। इसमें भी एक पेंच यह फंसा हुआ है कि यदि रेलवे अपने हिस्से की ड्राइंग में बड़ा फेरबदल कर देता है तो सेतु निगम की अब तक की तैयारी धरी रह जाएगी। यानी सेतु निगम ने अपने ड्राइंग व साइट प्लान, ले-आउट अनुसार जो तैयारी की है, उसका कोई मतलब नहीं रहेगा। नए सिरे से ले-आउट डालना पड़ सकता है। इसलिए अधिकारी भी जल्दी नहीं कर रहे और रेलवे की ड्राइंग का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि एसडीएम शिराली जैन का कहना है तकनीकी रूप से जो उचित होगा, वही किया जाएगा। अगले हफ्ते मौजूदा ड्राइंग अनुसार मुआवजा मूल्यांकन रिपोर्ट के लिए सर्वे करवा लिया जाएगा, ताकि प्रोजेक्ट लेट नहीं हो। भविष्य में यदि संशोधन हुआ तो उसके अनुसार काम करेंगे।

सेतु निगम अफसरों ने रेलवे फाटक क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण के लिए जगह देखी और प्रोजेक्ट की जानकारी ली।

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