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ओवरटेक में ट्राले से भिड़ा ट्रक, पीछे से बस घुसी, ट्राले में आग लगी, 2 जिंदा जले, 7 की मौत

45 मिनट देर से मिली मदद, खून से लथपथ घायल खेतों में पड़े-पड़े तड़पते रहे।

Bhaskar News | Last Modified - Jun 12, 2018, 03:44 PM IST

    • ट्राला चालक और क्लीनर कैबिन में फंसने के बाद आग लगने से जिंदा जल गए। (फोटो वीभत्स है पर तेज रफ्तार से घटना कितनी भयावह हो सकती है यह बताने के लिए इसे प्रकाशित किया जा रहा है।) इनसेट मृतक गरिमा सोडानी और पायल सकलेचा।

      - जिंदा जले युवकों के कंकाल देख मौके पर मौजूद लोगों की रूह कांप गई

      -45 मिनट देर से मिली मदद, खून से लथपथ घायल खेतों में पड़े-पड़े तड़पते रहे

      रतलाम (एमपी)।जावरा-उज्जैन टू-लेन पर हुए ट्रक-ट्राले और बस हादसे के चश्मदीद लोगों ने जो हकीकत बयां की, उसे सुनकर रोंगटे खड़े हो गए। सोमवार सुबह करीब पौने दस बजे सरपट दौड़ते वाहनों के बीच जोरदार धमाके के साथ भिड़ंत हुई। बस की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि यदि सीधे ट्राले से टकराती तो सारे लोग मारे जाते। ड्राइवर उसे कंट्रोल तो नहीं कर पाया लेकिन रोड किनारे उतारने से ज्यादातर यात्री बच गए। हालांकि खुद बस ड्राइवर और 4 अन्य सवारियों की मौत हो गई। प्रशासनिक मदद 45 मिनट देर से मिली, इस बीच ट्राले के कैबिन में फंसे ड्राइवर व क्लीनर वहां मौजूद लोगों की आंखों के सामने जिंदा जल गए। दमकल ने आते ही ट्रक के डीजल टैंक में पानी भर दिया ताकि उसमें ब्लास्ट ना हो, क्योंकि मौके पर भीड़ जुटी और यदि ब्लास्ट होता तो बड़े नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता।

      जिंदा जले युवकों के कंकाल देख कांप उठी रूह

      - ट्राला ड्राइवर थावर गुर्जर सेदरिया और क्लीनर शैतान गुर्जर भूपकिया क्लीनर कैबिन में फंसने के बाद आग लगने से जिंदा जल गए।

      - इनके कंकाल देख मौके पर मौजूद लोगों की रूह कांप गई। पुलिसकर्मियों ने कंकालों को प्लास्टिक में लपेटकर खाचरौद भेजा।

      - जहां प्रथम दृष्टि में पहचान मुश्किल हो गई कि कौन-सा कंकाल किसका। टीआई वर्मा ने बताया परिजन के आने के बाद पहचान करवाई।

      - मृत बस सवार पायल सकलेचा की छोटी बहन सलोनी इंदौर में मौसी के यहां रहकर बीएससी की पढ़ाई कर रही है। उसे लेने इंदौर गई थी।

      - वहीं, मृत गरिमा सोडानी इंदौर स्थित मायके से वापस ससुराल बड़ावदा आ रही थी।

      - यात्री पंकज चौधरी ने बताया, इंदौर से बस में सवार हुआ तो मुझे आगे वाली सीट मिली लेकिन मैं वहां नहीं बैठा। उठकर पीछे गया, जहां पायल बैठी थी। हमने सीट एक्सचेंज की।

      - मंदसौर में ही लुपिन फॉर्मा कंपनी में काम करने वाले मधुसूदन पाटीदार ने कहा- मैं मोबाइल से बात कर रहा था। बस की रफ्तार तेज थी। झटके से सीट से नीचे गिर गया। उठकर देखा तो हर तरफ चीख-पुकार मची थी। गरिमा को गंभीर हालत में इंदौर रैफर कर दिया। जब कंकाल निकाला गया तो वो मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप गई।

      - रेडक्रास चेअरमैन महेंद्र गादिया ने बताया- आधे घंटे तक एम्बुलेंस नहीं पहुंची। रेडक्रास की एम्बुलेंस से घायल को इंदौर पहुंचाया परंतु घायल की जान नहीं बचाई जा सकी।


      महिला ने की देखभाल
      - हादसे में जान गंवाने वाले केशव राव की पत्नी वैशाली (42) बेटी निधि (15), मुग्धा (3) भी घायल हो गए। ये सभी उज्जैन से घर लौट रहे थे। यहां सरकारी अस्पताल में सभी अलग-थलग हो गए।

      - मुग्धा को घंटेभर तक परिजन नहीं मिले। लावारिस रो रही थी। तभी पास बैठी एक अन्य महिला ने उसे उठाकर पलंग पर लेटाया। दुलारा और देखभाल की।


      लोग बोले- डॉक्टरों का इंतजाम करो बस
      - केंद्रीय मंत्री थावरचंद गेहलोत, सांसद सुधीर गुप्ता, उज्जैन सांसद डॉ. चिंतामणि मालवीय, विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय, आलोट विधायक जितेंद्र गेहलोत सिविल अस्पताल पहुंचे।

      - ये सभी नगर में एक कार्यक्रम में आए थे और सूचना पर अस्पताल गए। इन्होंने चंद मरीजों को देखा। जानकारी ली और जरूरी मदद दिलाने की बात कही। फिर चले गए। मौजूद भीड़ में से लोग कहने लगे अस्पताल में पर्याप्त डॉक्टर नहीं है। आप मदद की बजाय डॉक्टरों का अरेजमेंट करवाइए।

      - गेहलोत ने कहा- मुझे अस्पताल के हालात मालूम हैं। डॉक्टरों के लिए प्रयास करेंगे। कलेक्टर रुचिका चौहान अस्पताल पहुंची। बोलीं कि डॉक्टरों की प्रदेशभर में कमी है। फिर भी ह्यूमन रिसोर्स डेवलप कर समस्या हल करवाएंगे।

      यात्रियों ने बस की रफ्तार ज्यादा होने की बात कही
      - हादसे के वक्त उज्जैन महाकाल के दर्शन कर लौट रहे भाजयुमो नेता राहुल उपमन्यु (जावरा) ने बताया- दुर्घटनाग्रस्त बस के पीछे 200 मीटर दूरी पर था।

      - पहले ट्रक-ट्रॉला टकराया और बस जाकर उनसे भिड़ गई। बस की रफ्तार ज्यादा थी और ड्राइवर उसे कंट्रोल नहीं कर पाया, बस को रोड से नीचे उतारने के अलावा चारा नहीं था।

      इसीलिए उसने बस को टर्न दिया लेकिन फिर भी वह ट्रक से टकरा गई। उपमन्यू ने फेसबुक पर भी पोस्ट डाली कि प्रशासनिक सिस्टम लचर है। दोनों जिलों के पुलिस अफसरों को फोन लगाने के बावजूद 45 मिनट तक मदद नहीं मिली। हमारी आंखों के सामने दो लोग ट्रॉले के कैबिन में जिंदा जल गए। कुछ ग्रामीणों व दोस्तों के साथ मिलकर हमने घायलाें को बस से निकाला।

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      मरने वाले 7 लोगों में से 2 मंदसौर के, 2 अजमेर के, 2 बड़ावदा और 1 नागदा का
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      जिंदा जले युवकों के कंकाल देख कांप उठी रूह।
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      मृतक गरिमा सोडानी।
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      मृतक पायल सकलेचा।
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