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पुलिया नहीं बनी, 88 करोड़ खर्च के बावजूद बारिश में जावरा-सीतामऊ मार्ग होगा बंद

लगभग 88 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद जावरा से सीतामऊ तक 56 किमी लंबा सीमेंट-कांक्रीट टू-लेन बन गया है। दिसंबर 2015 में काम...

Danik Bhaskar | May 01, 2018, 03:05 AM IST
लगभग 88 करोड़ रुपए खर्च करने के बाद जावरा से सीतामऊ तक 56 किमी लंबा सीमेंट-कांक्रीट टू-लेन बन गया है। दिसंबर 2015 में काम शुरू हुआ और जनवरी 2018 में पूरा हो गया। रोड तो बन गया लेकिन तीन बड़े बरसाती नालों पर पुलियाएं नहीं बनने से बारिश में यह अनुपयोगी हो जाएगा। नाले उफान पर आने से रास्ता रुकेगा और सामान्य दिनों में कीचड़ में वाहन फंसेंगे। करोड़ों की लागत वाला यह सरकारी प्रोजेक्ट बिना प्लानिंग और बगैर दूरदृष्टिभरे निर्णय का उदाहरण है। ढाई साल तक किसी ने पुलिया निर्माण पर ध्यान नहीं दिया। तब बजट स्वीकृत नहीं हुआ। अब लोन आधारित बजट स्वीकृत है और हाल ही में टेंडर जारी कर दिए लेकिन बारिश पहले पुलिया बनना तो दूर काम भी शुरू नहीं होगा।

जिले का सबसे पहला टू-लेन सीसी रोड प्रोजेक्ट था लेकिन पुलियाओं के अभाव में आज भी अधूरा है। इसके बाद सीमेंट-कांक्रीट टू-लेन के कई प्रोजेक्ट जिले में आए और कुछ पूरे हो गए। जावरा-सीतामऊ प्रोजेक्ट सबसे पहला होने के बावजूद इसे लेकर शासन, प्रशासन ने गंभीरता नहीं बरती। पीडब्ल्यूडी के प्रस्ताव पर सरकार ने तीन साल पहले सीसी रोड निर्माण व छोटी पुलियाओं के लिए तो 88 करोड़ स्वीकृत कर दिए, लेकिन महज 10-12 करोड़ रुपए के तीन ब्रिज स्वीकृत नहीं हो सके। यही कारण है कि रोड बनने के बावजूद इस रूट पर चलने वाले वाहन चालकों की परेशानी कम नहीं हुई है। खासकर बारिश में ज्यादा परेशानी होगी।

ये तीन पुलियाएं जो नहीं बनी, यहां बारिश में रुकेगा रास्ता

ग्राम भड़का के पास बरसाती नाले पर ब्रिज नहीं बनने से बारिश में आवागमन रुकेगा।

अब तक निर्माण शुरू नहीं हुआ, अगले साल मिलेगी राहत

जावरा-सीतामऊ रोड व इसकी छोटी-छोटी पुलियाएं पीडब्ल्यूडी ने बनाई है। इस विभाग ने तीन साल पहले जब एस्टीमेट भेजा तब इन तीन बड़ी पुलियाओं की लागत का एस्टीमेट नहीं बनाया। कारण बताया गया कि बड़ी पुलियाओं की निर्माण एजेंसी सेतु निगम रहता है। इसलिए सेतु निगम ही इनका एस्टीमेट बनाएगा। इस चक्कर में रोड व छुटपुट पुलियाओं के लिए 88 करोड़ स्वीकृत हो गए और इनका निर्माण भी पूरा हो गया लेकिन तीन पुलियाओं का एस्टीमेट समय पर नहीं बनने से राशि स्वीकृत नहीं हुई। रोड निर्माण शुरू होने के सालभर बाद सेतु निगम को इसकी जानकारी मिली और उन्होंने एस्टीमेट बनाकर भोपाल भेजा। पहले तो किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। फिर 20 मार्च को विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने विस में मुद्दा उठाया तो सरकार ने जवाब दिया कि लोन आधारित बजट योजना में इसे सम्मिलित किया है। तीनों पुलियाओं की लागत 10 करोड़ से अधिक है। जल्द निर्माण शुरू करवाएंगे। अब सेतु निगम को इसकी स्वीकृति मिली और विभाग ने इसी हफ्ते टेंडर कर दिए लेकिन टेंडर खुलने और अनुबंध होने की प्रक्रिया में ही एक-डेढ़ महीना हो जाएगा। इसके बाद बारिश शुरू होने से पुलियाओं का निर्माण नहीं हो सकेगा। यानी अब अगले साल ही इसका लाभ मिल पाएगा।

ग्राम असावती के पास व भड़का से थोड़ी दूर तथा रोला में रूपनिया खाल की पुलियाएं अधूरी हैं। यहां की मौजूदा पुरानी पुलियाएं रपटनुमा है। ये काफी नीचे होने से बारिश में नाले का पानी ऊपर होकर बहता है। इसलिए हर साल रास्ता रुक जाता है। इस बार रोड नया बनने से परिवहन आसान हो गया लेकिन इन तीन पुलियाओं वाली जगह दिक्कत होगी। पुरानी पुलियाओं से पानी उतरने तक इंतजार करना पड़ेगा।

बड़े ब्रिज सेतु निगम बनाता है


कम से कम 6 माह लग जाएंगे