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मंदिर भूमि पर पुजारी का नाम दर्ज करें, मानदेय 7500 रु. करें

मंदिरों में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों की आजीविका का एकमात्र साधन मंदिर की भूमि है। इस पर पुजारियों की जगह...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 03:35 AM IST
मंदिरों में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों की आजीविका का एकमात्र साधन मंदिर की भूमि है। इस पर पुजारियों की जगह कलेक्टर का नाम दर्ज होने को लेकर उनमें रोष है। आक्रोशित पुजारी संघ के नेतृत्व में जावरा-पिपलौदा ब्लॉक के पुजारी सोमवार को गीताभवन पर एकत्र हुए। यहां से एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां एसडीएम वीरसिंह चौहान को देकर मंदिर भूमि का स्वामी पुजारी को बनाए जाने की मांग की।

ज्ञापन का वाचन करते हुए अभा संत समाज एवं देवस्थान पुजारी संघ अध्यक्ष किशनदास बैरागी ने बताया जावरा-पिपलौदा ब्लॉक में 300 मंदिर आते हैं। इनकी पूजा-अर्चना व देखरेख पुजारी करते हैं। पुजारियों को पिछले पांच सालों से एक हजार रुपए ही मानदेय दिया जा रहा है, जो कम है। उनका मानदेय 7500 रुपए किया जाए। इधर सरकारी मंदिरों की कृषि भूमि के कॉलम तीन में भूमि स्वामी के आगे कलेक्टर का नाम लिखने से पुजारी संघ नाराज है। इसका सभी पुजारियों द्वारा विरोध किया जा रहा है।

भूमि पर कलेक्टर का नाम दर्ज होने को लेकर रोष, अभा संत समाज एवं देवस्थान पुजारी संघ ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर बताई समस्या

मंदिर की कृषि भूमि से पुजारी व उनके परिवार का पोषण होता हैं

मंदिर भूमि के खाता खसरा के 3 नंबर कॉलम में कलेक्टर का नाम लिखा गया। पुजारियों ने बताया मंदिर की कृषि भूमि से पुजारी व उनके परिवार का भरण-पोषण होता है। कलेक्टर का नाम विलोपित कर पुजारी का नाम लिखा जाए। ज्ञापन के दौरान मधुसूदन दास , किशनदास बैरागी, सुरेश शर्मा, नेपालदास बैरागी, दिनेशकुमार, रामचंद्र पांचाल, विजय ठाकुर, प्रेमदास, मोहनलाल, सुरेशचंद्र गुर्जर, ओमप्रकाश बैरागी, बंकटदास आदि पुजारी मौजूद थे।

इन मांगों के लिए भी आवाज उठाई

एसडीएम वीरसिंह चौहान को ज्ञापन सौंपते मंदिर के पुजारी।

उज्जैन में पुजारी हित में जो घोषणाएं सीएम ने की थीं, उन पर अमल करने, मंदिर कृषि भूमि की नीलामी स्थायी रूप से बंद करने, पुजारियों को 1 हजार के बजाए 7500 रुपए मानदेय दिए जाने, भूमाफियाओं द्वारा मंदिर की भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाने और हाईकोर्ट द्वारा पुजारियों के पक्ष में किए गए फैसले का पालन कराए जाने की मांग की।