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14 साल पहले परिषद में शामिल हुए तीन वार्ड मूलभूत सुविधाओं से महरूम 12000 लोग

वार्ड 18 में इस तरह हो रहा जल भराव। वार्ड 16: यहां नहीं होती साफ-सफाई यह वार्ड दलित बस्ती के नाम से जाना जाता है।...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:52 AM IST
वार्ड 18 में इस तरह हो रहा जल भराव।

वार्ड 16: यहां नहीं होती साफ-सफाई

यह वार्ड दलित बस्ती के नाम से जाना जाता है। 4800 की आबादी समेटे इस वार्ड के लोग पानी की आपूर्ति हैंडपंप व निजी बोर से करते हैं। नलों के कनेक्शन यहां नहीं है। वार्ड के अधिकांश हिस्से में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं लगाई गई है। नगर परिषद के इस वार्ड में प्रवेश करते ही बदहाल स्थिति सामने आ जाती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक नगर परिषद के कर्मचारियों द्वारा इस वार्ड में नियमित साफ-सफाई भी नहीं की जा रही।

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वार्ड 17: बस्ती में जलभराव ड्रेनेज सिस्टम ठीक नहीं

यह वार्ड अयोध्या बस्ती के नाम से पहचाना जाता है। 4500 की आबादी यहां निवास करती हैं। जलभराव के कारण इस वार्ड में तालाब जैसे हालात नजर आते हैं। ड्रेनेज सिस्टम ठीक न होने के कारण पानी अक्सर बस्तियों में ही भरा रहता है। पेयजल के लिए पाइप लाइन नहीं बिछी नहीं होने के कारण लोग हैंडपंप व निजी बोर मालिकों का सहयोग लेकर पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। इस वार्ड में लगे ज्यादातर हैंडपंपों का पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है। नगर परिषद बीते 14 सालों में यहां पेयजल व्यवस्था को दुरूस्त नहीं कर पाई। नगर का यह हिस्सा किसी पिछड़े गांव की कहानी कहता है।


वार्ड 18: पीने के पानी को मोहताज हैं लोग

पिछड़ी बस्ती के नाम से पहचाने जाने वाले इस वार्ड में तीन हजार की आबादी का निवासरत है। नगर का यह हिस्सा पेयजल के लिए मोहताज नजर आता है। लोग हैंडपंपों के आगे लाइन लगाकर या निजी बोर से पीने का पानी ला रहे हैं। हालांकि इस वार्ड में आवागमन सुगम करने सीसी रोड के साथ प्रकाश व्यवस्था के लिए स्ट्रीट लाइट लगाई गई है। लेकिन साफ-सफाई के नाम पर शून्य है। इस वार्ड में जलभराव की समस्या भी लंबे समय से विकराल बनी हुई है।

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