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हर तीसरे दिन पाइप लाइन होता है लीकेज, बोरिंग भी आधे घंटे से ज्यादा नहीं चलता

गर्मी की शुरुआत में ही जिला अस्पताल प्यासा हो चुका है। जलस्तर गिरने से पानी सप्लाय करने वाला बोरिंग जवाब दे चुका...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:50 AM IST
गर्मी की शुरुआत में ही जिला अस्पताल प्यासा हो चुका है। जलस्तर गिरने से पानी सप्लाय करने वाला बोरिंग जवाब दे चुका है तो जेल बगीचे से अस्पताल तक पानी लाने के लिए डाली गई पाइप लाइन में हर दूसरे-तीसरे दिन टूट-फूट हो रही है। जिससे दिक्कतें दोहरी हो चुकी है। इस स्थिति में मरीजों को बाहर से पानी का प्रबंध करना पड़ रहा है। हालांकि आरएमओ दावा कर रहे हैं कि दो दिन में समस्या का निराकरण हो जाएगा।

आईएसओ सर्टिफिकेट प्राप्त जिला अस्पताल पानी की कमी से जूझ रहा है। पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से अभी से मुश्किल और बढ़ गई है। मरीजों को बाहर से पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन भी इस बात को स्वीकार कर रहा है। परंतु समस्या के स्थायी समाधान के लिए उनके पास कोई उपाय नहीं है। अस्पताल में मेल मेडिकल, फिमेल मेडिकल, सर्जिकल, शिशु वार्ड प्रसूति वार्ड सहित कुल 13 वार्ड है। इनमें मरीजों की भर्ती संख्या औसतन 300 रहती है। इतने ही अटेंडर भी होते हैं। जिन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए पानी की आवश्यकता पड़ती है। अस्पताल में इंतजाम नहीं होने से मजबूरी में मरीज के साथ मौजूद अटेंडर को बाहर से पानी लाना पड़ता है। जेल बगीचे से अस्पताल तक पाइप लाइन जरूर बिछी हुई है लेकिन हर दूसरे-तीसरे दिन उसकी मरम्मत करानी पड़ती है। सीएमओ को शिकायत की तो उन्होंने कह दिया कि पाइप लाइन बिछाने तक हमारा काम था, मेंटनेंस का जिम्मा आपका है। जिसके चलते समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा।


जिला अस्पताल में मरीजों के परिजन को इस तरह परिसर के बाहर से पानी लाना पड़ता है।

रोज 58 हजार लीटर पानी की जरूरत

एक मरीज को दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए औसतन 70 लीटर पानी की जरूरत होती है। 300 मरीज के हिसाब से यह आंकड़ा 21 हजार लीटर होता है। इसमें 250 अटेंडर को शामिल किया जाए तो उनके लिए 17 हजार 500 लीटर पानी अतिरिक्त चाहिए। इसके अलावा साफ-सफाई व अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं के लिए लगभग 2० हजार लीटर पानी चाहिए। यानि प्रतिदिन 58 हजार 500 लीटर पानी की दरकार है।

वाटर कूलर हो गए गायब

जिला अस्पताल में लगे वाटर कूलर गायब हो गए हैं। केवल उनके साइन बोर्ड ही लगे रह गए। जिससे स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। मजबूरी में वार्ड में भर्ती मरीजों को बोतल में बाहर से पानी लाना पड़ रहा है।

प्रसूति वार्ड में सबसे ज्यादा परेशानी

जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में सबसे ज्यादा पानी की परेशानी है। प्रसूति वार्ड में हर समय 45 से 50 महिलाएं भर्ती रहती है। इस हिसाब से पानी की जरूरत पड़ती है। पानी की कमी से साफ-सफाई व्यवस्था भी प्रभवित होती है।