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इत्र लगाकर गल देवता की पूजा की, दहकते अंगारों पर चलकर मन्नत उतारी

करड़ावद. अंगारों पर चलती महिला। भास्कर टीम | झाबुआ झाबुआ जिले में गल और चूल का त्योहार पारंपरिक उत्साह के साथ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 02:50 AM IST

इत्र लगाकर गल देवता की पूजा की, दहकते अंगारों पर चलकर मन्नत उतारी
करड़ावद. अंगारों पर चलती महिला।

भास्कर टीम | झाबुआ

झाबुआ जिले में गल और चूल का त्योहार पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। ग्रामीणों ने अंगाारों पर चलकर मन्नत उतारी वहीं गल पर घूमकर जयकारे भी लगाए।

रायपुरिया में धुलेंडी पर्व पर नगर में होली खेलने के बाद युवाओं ने गेर निकाली। इसके बाद बरसों से निभाई जा रही गल चूल की परंपरा निभाई। गेर में गायक शशांक तिवारी भजन और गीतों की प्रस्तुति दे रहे थे। मेला ग्राउंड पर हुए इस आयोजन में सैकडों ग्रामीणों ने भाग लिया। ग्रामीणों ने अपने परिवार की सुख शांति के लिए ली गई मन्नतें पूरी की। मन्नतधारी शरीर पर हल्दी व इत्र लगाकर पहुंचे और गल देवता की पूजा की। इसके बाद दहकते अंगारों पर चलकर मन्नत पूरी की। कई महिला और पुरुष बच्चों को गोद में उठाकर चूल पर चले। गल-चुल खत्म होने के बाद बाजार खुला और लोगों ने खरीदारी की।

राणापुर में आदिवासियों का परंपरागत मन्नत उतारने का पर्व गल आसपास के क्षेत्र में भी उत्साह के साथ मनाया। ग्राम धामनीनाना, वगई, भूरीमाटी, पाडलवा, दौतड़, मोरडूंडिया, काकरादरा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकत्रित होकर पर्व मनाया। मन्नतधारी को उसके परिजन गीत गाते हुए पूजा स्थल तक लेकर आ रहे थे। यहां पर तड़वी ने पूजा कर मन्नतधारी को गल पर घूमाया। वहीं शुक्रवार को ग्राम बन में लगे गल मेले को देखने भारी तादाद में ग्रामीण जुटे। वहीं नगर के होली चकला में चूल मेला भराया। मन्नतधारी दहकते अंगारों के ऊपर नंगे पैर गुजरे। मेला करीब पांच घंटे चला।

खरडूृबड़ी में भी मन्नतधारियों ने गल घूमकर अपनी मन्नत पूरी की। यहां शाम 4 बजे गल कार्यक्रम शुरू हुआ जो शाम छह बजे तक चलता रहा। मन्नतधारी जब गल पर घूम रहा था तब उसके परिवारजन ढोल मांदल की थाप पर नृत्य कर रहे थे। एक के बाद एक कई ग्रामीणों ने गल घूमा।

करड़ावद के समीपस्थ ग्राम टेमरिया में भी चूल पर्व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। यहां ईश्वरलाल आंजना (मांडली), कृष्णकांत शर्मा (मांडली), गिरधारी आंजना, दीपक बैरागी, रामेश्वर बैरागी, हरिओम आंजना, गंगा आंजना, भावना बैरागी, रतनलाल मेड़ा, सुमित मेड़ा, कालू गरवाल, गोपाल मेड़ा, हीरालाल मालवीय, रणजीत माल, लूणा माल, सोहन चरपोटा, पिंटू माल, सुरेंद्र आंजना, काना गरवाल, देवीलाल आंजना सभी निवासी टेमरिया, प्रहलाद आंजना (देहंडी), मांगीलाल मोरी (भाटखेड़ी) व सोनू मालवीय (रामगढ़) ने चूल पर चलकर अपनी मन्नत उतारी। धुलेंडी पर यहां चूल मेला भराया। दोपहर 4 बजे से शिव मंदिर प्रांगण में मेले में भक्तो का आना शुरू हो गया। शाम साढ़े 5 बजे यहां चूल जलाई गई। लगभग एक घंटे तक मन्नतधारी एक के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पैर गुजरे। इस दौरान करीब 200 से अधिक श्रद्धालुओं ने मन्नत पूरी की। जिसमें से 49 महिलाएं थी। इस पर्व को देखने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंचे। पूरे क्षेत्र में यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहां हजारो की तादाद में चूल देखने के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ता है।

करवड़ में धुलेंडी पर यहां चूल मेला भराया। दोपहर 3.30 बजे से शिव मंदिर प्रांगण में मेले में भक्तों का आना शुरू हो गया। शाम पांच बजे यहां चूल जलाई गई। लगभग एक घंटे तक मन्नतधारी एक के बाद धधकते अंगारों पर नंगे पर गुजरे। इस दौरान लगभग दो सौ से अधिक लोगों ने मन्नत पूरी की। इस पर्व को देखने के लिए हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंचे। आयोजन में गोबाजी, रणछोड़लाल राठौर, संतोष भालोड़, राजेंद्र गेहलोत, लक्ष्मीनारायण केरावत, कन्हैयालाल खारीवाल, नरेंद्र खारीवाल, विक्रम पंवार, नाथु पंवार, प्रीतम पंवार, पं. कैलाश वैरागी का सहयोग रहा। पिपली चौक में चूल देखने के लिए एक बड़ी एलईडी लगाई गई थी। ग्रापं की ओर से जल व्यवस्था की गई थी।

घुघरी के समीपस्थ ग्राम मोर में चुल पर 50 लोगों ने चलकर मन्नत पूरी यहां। 9 फिट लंबी चुल तैयार की गई थी। जिसमें आठ क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल किया गया। जबकि करीब 15 किलो घी का उपयोग हुआ। चुल में बच्चे, महिला व पुरुष भी चले।

रायपुरिया. गल देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे और जयकारे लगाए।

राणापुर. चूल पर चलकर मन्नत उतारी गई।

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