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आपके छोटे से प्रयास से आज बच सकता है लाखों लीटर पीने का पानी

धुलेंडी के एक दिन पहले बाजार में खरीदारी करने लाेगों की भीड़ उमड़ी। अभी शहर को 3 दिन में मिल रहा है पानी भास्कर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:40 AM IST

आपके छोटे से प्रयास से आज बच सकता है लाखों लीटर पीने का पानी
धुलेंडी के एक दिन पहले बाजार में खरीदारी करने लाेगों की भीड़ उमड़ी।

अभी शहर को 3 दिन में मिल रहा है पानी

भास्कर संवाददाता | झाबुआ

गिरता भू-जलस्तर और सूखते जल भंडार...। परिस्थितियां लगातार बिगड़ रही है। ऐसे में पानी बचाने के लिए सामूहिक संकल्प की दरकार है। इसके लिए रंगों के त्योहार पर अबीर-गुलाल के साथ होली खेलकर हम अपने इस सामाजिक दायित्व का निर्वहन कर लाखों लीटर पानी बचा सकते हैं।

गर्मी की शुुरुआत हो चुकी है। इसी के साथ एक बार फिर शहर को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल धमोई तालाब से पानी की आपूर्ति की जा रही है। ऐसे में पानी बचाना सबका दायित्व बन गया है। विशेषकर रंगों के त्योहार पर। यदि अबीर-गुलाल के साथ होली खेलने की एक छोटी सी कोशिश कर ली तो इस रंगपर्व पर हम करीब 39 लाख लीटर पानी बचा लेंगे।

शहर में प्रतिदिन 10 लाख लीटर पानी सप्लाय किया जाता है, जबकि आवश्यकता 30 लाख लीटर की है। पीएचई फिलहाल तीन दिन में पेयजल सप्लाय कर रही है। जलस्तर गिर रहा है। गर्मी बढ़ते ही ट्यूबवेल तेजी से सूखने लगेंगे। ऐसे में होली पर पानी का दुरुपयोग करना नासमझी होगा। यदि इस बार सूखे रंगों से होली खेलकर हमने पानी बचा लिया तो जलसंकट से कुछ हद तक राहत मिल सकती है।

यूं समझिए गणित

शहर की आबादी 40 हजार है। यदि इनमें से आधे लोग यानी 20 हजार भी होली खेलते हैं तो प्रति व्यक्ति औसतन तीन बाल्टी (एक बाल्टी में 15 लीटर पानी) खर्च होगा। यानी रंग लगाने में ही 9लाख लीटर पानी की बर्बादी हो जाएगी। इसके बाद रंग छुड़ाने में करीब 10 बाल्टी पानी का उपयोग होता है तो लोग करीब 30 लाख लीटर पानी की बर्बादी करेंगे। यानी आधी आबादी की होली पर कुल 39 लाख लीटर पानी फिजूलखर्च हो जाएगा।

प्रति व्यक्ति 70 लीटर पानी रोजाना चाहिए

रोजमर्रा की जरूरत के लिए प्रतिव्यक्ति रोजाना औसतन 70 लीटर पानी चाहिए।

40 हजार की आबादी के लिहाज से यह आंकड़ा 28 लाख लीटर होता है।

39 लाख लीटर पानी बचाकर पूरे शहर को सवा दिन पानी पिला सकते हैं। छोटे से प्रयास से काफी पानी बचाया जा सकता है। बस शुरुआत करने की देर है।

‘इस बार होली पर नहीं करें पानी की बर्बादी’

हर साल होली पर पानी की खासी बर्बादी होती है। मैं लोगों से यही कहूंगा कि वे सूखे रंगों से होली खेलकर जल का अपव्यय होने से बचाएं। जितेंद्र मावी, ईई, पीएचई, झाबुआ

...और इधर त्योहार की खरीदी से दमका बाजार

होली के त्योहार पर जोरदार खरीदी से बाजार दमक उठा। गुरुवार को आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 20 हजार ग्रामीण खरीदारी के लिए शहर आए। मिठाई के रूप में माजम-गुजरी और नारियल की खासी बिक्री हुई। सुबह से बाजार में रौनक बनी रही, दिन चढ़ने के साथ ग्रामीणों की आमद बढ़ती गई जिससे व्यापारियों के चेहरे खिल उठे। राजबाड़ा चौक से लेकर बस स्टैंड तक बाजार ग्रामीणों से खचाखच भरा रहा। सभी दुकानों पर ग्राहक नजर आए। किसी ने गुलाल खरीदा तो किसी ने मिठाई। होली के लिए ग्रामीणों ने पूजन सामग्री की भी जमकर खरीदी की। ग्रामीणों पर महंगाई का असर भी देखने को नहीं मिला। सभी ने दिल खोलकर खरीदारी की।

करीब 50 क्विंटल मिठाई बिकी-शकर से बनी मिठाई माजम-गुजरी की अच्छी बिक्री की आस में शहरभर में करीब 100 से अधिक दुकानें लगी। दिनभर में लगभग 50 क्विंटल मिठाई की खरीदी हुई। व्यापारी रिंकू रुनवाल ने बताया उन्होंने शाम तक करीब 4 क्विंटल मिठाई बेची।

नारियल के बाजार में उठाव -होली पर नारियल का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इसके चलते ग्रामीणों ने जमकर खरीदी की। जिससे नारियल के बाजार में उछाल आ गया। अमूमन 10-12 रुपए प्रति नग के मान से बिकने वाले नारियल की कीमत 15 रुपए रही। इसके बावजूद खरीदी पर कोई असर नहीं पड़ा। बाजारों में होली की खरीदी जमकर हुई।

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Web Title: आपके छोटे से प्रयास से आज बच सकता है लाखों लीटर पीने का पानी
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