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सौ साल बाद गजकेसरी, सर्वार्थ सिद्धि का संयोग

होली पर इस बार कुछ विशेष संयोग बन रहा है। पंडित हिमांशु शुक्ल के अनुसार होली पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ गजकेसरी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 04:55 AM IST

होली पर इस बार कुछ विशेष संयोग बन रहा है। पंडित हिमांशु शुक्ल के अनुसार होली पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ गजकेसरी योग का महासंयोग बन रहा है। यह संयोग कई राशि के जातकों के लिए खास रहेगा। शुक्ल के अनुसार महीने के सभी दिनों में विभिन्न राशियां अपना गृह परिवर्तन करती हैं। इस कारण ही 2 मार्च को इस बार होली में बेहद खास महासंयोग बन रहा है। यह संयोग करीब सौ वर्षों बाद आया है, जिसमें सुख-समृद्धि के लिए भगवान विष्णु की आराधना को श्रेयस्कर माना जा रहा है। मंदिरों में इस दिन भिखारियों को खीर-पूड़ी खिलाने से उन्नति के द्वार खुलेंगे। गुरुवार शाम शहर में 10 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन होगा।

विशेष संयोग से लोगों को लाभ प्राप्त होगा, शाम 7.40 बजे होगा दहन

आपस में मेलजोल और सामाजिक सौहार्द कायम होंगे

फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा के दिन संध्याकाल में भद्रा रोष रहित समय में होलिका दहन किया जाता है। होली जलाने से पूर्व उसकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। अग्नि एवं भगवान विष्णु के निमित्त आहुतियां दी जाती हैं। 1 मार्च की सुबह 8.58 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी इसके बाद शाम 7.39 बजे तक भद्रा रहेगा। इसलिए 7.40 बजे से भद्रा समाप्त होने पर होलिका दहन होगा। 2 मार्च की सुबह होली खेली जाएगी। पूर्णिमा तिथि के बीच वृहस्पतिवार को होलिका दहन हो रहा है। जिससे सिद्धि योग बन रहा है। इसका प्रभाव देश, राज्य एवं सभी के लिए बहुत ही शुभप्रद व कल्याणकारी होगा। आपस में मेलजोल और सामाजिक सौहार्द कायम होंगे।

भगवान शिव करेंगे मनोकामना पूर्ण

पं. शुक्ल के अनुसार इस बार होली के हुड़दंग को छोड़कर कुछ समय भगवान शिव की पूजा में अर्पित करें। भोलेनाथ को भांग, गुड, बेलपत्र और दूध चढ़ाएं। सौ वर्ष बाद यह मुहूर्त आया है जिसका लाभ उठाएं। 2 मार्च को सुबह 7 बजे से 9.30 बजे के बीच जलाभिषेक करें और इसके बाद तत्काल अबीर, रोली के साथ पकवान भी चढ़ाएं ताकि अशांत गृह शांत हो जाएं और महादेव की कृपा से रुका हुआ कार्य पूर्ण हो।

10 से अधिक स्थानों पर होगा होलिका दहन

शहर में गुरुवार शाम 10 से अधिक स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा। लक्ष्मीनगर में पर्यावरण सहेजने के लिए पुरानी परंपराओं के अनुरूप होलिका दहन किया जाएगा। पर्यावरण सहेजने के लिए गोबर के कंडे, सुपारी और नारियल से हाेलिका दहन करेंगे। इसके लिए महिलाओं द्वारा कंडे, सुपारी और नारियल तैयार किए जा रहे हैं। चारभुजानाथ मंदिर के सामने भी होलिका दहन में कंडों का ज्यादा इस्तेमाल किया जाएगा।

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Web Title: सौ साल बाद गजकेसरी, सर्वार्थ सिद्धि का संयोग
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