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विस्फोटक भरी गाड़ी चौकी पर आती है, जांचती नहीं पुलिस ब्लास्ट वाले स्थान पर भी जांच करने नहीं पहुंचते अफसर

पेटलावद ब्लास्ट की बुधवार को तीसरी बरसी है। जिलेटिन-डेटोनेटर के अवैध भंडारण से हुए ब्लास्ट में 73 लोगों के चिथड़े उड़...

Dainik Bhaskar

Sep 12, 2018, 03:55 AM IST
Jhabua - विस्फोटक भरी गाड़ी चौकी पर आती है, जांचती नहीं पुलिस ब्लास्ट वाले स्थान पर भी जांच करने नहीं पहुंचते अफसर
पेटलावद ब्लास्ट की बुधवार को तीसरी बरसी है। जिलेटिन-डेटोनेटर के अवैध भंडारण से हुए ब्लास्ट में 73 लोगों के चिथड़े उड़ जाने का वह दृश्य आज भी लोग भूले नहीं है। शायद प्रशासन ने भुला दिया है। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्लास्ट के बाद विस्फोटक सामग्री रखने और उसकी निगरानी के कई नियम सख्त तो किए गए लेकिन स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने तीन साल बाद भी आज तक ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई है जो यह पता चल सके कि जिलेटिन-डेटोनेटर का वैसा अवैध भंडारण दाेबारा तो नहीं हो रहा है।

भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि गोदाम से जब-जब वाहन में जिलेटिन-डेटोनेटर निकलता है, थाने या चौकी पर लिखित सूचना दी जाती है कि उसमें रखी जिलेटिन-डेटोनेटर से कहां (सर्वे नंबर) ब्लास्टिंग की जाएगी। लेकिन ब्लास्टिंग वहीं पर हुआ है या नहीं, इसका पता पुलिस और प्रशासन को नहीं होता है। पुलिस-प्रशासन यह जानने की कोशिश नहीं कर रहा कि गोदाम से निकला जिलेटिन-डेटोनेटर बताई गई साइट पर ब्लास्ट कर दिया गया या ब्लास्टिंग न करते हुए वह जिलेटिन-डेटोनेटर कहीं और अवैध रूप से रखा जा रहा है। सख्ती के नाम पर हर छह महीने में जिलेटिन-डेटोनेटर के गाेदाम का निरीक्षण एसडीएम-एसडीओपी करते हैं। सवाल यह उठता है केवल गोदाम के स्टॉक का मिलान करने और वहां सुरक्षा की स्थिति देखने से अवैध भंडारण कैसे रुक सकता। यह तभी होगा, जब बताई गई साइट का औचक निरीक्षण कर पता किया जाए कि गोदाम से निकले जिलेटिन-डेटोनेटर इस्तेमाल हुए हैं या बचा लिए गए हैं।

विस्फोटक परिवहन के ये हैं सख्त नियम

पेसो (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लाेसिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन) की गाइडलाइन के तहत विस्फोटक गोदाम के लाइसेंसी को विशेष प्रकार के सुरक्षित वाहन में जिलेटिन-डेटोनेटर उस साइट पर भेजना होता है, जहां ब्लास्टिंग होती है। यदि ब्लास्टिंग के बाद जिलेटिन-डेटोनेटर बच गए तो उसी वाहन में वापस गोदाम तक लाना पड़ता है। इसका रोजाना रिकॉर्ड रखना पड़ता है। जहां ब्लास्टिंग हो रही है उस जमीन का सर्वे नंबर, जिलेटिन-डेटोनेटर की संख्या, वाहन क्रमांक, गोदाम लाइसेंसी, ब्लास्टर, शार्ट फायर सबके नाम देना होते हैं। एक फॉर्म पर यह सभी जानकारी होती है। इस फॉर्म पर संबंधित थाने पर वाहन की जांच करवा कर हस्ताक्षर कराना अनिवार्य है।

लेकिन यूं हाे जाता है अवैध भंडारण

खदानों में ब्लास्टिंग को लेकर दिक्कतें नहीं है, कपिलधारा के कुएं आदि बनाने के छोटे कामों के लिए अवैध भंडारण होता है। जानकारों के अनुसार विस्फोट करने का लायसेंस रखने वाले ऐसे लोग जिनके पास काम नहीं है, उनके नाम से ऑर्डर करवा कर जिलेटिन-डेटोनेटर गोदाम से निकलवाई जाती है। फाॅर्म में उल्लेखित साइट पर ब्लास्टिंग न करते हुए दर्शाई गई जिलेटिन-डेटोनेटर अवैध रूप से अन्यत्र संग्रहित की जाती है। बाद में ये महंगे भाव पर कुएं आदि के लिए ब्लास्ट करने सीजन में आने वाले बाहरी तत्वों को बेची जाती है।

आज पेटलावद ब्लास्ट को तीन साल हो गए हैं। अभी तक जिलेटिन और डेटोनेटर की निगरानी का कोई सिस्टम नहीं बन पाया है। गोदाम से जिलेटिन और डेटोनेटर निकलने के बाद खदानों या पहाड़ को तोड़ने में खपा है या अवैध भंडारण हुआ। इसका किसी को कुछ पता नहीं होता है। यह खुलासा भास्कर पड़ताल में हुआ है। हादसे में 73 लोगों की जान गई थी। लेकिन आज तक जहां इस विस्फोटक को ले जाया जाता है, वहां ब्लास्टिंग हुई या नहीं । यह जांचने न तो पुलिस और न ही प्रशासन के अफसर पहुंचते है।

भास्कर लाइव : पुलिसकर्मी ने चौकी से बाहर आकर वाहन तक नहीं देखे, कर दिए साइन

बिना चैकिंग के वाहन किया पास | अंतरवेलिया पुलिस चौकी। मंगलवार सुबह 10.35 बजे थे। गांव झायड़ा स्थित विस्फोटक गोदाम से जिलेटिन-डेटोनेटर भरे दो वाहन चौकी के सामने खड़े हुए। नियमानुसार पुलिस होती। फॉर्म आरई-13 पर हस्ताक्षर कराए जाते। एजेंसी का कर्मचारी चौकी के अंदर जाता है। फॉर्म पर हस्ताक्षर करवा कर लौट आता है। कोई पुलिसकर्मी बाहर नहीं आता है। दोनों में से किसी वाहन की जांच नहीं होती है।

जानिए कैसे बिना ब्लास्टिंग लग जाते हैं बिल

जनसुनवाई में 13 जुलाई को लालू पिता फत्तू नि. माछलिया के पाेते गंगाराम ने आवेदन किया। उसने बताया कि उसके दादा के नाम से कुआं खुदवाने के 1.53 लाख रुपए मंजूर हुए थे लेकिन पूरा भुगतान नहीं हुआ। जवाब में ग्राम पंचायत की ओर से जारी पत्र गंगाराम को दिया गया, जिसमें 12100 रुपए की ब्लास्टिंग का बिल लगा है। गंगाराम का कहना है उसके कुएं में ब्लास्टिंग हुई ही नहीं है। कागज में जो जिलेटिन-डेटोनेटर का इस्तेमाल हुआ।

शुक्र है...कासवां का हश्र देख ब्लास्टिंग से जुड़े लोग हो गए सतर्क

सुरक्षा मानकों के हाल जानने भास्कर जायड़ा स्थित विस्फोटक गोदाम पहुंचा। गोदाम पर लोहे का मजबूत गेट है। जिलेटिन व डेटोनेटर के दो अलग-अलग कमरे बने हैं। 100 मीटर दूर तक कोई आबादी नहीं, न ही बिजली के तार। गोदाम के लायसेंस धारक लाखन सोलंकी का कहना है-हर तीसरे महीने निरीक्षण होता है। हर जिलेटिन-डेटोनेटर की जानकारी पेसो के ऑनलाइन सिस्टम पर दर्ज होती है।

जानिए क्या कहा अधिकारियों ने जब भास्कर ने सबसे पूछे सवाल






वादों से मुकरी सरकार

न बच्चों की फीस भरी,नहीं मिली नौकरी, मांग रहे हैं बकाया कर्ज

दीपक जैन, पेटलावद | 12 सितंबर 2015 को हुए ब्लास्ट ने 73 जानें ली थी और 75 लोगों को घायल कर दिया था। इन लोगों के परिवार आज भी जिंदगी से संघर्ष कर रहे हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने ब्लास्ट पीड़ितों को मदद का भरोसा दिया लेकिन पीड़ित परिवारों को आज लाभ नहीं मिला।

3 साल बाद भी नहीं मिल पाई सरकारी मदद

नहीं मिला मुआवजा

स्व. गंगाराम राठौड़ की प|ी चंद्रकांता (67) ने बताया कि ब्लास्ट में मेरे पति, दोनों बहुएं, एक बेटा सभी मर गए। अब मेरा सहारा केवल मेरे दोनों पोते हैं। ब्लास्ट में मकान क्षतिग्रस्त हुआ था। एस्टीमेट 34 लाख 97 हजार का बना था। कुछ नहीं मिला।

नौकरी नहीं मिली

स्व. मुकेश सेठिया की प|ी संतोष सेठिया का कहना है 3 लड़कियां और 1 लड़का है। मुख्यमंत्री ने मुझसे वादा किया था कि आपकी बिटिया की उम्र 18 वर्ष होने पर नौकरी देंगे। आवेदन के बाद भी नौकरी नहीं मिली।

नौकरी दी, वेतन नहीं मिला

स्व. आरिफ मंसूरी की मां शैजादी मंसूरी बताती हैं नौकरी के नाम पर रसाेइयन बनाया। 6 से 7 माह हो गए, अभी तक वेतन भी नहीं मिला। पंचायत ने मकान दिया, उसकी राशि 50 हजार माफ करने का वादा मुख्यमंत्री ने किया था लेकिन अब लिखित में मांगते हैं।

नहीं मिली नौकरी

स्व. संतोष मुलेवा की प|ी सारिका बताती हैं-मैंने बीए व पीजीडीसीए किया है। ब्लास्ट के तीन साल बाद भी नौकरी नहीं मिली। बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकार उठाएगी, ऐसा वादा किया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मुझसे मांग रहे हैं रिश्वत

स्व. सुनील परमार की प|ी रामकन्या परमार का कहना है कि सरकारी नौकरी नहीं दी। पति का लोन माफ नहीं किया। नामांतरण कराने गई तो रिकवरी निकाल दी गई।रिश्वत मांगी, मना करने धमकी दे रहे हैं।

राशनकार्ड नहीं बना

स्व. विजय राठौड़ की प|ी सोनम राठौड़ का कहना है मेरे बच्चे की पढ़ाई का खर्च खुद उठा रही हूं। मुझे जो नौकरी दी गई वो भी पेटलावद से 4 किलोमीटर दूर है। 3 हजार में घर और बच्चे की पढ़ाई नहीं हो पाती। गरीबी रेखा का राशन कार्ड भी अभी तक नहीं बनाया गया है।

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