बच्चे के साथ मानवता की भी मौत; पहली बार उस मां ने मारा जो शौचालय में छोड़कर भागी, दूसरी बार अस्पताल वालों ने जो उसे तुरंत नहीं निकाल पाए

मध्य प्रदेश न्यूज: स्वीपर पहुंची तो टॉयलेट सीट में भरा हुआ था ब्लड, उसमें से नजर आ रहा था बच्चे का पैर

Bhaskar News

Mar 17, 2019, 02:19 PM IST
Jhabua Madhya Pradesh News in Hindi:  6 month embryo trapped in toilet seat

झाबुआ (मध्य प्रदेश)। जिला अस्पताल के महिला वार्ड के शौचालय में छ: महीने के बालक का भ्रूण टॉयलेट शीट के अंदर पाइप में फंसा मिला। रात को या सुबह अज्ञात महिला इसे यहां फेंककर चली गई। सुबह साढ़े आठ बजे स्वीपर शकीला सफाई के लिए पहुंची तो पाइप से बाहर निकल रहा भ्रूण का पैर दिखाई दिया। उसने वार्ड की इंचार्ज सिस्टर को बताया। सिविल सर्जन और दूसरे डॉक्टर पहुंचे। अस्पताल वालों ने तत्काल पुलिस को सूचना देने की बजाय पहले अपनी लिखा-पढ़ी पूरी की। इसमें दो घंटे बीत गए और साढ़े 10 बजे शव को पुलिस के पहुंचने के बाद निकाला जा सका। भ्रूण बालक का है। उसके सारे अंगों का विकास हो चुका था। इसलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि छ: महीने का भ्रूण है। इन दो घंटों तक अस्पताल वाले शौचालय पर ताला लगाकर वार्ड में भर्ती मरीजों की सूची तलाशते रहे।

आंखों देखी
- वार्ड की सफाई के बाद शौचालय साफ करने पहुंची। अंदर वाली टॉयलेट शीट में काफी ब्लड था और ये भरा हुआ था। बच्चे का पैर दिखाई दे रहा था। मैंने जाकर सिस्टर कमला को बताया। उन्होंने साथ आकर देखा। कुछ देर में शीट में भरा पानी कम हुआ तो पैर साफ दिखने लगा। सिस्टर के कहने पर बाथरूम के गेट पर ताला लगा दिया। शकीला, स्वीपर (सबसे पहले देखा)

- जैसे ही मैं आई, शकीला ने मुझे बताया। उसके साथ बाथरूम में गई तो बच्चे के पैर बाहर निकले दिखाई दे रहे थे। गेट पर ताला लगवाया, ताकि कोई बाथरूम का इस्तेमाल करके फ्लश नहीं कर दे। ऐसा होता तो शव पाइप में अंदर जा सकता था। फौरन सिविल सर्जन को सूचना दी। -कमला कटारा, वार्ड की इंचार्ज नर्स

2 घंटे तक ये होता रहा ­: आवेदन लिखवाया, मरीज ढूंढे और भ्रूण पड़ा रहा
खबर सिविल सर्जन आरएस प्रभाकर को दी तो उन्होंने पहुंचने के बाद पुलिस को फोन लगाने की बजाय कागजी कार्रवाई पूरी करने में समय जाया किया। पहले उन्होंने ड्यूटी नर्स से आवेदन लिखवाया। इसके बाद वार्ड में भर्ती मरीजों की सूची देखने बैठ गए। इनमें कोई ऐसा केस नहीं मिला जो गर्भवती महिला को भर्ती करने का हो। एक आवेदन में नवजात भ्रूण नहीं लिखा था तो दूसरा लिखवाया। इसके बाद वार्ड प्रभारी डॉक्टर एम किराड़ को बुलाया। उनसे पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए। फिर पुलिस को सूचना दी। तब तक 10 बज गई और पुलिस आते-आते साढ़े 10 हो गए।

डॉक्टर बोले निकाल लेते, जिंदा होता तो
वार्ड प्रभारी डॉ. एम किराड़ आए तो उन्हें इस बारे में बताया गया। वो बोले बच्चे को तो निकाल लेते, वो अगर जिंदा होता तो। इस पर सिविल सर्जन ने कहा, पानी में उल्टा डूबा पड़ा है, जिंदा नहीं है। पहले दस्तावेजी कार्रवाई पूरी कर लें, फिर पुलिस के सामने निकलवाएंगे।

दम घुटने से ही हुई मौत
भ्रूण का पोस्टमार्टम दोपहर में किया गया। लगभग 24 सप्ताह का बालक का भ्रूण है। आरएमओ डॉ. सावनसिंह चौहान के अनुसार प्रारंभिक रिपोर्ट में दम घुटने के कारण मौत सामने आई है। मौत 24 घंटे के भीतर हुई।

प्रसूति वार्ड में नहीं लेते, इसलिए यहां भर्ती करते हैं
जिला अस्पताल में महिलाओं को खून आने, गर्भ के समय रक्तस्त्राव या दूसरी परेशानियों के दौरान अक्सर प्रसूति वार्ड में मरीजों को भर्ती नहीं किया जाता। उन्हें महिला वार्ड में भेज दिया जाता है। अक्सर यहां गर्भवती महिलाएं भर्ती होती हैं, जो नहीं होना चाहिए। शुक्रवार को ही एक प्रसूता को लेबर पेन होने पर यहां से प्रसूति के लिए लेबर रूम भेजा गया। शनिवार को भ्रूण टॉयलेट में मिलने के बाद इसी वजह से ये लगा कि संभवत: यहां भर्ती किसी महिला का गर्भपात हुआ होगा। लेकिन जब फाइलें देखी तो एक भी केस ऐसा नहीं मिला। सिविल सर्जन डॉ. आरएस प्रभाकर का कहना है, प्रसूति वार्ड प्रभारी को निर्देश दिए जाएंगे कि महिला संबंधी रोगों के मरीजों को वहीं भर्ती करें। ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर साहब को भी लिखित में सूचना देंगे।

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