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झाबुआ जिले को ईको टूरिज्म की पहली मंजूरी मिली, विकास के लिए हाथीपावा पहाड़ी को चुना

झाबुआ जिले को ईको टूरिज्म की पहली मंजूरी मिली है। इसके तहत किसी ऐसे वन क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 11, 2018, 02:45 AM IST

झाबुआ जिले को ईको टूरिज्म की पहली मंजूरी मिली, विकास के लिए हाथीपावा पहाड़ी को चुना
झाबुआ जिले को ईको टूरिज्म की पहली मंजूरी मिली है। इसके तहत किसी ऐसे वन क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाता है, जहां प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ पर्यटक उठा सकें। झाबुआ वन विभाग ने इसके लिए हाथीपावा को चुना है। यहां पर्यटकों के लिए सुविधाएं विकसित करने के लिए 33.4 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इसका प्रस्ताव तैयार हो गया है, जो 13 जुलाई को वन विभाग के सीसीएफ को प्रस्तुत किया जाएगा। सीसीएफ के जरिये प्रस्ताव ईको टूरिज्म बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा, जहां से विकास के लिए रुपए मंजूर किए जाएंगे। पूर्व में विभाग ने 70 लाख से अधिक का प्रस्ताव भेजा था लेकिन वह लंबे समय तक लंबित रहा। पूर्व में ईको टूरिज्म की मंजूर इंदौर को दी गई। अब झाबुआ जिले के लिए पहली मंजूरी आई है, जिसके तहत 33.4 लाख रुपए की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की गई है।

लोगों की भागीदारी देखकर किया हाथीपावा का चयन

ईको टूरिज्म के लिए हाथीपावा का चयन लोगों की भागीदारी देख कर लिया गया है। पूर्व के वर्षों में यहां कई बार पौधारोपण हुआ लेकिन सफल नहीं रहा। पिछले साल यहां 8500 पौधे लगाए गए। लोगों ने भागीदारी कर पौधे लगाए, इनकी सिंचाई की व्यवस्था की। खुद जाकर देख रेख की। इस वजह से दो साल में यहां लगभग सभी पौधे जीवित हैं। पुलिस, प्रशासन के अमले समेत सामाजिक संगठनों ने यहां पौधों के अलावा फेंसिंग, पक्षियों के दाना-पानी की स्थायी व्यवस्था, हलाव, बैठने के लिए कुर्सी आदि की भी व्यवस्था की है।

2016 में जिले के कुछ क्षेत्र ईको टूरिज्म के लिए अधिसूचित किए गए थे। विभाग ने इस वर्ष झाबुआ को ईको टूरिज्म की पहली मंजूरी दी है। हमसे प्रस्ताव मांगा गया था। 33 लाख का प्रस्ताव बना है, जो 13 जुलाई सीसीएफ को पेश करेंगे। ईको टूरिज्म बोर्ड की बैठक में स्वीकृति की शेष औपचारिकताएं पूरी हाे जाएंगी। अनिलकुमार शुक्ला, डीएफओ वन विभाग

ईको टूरिज्म के तहत पहाड़ी पर ये काम होंगे

3 छतरीनुमा स्ट्रक्चर बनेंगे। इन्हें पगोड़ा कहा जाता है। लोग यहां बैठ कर भोजन कर सकेंगे।

2 मचान बनेंगे, जिन पर चढ़ कर प्राकृतिक नजारों का आनंद लिया जा सकेगा। 1 बड़ा गेट बनाया जाएगा।

2 किमी सड़क बनाई जाएगी। अभी शहर से पहाड़ी के बीच के इतने हिस्से में सड़क नहीं है।

15500 पौधों की गर्मी में सिंचाई के लिए 30 हजार रुपए महीने का प्रावधान किया है।

10 यूनिट कचरा प्रबंधन के लिए बनेंगी।

1 किमी क्षेत्र में फेंसिंग की जाएगी।

2 जगह साइन बोर्ड लगेंगे।

3 तालाब जो आसपास हैं, उनका गहरीकरण किया जाएगा, ताकि पहाड़ी पर हरियाली कायम रहे।

3 सुरक्षाकर्मी कलेक्टर दर पर नियुक्त कर 24 घंटे के लिए तैनात किए जाएंगे। उनके आवास भी बनाए जाएंगे।

2 चौकीदार हट का भी निर्माण होगा।

और ये देखिए बदलाव की तस्वीर : जिस हाथीपावा पहाड़ी पर जाने से डरते थे लोग, वहां महिलाएं-बालिकाएं बेखौफ मना रही हैं पिकनिक

एक साल में ही हाथीपावा पहाड़ी की तस्वीर बदल गई है। यहां एक वर्ष पहले तक लोग दिन में ही जाने से डरते थे। सड़क, फेंसिंग, चौकीदार, कुर्सियां, सुंदर प्राकृतिक नजारों और हरियाली ने लोगों को आकर्षित किया है। मंगलवार दोपहर में गोपाल कॉलोनी की महिलाएं, बालिकाएं व बच्चे यहां बेखौफ पिकनिक मना रही थीं। वे टिफिन लेकर आईं। हाथीपावा पर भोजन किया। बड़ी बात यह कि उनके साथ कोई पुरुष सदस्य नहीं था।

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