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गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 13 जुलाई से

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 13 जुलाई से पुष्य संयोग में आरंभ होगी। 21 जुलाई को नवमी पर सुबह 5.57 बजे से 9.07 बजे तक सर्वार्थ...

Dainik Bhaskar

Jul 11, 2018, 02:45 AM IST
गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 13 जुलाई से
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि 13 जुलाई से पुष्य संयोग में आरंभ होगी। 21 जुलाई को नवमी पर सुबह 5.57 बजे से 9.07 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग रहेगा। गुप्त नवरात्रि में शक्ति पीठ हरसिद्धि मां की विशेष पूजा-अर्चना होगी। साधक मनवांछित फल प्राप्ति के लिए गुप्त साधना करेंगे।

पंडित हिमांशु शुक्ल का कहना है कि नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की विशेष रूप से विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना की जाती है। साल में दो बार ऐसी नवरात्र आते हैं। इनको चैत्र और शारदीय नवरात्र के रूप में माना जाता है। उनके अनुसार साल में दो नवरात्र और भी हैं इन्हें गुप्त नवरात्र कहते हैं। इन नवरात्रों में मां दुर्गा की आराधना गुप्त रूप से की जाती है। इससे मां का ध्यान लगाने से विशेष फल मिलता है।

भड़ली नवमी- अबूझ मुहूर्त

पं. शुक्ल बताते हैं कि गुप्त नवरात्रि की नवमी भड़ली नवमी के नाम से जानी जाती है। इसे अबूझ मुहूर्त की संज्ञा दी गई है। देवशयनी एकादशी से पहले मांगलिक कार्यों के लिए यह आखिरी विशेष मुहूर्त है।

सर्वार्थ सिद्धि योग का रहेगा महासंयोग, आखिरी विशेष मुहूर्त है भड़ली नवमी पर

23 जुलाई को देवशयनी एकादशी, चातुर्मास आरंभ

23 जुलाई को देवशयनी एकादशी है। इस दिन से चातुर्मास का आरंभ माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रीहरि विष्णु राजबलि का आतिथ्य स्वीकार करते हुए पाताल लोक जाएंगे तथा चार माह विश्राम करेंगे। देव शयन के इन चार माह मांगलिक कार्य नहीं होंगे।

गुप्त नवरात्रि पर पूजा

13 जुलाई : मां ब्रह्मचारिणी पूजा

14 जुलाई : मां ब्रह्मचारिणी पूजा

15 जुलाई : मां चंद्रघंटा पूजा

16 जुलाई : मां कुष्मांडा पूजा

17 जुलाई : मां स्कंदमाता पूजा

18 जुलाई : मां कात्यायनी पूजा

19 जुलाई : मां कालरात्रि पूजा

20 जुलाई : मां महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी

21 जुलाई : मां सिद्धिदात्री, नवरात्रि पारण

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