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इस वर्ष 530 हेक्टेयर में किसान कर रहे हैं आधुनिक खेती

Jhabua News - जगदीश प्रजापत | बरवेट (झाबुआ) क्षेत्र के कुछ उन्नत किसान आधुनिक खेती को अपनाकर अपनी स्थिति को सुधार रहे हैं। ये...

Dainik Bhaskar

Aug 07, 2018, 02:45 AM IST
इस वर्ष 530 हेक्टेयर में किसान कर रहे हैं आधुनिक खेती
जगदीश प्रजापत | बरवेट (झाबुआ)

क्षेत्र के कुछ उन्नत किसान आधुनिक खेती को अपनाकर अपनी स्थिति को सुधार रहे हैं। ये किसान पिछले बीस वर्षो से टमाटर, मिर्ची और करेला लगाकर अन्य किसानों को भी आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

पेटलावद क्षेत्र में इस वर्ष 530 हेक्टेयर भूमि में किसान आधुनिक खेती कर रहे हैं। पेटलावद, रामनगर, बनी, रायपुरिया, जामली, बावड़ी, सारंगी, करवड़, रामगढ़, करडावद सहित बरवेट के किसानों ने आधुनिक खेती को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार किया है। कुछ किसान फल की खेती को भी अपना रहे है। बरवेट क्षेत्र के उन्नत किसान ओमप्रकाश पटेल ने लगभग 3 बीघा में अमरूद के पौधे लगाए हैं। ओम प्रकाश पाटीदार ने बोर और नींबू के पौधे भी लगाए हैं।

जामली के उन्नत कृषक हरिराम पाटीदार ने बताया आधुनिक खेती के लिए खेत को एक महीने पहले से तैयार कर के पाले चढ़ाए जाते हैं। उसके बाद पौधे को पानी पिलाने के लिए ड्रीप (नली) बिछाई जाती है। जो पौधे को पानी और दवाई देने का सबसे अच्छा साधन है। उसके बाद मल्चिंग (प्लास्टिक) बिछाई जाती है जिससे खरपतवार नहीं होता। इससे भूमि में जितना भी पोषक तत्व है सिर्फ पौधे को मिलता है। उन्नत कृषक लक्ष्मीनारायण पाटीदार रामनगर वाले ने बताया ड्रीप नली बिछाने से कम पानी से ज्यादा भूमि सिंचित हो जाती है। सिंचाई के लिए मेहनत मजदूरी नहीं लगती। साथ ही मल्चिंग प्लास्टिक पन्नी बिछाने से खरपतवार नहीं होता। जिससे मेहनत मजदूरी बच जाती है। बरसात के दिनों में बारिश होती है तब कभी-कभी खराब पानी भी बरस जाता है। जो पौधों की जड़ो में नहीं पहुंचता।

टमाटर, मिर्च और करेला लगाकर अन्य किसानों को भी आधुनिक तरीके से खेती करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं किसान

मल्चिंग प्लास्टिक पन्नी बिछाकर किसान टमाटर-मिर्च, करेला सहित अन्य सब्जियांे की खेती कर रहे हैं।

हाईब्रिड खेती भी रिस्क है

बावड़ी के उन्नत किसान ओमप्रकाश पाटीदार ने बताया हाईब्रिड टमाटर, मिर्ची की खेती भी रिस्की है। टमाटर, मिर्ची की खेती में किस्मत के साथ प्रकृति का साथ होना भी जरूरी है। मार्केट में भाव भी जरूरी है। साथ ही आधुनिक पद्धति से खेती करने से पौधों को बीमारियां नहीं लगती और 50% खाद दवाई मजदूरी की बचत होती है। सही ढंग से की जाए तो हाईब्रिड खेती नुकसान नहीं देती।

आधुनिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे किसान


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