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सम्यक ज्ञान के साथ धार्मिक क्रिया करना लाभदायक : साध्वी पुनीतप्रज्ञा

झाबुआ | बिना सम्यक ज्ञान के आधी अधूरी क्रियाएं कोई फल नहीं देती है बल्कि दोष लगता है। जिस तरह मक्खन निकालने के लिए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 07, 2018, 02:45 AM IST

झाबुआ | बिना सम्यक ज्ञान के आधी अधूरी क्रियाएं कोई फल नहीं देती है बल्कि दोष लगता है। जिस तरह मक्खन निकालने के लिए छाछ का होना आवश्यक है उसी तरह कोई भी कार्य करने के लिए सम्यक ज्ञान होना जरूरी है।

यह विचार साध्वी मणिप्रभाश्रीजी की सुशिष्या पुनीतप्रज्ञाश्रीजी ने श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में चातुर्मास के दौरान हो रहे प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि अज्ञानता वश या भूल से कुछ नियम या व्रत भंग होने से दोष नहीं लगता है। साध्वी प्रमोदयशाश्रीजी ने शांतसुधारस प्रवचन में बताया कि व्यक्ति को सांसारिक कार्यों में मन लगाने के बाजाय धार्मिक कार्यों में ज्यादा मन लगाना चाहिए और अधिक से अधिक धर्म आराधना करके मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहिए। तपस्या के क्रम में चत्तारि अठ दस दोय तप का 7वां उपवास है। इस तप में वीणा कटारिया, सविता मुथा, शीला कटारिया, सपना संघवी, प्रेमलता पोरवाल, पुष्पा नाहटा, भारती नाहटा, सुशीला राठौर, श्वेता सखलेचा एवं सरिता बाबेल भाग ले रहे हैं। इसी प्रकार वर्धमान तप के पाए में सभी 35 आराधकों की आयंबिल की तपस्या भी चल रही है। आयंबिल करवाने का लाभ धर्मचंद मेहता परिवार ने लिया एवं शर्कसत्व अभिषेक का लाभ योगेश बापू ने लिया। जानकारी डॉ. प्रदीप संघवी ने दी।

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