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बिना प्रोफेसर के कॉलेज में कोई आ नहीं आ रहा इसलिए 360 में से 2 अंक वाले को भी दिया प्रवेश

झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज में एक भी प्रोफेसर नहीं है। इस वजह से शिक्षा सत्र शुरू हुए एक महीना बीतने के बाद भी दूसरे,...

Bhaskar News Network| Last Modified - Aug 07, 2018, 02:45 AM IST

बिना प्रोफेसर के कॉलेज में कोई आ नहीं आ रहा इसलिए 360 में से 2 अंक वाले को भी दिया प्रवेश
बिना प्रोफेसर के कॉलेज में कोई आ नहीं आ रहा इसलिए 360 में से 2 अंक वाले को भी दिया प्रवेश
झाबुआ इंजीनियरिंग कॉलेज में एक भी प्रोफेसर नहीं है। इस वजह से शिक्षा सत्र शुरू हुए एक महीना बीतने के बाद भी दूसरे, तीसरे व चौथे वर्ष के विद्यार्थियों की पढ़ाई शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे हालातों को देख अब इस कॉलेज में प्रवेश लेने को कोई छात्र तैयार नहीं हो रहा है। मेकेनिकल और कम्प्यूटर साइंस ब्रांच की कुल 120 सीटों के लिए हुई काउंसलिंग के दो चरण सोमवार को खत्म हो गए। जेईई परीक्षा देने वाले जिन 35 विद्यार्थियों ने झाबुआ कॉलेज को इंजीनियरिंग के प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए विकल्प के रूप में चुना था, उनमें से सिर्फ 7 विद्यार्थियों ने ही आखिरी तारीख की दोपहर तक एडमिशन लिया। 113 सीटें खाली रह गईं। जिन 7 विद्यार्थियों ने एडमिशन लिया है, उनमें से एक को तो जेईई एक्जाम में 360 में से सिर्फ 2 अंक आए थे। सिर्फ इतना नहीं, अब कॉलेज प्रशासन सीएलसी (कॉलेज स्तर की काउंसलिंग) के जरिये मैथ्स विषय से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश देगा। 13 व 14 अगस्त को यह काउंसलिंग रखी गई है।

कोर्ट का आदेश आने पर ही प्रोफेसरों की नियुक्ति होगी। तब तक के लिए पोलीटेक्निक कॉलेज से स्टाफ मांगा है। मंगलवार से कुछ विषय की कक्षाएं लगने लगेंगी। एडमिशन नहीं होने से अब रिक्त सीटों पर मैथ्स से 12वीं पास करने वाले विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। केएस चंदेल, प्राचार्य इंजीनियरिंग कॉलेज झाबुआ

कॉलेज समय में छात्रावास में पढ़ते मिले विद्यार्थी

कॉलेज में पढ़ाई नहीं होने से सोमवार दोपहर में विद्यार्थी दोपहर 2 बजे छात्रावास में ही नजर आए। वे कॉलेज जाकर समय बर्बाद करने के बजाय छात्रावास में ही रह कर किताबें पढ़ रहे हैं।

कॉलेज का खुद का भवन नहीं, पोलीटेक्निक में हो रहा संचालित

आरजीपीवी ने भोपाल व शहडोल के अलावा तीसरा यूआईटी (यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी) 2015 में झाबुआ में खोला था लेकिन तीन साल से कॉलेज का खुद का भवन नहीं है। पोलीटेक्निक कॉलेज में दूसरी मंजिल पर संचालित हो रहा है। अब पहले चरण के निर्माण के लिए 37 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं, जिसके तहत निर्माता एजेंसी पीआईयू (लोक निर्माण विभाग) दो ब्रांच मैकेनिकल व कम्प्यूटर साइंस के कॉलेज भवन और दो छात्रावास (बालक व बालिका) बनाएगा। अगले चरण में शेष तीन ब्रांच के लिए भवन निर्माण किया जाएगा। हालांकि ये तीन ब्रांच चालू करने के लिए झाबुआ कॉलेज को फिलहाल मंजूरी भी नहीं मिली है।

इसलिए नहीं है कॉलेज में एक भी प्रोफेसर : 2015 में चालू होने के बाद से कॉलेज में कांट्रेक्ट के आधार पर रखे गए प्रोफेसर पढ़ा रहे थे। पिछले सत्र में 13 प्रोफेसरों ने कॉलेज के कुल 120 विद्यार्थियों को पढ़ाया था। इस सत्र के लिए आरजीपीवी (राजीव गांधी प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय) ने प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए राज्य स्तरीय परीक्षा करवाई। इसके विराेध में पिछले साल पढ़ा रहे प्रोफेसर हाईकोर्ट चले गए। एक मामले में स्टे मिला लेकिन अन्य दायर याचिकाओं के मामले में फैसला लंबित होने से पिछले साल पढ़ा रहे प्रोफेसरों को ज्वाइनिंग नहीं दी गई है।

मैकेनिकल में हुआ एक एडमिशन कॉलेज में दो ब्रांच हैं। मैकेनिकल और कम्प्यूटर साइंस। दोनों की 60-60 सीटें हैं। मैकेनिकल के प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए इस बार 4 और कम्प्यूटर साइंस में 31 विद्यार्थियों ने झाबुआ कॉलेज को विकल्प चुना था। इन सभी को सीट आवंटित की गई थी लेकिन सोमवार दोपहर तक कम्प्यूटर साइंस में 6 और मैकेनिकल में 1 एडमिशन हुआ था।

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