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जिनालय में 60 से अधिक आराधकों ने ग्रहण किए उपवास के पच्चखाण

स्थानीय बावन जिनालय में चातुर्मास के लिए विराजित साध्वी पुनीतप्रज्ञाश्रीजी की निश्रा में रोजाना विभिन्न...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 31, 2018, 02:51 AM IST

स्थानीय बावन जिनालय में चातुर्मास के लिए विराजित साध्वी पुनीतप्रज्ञाश्रीजी की निश्रा में रोजाना विभिन्न धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। सोमवार को 60 से अधिक आराधकों ने उपवास के पच्चखाण ग्रहण किए।

प्रवचन के दौरान साध्वीश्री पुनीतप्रज्ञाश्रीजी ने शांत सुधाकर ग्रंथ का वाचन किया। उन्होंने कहा संसार का स्वरूप एवं सुख कांच के टुकड़े के समान है परंतु जीवन इसे हीरा मान बैठा है। संसार का सुख क्षणिक कांच के समान है जबकि मोक्ष का सुख शाश्वत व हीरे के समान है। संसार का मतलब दावानल अग्नि है जबकि प्रभु की जिनवाणी उस दावानल को शांत करने वाले जल के समान है। साध्वीश्री प्रमोदयशाश्रीजी ने श्रावक जीवन के कर्तव्यों पर आधारित आचार्यश्री र|शेखरसूरीजी द्वारा रचित श्राद्ध विधि प्रकरण ग्रंथ का वाचन किया। दोपहर 2.30 बजे से 3.30 बजे तक श्राविकाओं के लिए शिविर का आयोजन किया गया।

सोमवार प्रात: 6 बजे मूलनायक भगवान का अभिषेक सबोध राठौर परिवार ने किया। साढ़े 6 बजे तत्व ज्ञान का विशेष आयोजन हुआ। जिसमें पूज्यश्री ने तत्वज्ञान की जानकारी दी। चातुर्मास समिति की ओर से 11 तपस्वियों के बियासने कराए गए। समिति के अध्यक्ष तेजप्रकाश कोठारी ने बताया प्रवचन के पूर्व प्रदीप सुजानमल कटारिया परिवार ने शांत सुधाकर ग्रंथ व अभय कुमार धारीवाल परिवार ने श्राद्ध विधि प्रकरण ग्रंथ को साध्वीश्री को वोहराया व शास्त्र की वाक्षेप पूजा की।

5 दिन में 200 अधिक आयंबिल

चातुर्मास शुरू हुए पांच दिन हो चुके हैं। इस अवधि में 200 से अधिक आयंबिल तप की आराधना समाजजनों द्वार की गई है। आयंबिल कराने का लाभ पूरे श्रावण माह धर्मचंद मेहता परिवार द्वारा लिया जा रहा है।

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