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स्कूल ढहा, अब खुले आसमान के नीचे 78 बच्चों की हो रही पढ़ाई, शौचालय में चल रहा कार्यालय

स्कूल भवन पूरी तरह खंडहर हो चुका है, बच्चे इस तरह बाहर बैठकर पढ़ रहे हैं। अभिभावक बोले-बच्चों की पढ़ाई की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 31, 2018, 02:55 AM IST

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    स्कूल भवन पूरी तरह खंडहर हो चुका है, बच्चे इस तरह बाहर बैठकर पढ़ रहे हैं।

    अभिभावक बोले-बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था करे सरकार

    स्कूल के छात्र लाला ने बताया-पानी आता है, वैसे ही पास में पतरे के नीचे दौड़ कर चले जाते हैं। गांव के अभिभावक अर्जुन भूरिया ने बताया-बरसों से स्कूल की हालत खराब है। बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकार को व्यवस्था करना चाहिए।

    9 साल से पत्र लिख कर बता रहे हैं कि जर्जर है भवन : स्कूल अचानक स्थिति में नहीं पहुंचा है। 1980 में बना गर्डर-फर्शी की छत वाला स्कूल बरसों से जर्जर है। 9 साल पहले इस स्कूल में पदस्थ हुए विजय बामनिया बताते हैं-मैं जब 2009 में स्कूल आया, तभी पत्र लिख कर विभाग के अधिकारियों को बताया गया कि स्कूल का भवन जर्जर है। इसके बाद से हर साल पत्र लिखा जा रहा है लेकिन न तो जर्जर भवन ढहाने की अनुमति मिली, न ही नया भवन निर्माण करने की स्वीकृति आई।

    शौचालय में कर रहे हैं कार्यालयीन काम

    स्कूल भवन ढह जाने से शिक्षकों ने कार्यालय शौचालय में शिफ्ट कर दिया है। यहीं अलमारियां रखी हैं। यहीं बैठ कर दोनों शिक्षक सागरलाल सोलंकी और विजय बामनिया स्कूल का कार्यालयीन काम करते हैं। बच्चों को शौच या लघुशंका के लिए उनके आसपास के खेतों में जाना पड़ता है।

    नए भवन का प्रस्ताव तक नहीं बना : चार साल से स्कूल भवन अत्यंत जर्जर था। संकुल प्राचार्य कैलाश पाटीदार ने बताया-सालभर से स्कूल की स्थिति ज्यादा दयनीय थी। 6 महीने पहले स्कूल भवन ढहाने की स्वीकृति तो मिल गई लेकिन इसके लिए राशि नहीं दी गई। ग्राम पंचायत से तुड़वाने के लिए कहा गया लेकिन पंचायत ने बिना रुपए के ढहाने से इंकार कर दिया।

    जिम्मेदार बोले

    आठ दिन पहले स्कूल भवन की दीवार ढहने पर पंचनामा बना कर विभाग काे भेजा था। पूर्व में भी भवन जर्जर होने की सूचना पत्र के जरिये दी थी। भवन ढहाने के लिए विभाग से अनुमति मिली लेकिन राशि नहीं मिलने से ढहा नहीं पाए। शंकर राठौड़, सीएसी

    बारिश से दीवार ढही है। जो पत्र विभाग को मिले थे, उसके अनुसार नया भवन बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। 2018-19 में बनने वाले स्कूल भवनों की सूची अभी नहीं आई है। स्कूल भवन ढहने की वर्तमान स्थिति से भी वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया है। स्वीकृति जल्द आएगी। तब तक के लिए पास के एक ग्रामीण के मकान में स्कूल लगाने की व्यवस्था कर रहे हैं। एलएन प्रजापति, डीपीसी, जिला शिक्षा केंद्र झाबुआ

    जिम्मेदार नहीं बता पा रहे कब बनेगा भवन

    विभाग की लापरवाही से अब तक राशि मंजूर नहीं हुई ऐसे में भवन ढहाया नहीं जा सका। अंदाजा लगाया जा सकता है विभाग को बच्चों की जान और उनकी पढ़ाई के लिए कितना चिंतित है। नया निर्माण कब तक होगा, इसकी अवधि भी जिम्मेदार नहीं बता पा रहे हैं।

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