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कलेक्टर बोले-आधार के लिए परेशान न करें सहायक आयुक्त ने कहा-सुधार करवाना होगा

प्रोफाइल अपडेशन के लिए आधार में त्रुटि सुधार को लेकर हो रही बच्चों की फजीहत को लेकर प्रशासनिक उलझन की स्थिति बन गई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 06, 2018, 03:00 AM IST

कलेक्टर बोले-आधार के लिए परेशान न करें सहायक आयुक्त ने कहा-सुधार करवाना होगा
प्रोफाइल अपडेशन के लिए आधार में त्रुटि सुधार को लेकर हो रही बच्चों की फजीहत को लेकर प्रशासनिक उलझन की स्थिति बन गई है। कलेक्टर बोल रहे हैं बच्चों को परेशान न किया जाए वहीं सहायक आयुक्त बोल रहे हैं आधार के लिए बैंक जाकर सुधार तो हर हाल में करवाना ही होगा।

कलेक्टर आशीष सक्सेना ने निर्देश दिए हैं कि आधार के लिए बच्चों को परेशान न करें। उनकी प्रोफाइल बनाने के लिए स्कूलों में ही आधार वेंडरों की व्यवस्था कुछ दिनों के भीतर कर दी जाएगी। तब तक बच्चों को आधार में त्रुटि सुधार के लिए बैंकों के चक्कर खिलवाने न भेजा जाए। दूसरी ओर जिस जनजातीय कार्य विभाग (आदिवासी विकास विभाग) को प्रोफाइल बनाने का काम करना है, उसके सहायक आयुक्त (एसी) शासन से मिले टारगेट के बोझ तले दबे हैं, जो कलेक्टर के निर्देश के बावजूद कह रहे हैं कि आधार में सुधार के लिए आधार सेंटर जाना तो पड़ेगा। ऐसे में स्कूलों के प्राचार्य तो उलझन में हैं ही, अभिभावकों की भी दुविधा बरकरार है। इसकी वजह यह है कि छात्रावासों के साथ ही स्कूलों में भी नवप्रवेशित बच्चों का एडमिशन उनकी प्रोफाइल बनने के बाद ही देने के निर्देश विभागों ने स्कूल प्राचार्यों को दे रखे हैं। प्राचार्य बिना प्रोफाइल के बच्चे को प्रवेश दे दे तो विभागीय अफसर से फटकार मिलेगी। बच्चे आधार सेंटर (बैंकों) में दिखे तो कलेक्टर के निर्देश के उल्लंघन में फंसेगे। इस सब के बीच न अभिभावकों को और न ही बच्चों को राहत मिल रही है। गौरतलब है शिक्षण सत्र शुरू होने के बाद से बच्चे कक्षाओं के बजाय बैंकों की कतार में खड़े हैं। बुधवार को थांदला में इसके चलते चक्काजाम भी हो चुका है।

स्कूलों में वेंडरों को बुलाने की योजना पर लगेगा समय

अभी केवल कुछ बैंकों में आधार में त्रुटि सुधार का काम चल रहा है। कलेक्टर ने स्कूलों में ही वेंडरों को बुला कर वहीं बच्चों के आधार में त्रुटि सुधार का काम करवाने की योजना बनाई है। इसके लिए ई गवर्नेंस विभाग को वेंडरों से प्रपोजल बुलवा कर यूएडीएआई को भेजेंगे। वहां से स्वीकृति मिलने पर स्कूलों में ही वेंडर अपनी मशीनें लगा सकेंगे। हालांकि स्वीकृति आने में 10 से 15 दिन लग सकते हैं। इतने दिन प्रोफाइल बनाने का काम जनजातीय विभाग के अफसर बंद नहीं रखना चाहते और कलेक्टर बच्चों के बैंकों में कतार में लगने से बन रही कानून व्यवस्था की स्थिति को टालना चाह रहे हैं।

इसलिए है दबाव : 0.2% लोगों की ही प्राेफाइल बनी हैं अब तक

दरअसल अब अजा और अजजा वर्ग के सभी लोगों को योजनाओं का लाभ उनकी प्रोफाइल के जरिये ही दिया जाएगा। हर व्यक्ति की प्रोफाइल बनेगी। यह प्रोफाइल आधार और समग्र आईडी में दी गई जानकारी हूबहू मैच होनी चाहिए। प्राेफाइल बनाने का काम शासन ने जनजातीय कार्य (आदिवासी विकास विभाग) को सौंपा है। जिले में एसटी वर्ग की आबादी 8 लाख 91 हजार 818 और एससी की 17 हजार 427 एससी है। यानी 9 लाख से अधिक। इन सभी की प्रोफाइल बनाई जाना है। जून से काम शुरू हुआ है। इसे पूर्ण करने के लिए विभाग को जुलाई तक का समय दिया गया था। विभाग ने पहले चरण में बच्चों की प्राेफाइल अपने स्कूल व छात्रावासों के जरिये बनाने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें सभी प्राचार्यों को नए एडमिशन बच्चे की प्रोफाइल बनाने के बाद ही देने के लिए कहा गया है। बच्चों के आधार विवरण में कई त्रुटियां हैं, जिनके कारण मिलान नहीं हो रहा और प्राेफाइल नहीं बन पा रही। उन्हें आधार के विवरण में सुधार के लिए बैंकों में भेजा जा रहा है, जहां एक दिन में 20 से 25 बच्चों से ज्यादा का काम नहीं हो पा रहा। बच्चे परेशान हो रहे हैं। दूसरी ओर जिले में 9 लाख में से केवल 2375 की ही प्रोफाइल बन पाने से विभागीय दबाव अफसरों को दिया जा रहा है।

आधार कार्ड बनावने के लिए गुरुवार को भी बच्चे माता-पिता के साथ बैंक पहुंचे।

प्राचार्यों को दे दी है समझाइश : कलेक्टर

प्राचार्यों को कह दिया है कि आधार के लिए बच्चों को परेशान न करें। कोई बच्चा बैंकों में कतार में नहीं दिखना चाहिए। यूएडीएआई को स्कूलों में ही वेंडर बुलवा कर आधार में त्रुटि सुधार का काम करवाने की स्वीकृति के लिए प्रपोजल भेज रहे हैं। तब तक एडमिशन न रोकें। छात्रवृत्ति आदि की प्रक्रिया बाद में हो जाएगी। आशीष सक्सेना, कलेक्टर

कलेक्टर के निर्देश माने प्राचार्य : भाबर

कलेक्टर साहब ने प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं लेकिन आधार सेंटर पर अपने काम के लिए तो बच्चों को जाना पड़ेगा। वेंडरों को स्कूलों में ही बैठाने की व्यवस्था हो जाएगी, तब तो समस्या हल हो जाएगी। तब तक तो काम चलेगा। बंद कर देंगे तो कैसे काम चलेगा। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि कलेक्टर के निर्देश का पालन प्राचार्य न करें। फॉलो करें। गणेश भाबर, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग

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