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ट्रैक्टर-ट्रॉली में 71 बच्चों को कलेक्टोरेट लाए पालक, बोले- स्कूल में इन्हें पढ़ाने वाला नहीं

जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर के गांव पीलिया खदान में मीडिल स्कूल शिक्षकविहीन है। यहां के बच्चों के भविष्य को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 10, 2018, 03:00 AM IST

ट्रैक्टर-ट्रॉली में 71 बच्चों को कलेक्टोरेट लाए पालक, बोले- स्कूल में इन्हें पढ़ाने वाला नहीं
जिला मुख्यालय से करीब 10 किमी दूर के गांव पीलिया खदान में मीडिल स्कूल शिक्षकविहीन है। यहां के बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित पालकों ने सोमवार को अपना गुस्सा जाहिर किया। गांव के 71 बच्चों को एक ट्रैक्टर-ट्राॅली में बैठा कर पालक कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंच गए। अधिकारियों से सवाल किए कि स्कूल में इन्हें पढ़ाना वाला कोई नहीं है। विभाग के अफसरों ने अतिथि शिक्षक की नियुक्ति जल्द करने का आश्वासन देकर लौटाया।

दोपहर 1 बजे बच्चों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली कलेक्टर कार्यालय में रुकी। इनमें से बच्चे उतरे। बच्चों के पालकों से मिलने एसडीएम केसी परते पहुंचे लेकिन पालक समाधान वाला जवाब चाहते थे। इसलिए डीपीसी एलएन प्रजापति को बुलाया गया। उन्हें अभिभावकों ने समस्या बताई। डीपीसी ने बताया वह स्कूल शिक्षकविहीन हैं। संकुल प्राचार्य को एक शिक्षक की अस्थायी ड्यूटी लगाने के लिए कहा था, वहां शिक्षक क्यों नहीं जा रहे हैं। इसका पता करवाते हैं। उन्होंने बताया कि अभी स्कूल में अतिथि शिक्षक की नियुक्ति करवा देते हैं। समझाइश के बाद पालक लौट गए।

पीलिया खदान के मीडिल स्कूल में शिक्षक की नियुक्ति की मांग को लेकर ट्रैक्टर में सवार होकर आए बच्चे व पालक।

तीन में से सिर्फ एक स्कूल में ही शिक्षक, वो भी दो बजे चले जाते हैं : पालक

तीन बच्चों के पिता राकेश डामाेर ने बताया केवल एक किमी रास्ता कच्चा है। शेष पूरा रोड स्कूल तक आने के लिए चालू है। गांव के मालफलिया में नवीन प्राथमिक विद्यालय और माध्यमिक विद्यालय पीलिया खदान जब से बने हैं, तब से ताले ही नहीं खुले हैं। एक अन्य स्कूल प्राथमिक विद्यालय पीलिया खदान में दो शिक्षक हैं लेकिन दो बजे ही ताला लगा कर चले जाते हैं। दो बजे तक भी पढ़ाते नहीं हैं। कुर्सी पर बैठे रहते हैं। कुल तीन स्कूलों में 200 बच्चे हैं लेकिन पढ़ाई नहीं होने से बच्चों का भविष्य अंधकार में दिख रहा है। ऐसी ही व्यथा अन्य पालकों ने भी बताई।

जल्द ही अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर समस्या हल कर देंगे : डीपीसी

शिक्षकविहीन पीलिया खदान माध्यमिक विद्यालय में अस्थायी रूप से ड्यूटी के लिए एक शिक्षक को लगाने के निर्देश संकुल प्राचार्य को दिए गए थे। वे शिक्षक क्यों नहीं जा रहे हैं, इसका पता करवाता हूं। ग्रामीण स्थायी रूप से शिक्षकों की भर्ती चाहते हैं। यह शासन स्तर का मामला है। अतिथि शिक्षकों को भर्ती के लिए अब तक आदेश नहीं थे। सोमवार को ही विभाग का आदेश प्राप्त हुआ है। अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति कर समस्या हल की जाएगी। एलएन प्रजापति, डीपीसी जिला शिक्षा केंद्र झाबुआ

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2405 में से 125 शालाएं शिक्षकविहीन, वैकल्पिक बंदोबस्त कुछ भी नहीं

झाबुआ जिले में आठवीं तक की 2405 सरकारी स्कूल हैं। इनमें से 125 स्कूल शिक्षकविहीन हैं। यानी यहां एक भी शिक्षक पढ़ाने नहीं जाता। मौखिक रूप से संकुल प्राचार्यों को यहां व्यवस्था करने के लिए कहा गया है लेकिन वास्तव में यहां बच्चों को पढ़ाने के कोई स्थायी इंतजाम प्रशासन नहीं करवा पाया है। अब कहा जा रहा है कि शासन ने अतिथि शिक्षक रखने के आदेश कर दिए हैं। जल्द ही इन स्कूलों में अतिथि शिक्षकों के जरिये पढ़ाई करवाई जाएगी।

1200 शिक्षकों की कमी

शिक्षा का अधिकार अधिनियम में दिए गए छात्रों की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की नियुक्ति के प्रावधान को देखा जाए तो जिले में करीब 1200 शिक्षकों की कमी है। आठवीं तक के स्कूलों में 5000 से अधिक शिक्षकों की जरूरत है। जबकि लगभग 3800 ही पदस्थ हैं।

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