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अब भूमि स्वामी अपनी जमीन का खुद कर सकेंगे डायवर्सन

भूमि के डायवर्सन के लिए अब किसी भी व्यक्ति को एसडीएम (राजस्व) के न्यायालय से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। अब भूमि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 05, 2018, 03:05 AM IST

भूमि के डायवर्सन के लिए अब किसी भी व्यक्ति को एसडीएम (राजस्व) के न्यायालय से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। अब भूमि स्वामी अपनी भूमि का विधि-सम्मत जैसा चाहे डायवर्सन कर सकेगा। उसे केवल डायवर्सन के अनुसार भूमि उपयोग के लिए देय भू-राजस्व एवं प्रीमियम की राशि की स्वयं गणना कर राशि जमा करानी होगी और इसकी सूचना एसडीएम को देनी होगी। यह रसीद ही डायवर्सन का प्रमाण मानी जाएगी। अनुमति लेने का प्रावधान अब समाप्त किया जा रहा है। इसके लिए मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (संशोधन) विधेयक पारित किया जा चुका है।

नई व्यवस्था

एसडीएम कार्यालय से अनुमति लेने की व्यवस्था खत्म, प्रीमियम राशि भरने की रसीद ही डायवर्सन का प्रमाण होगा

अतिक्रमण किया तो होगा एक लाख का जुर्माना

शासकीय भूमियों पर अतिक्रमण के मामलों में अब अधिकतम एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। निजी भूमियों के मामले में 50 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान होगा। इसके साथ ही जिस भूमि पर अतिक्रमण होगा, उसे अतिक्रामक से 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष के मान से मुआवजा भी दिलाया जा सकेगा। अभी अतिक्रमित भूमि के मूल्य के 20 प्रतिशत तक अर्थदंड के प्रावधान थे।

नामांतरण के बाद मिलेगी नि:शुल्क प्रति: नामांतरण का आदेश होने के बाद अब सभी संबंधित पक्षों को आदेश और सभी भू-अभिलेखों में दर्ज हो जाने के बाद उसकी नि:शुल्क प्रति दी जाएगी। यह प्रावधान भी किया गया है कि भूमि स्वामी जितनी चाहे, उतनी भूमि स्वयं के लिए रखकर शेष भूमि बांट सकेगा।

भू-राजस्व संहिता में अब तक 58 संशोधन: मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता-1959 में अब तक 58 संशोधन किए जा चुके हैं। इसके बाद भी जन-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए जरूरी संशोधनों के सुझाव के लिए भूमि सुधार आयोग गठित किया गया था। आयोग के सुझावों के आधार पर भू-राजस्व संहिता में संशोधन किए गए हैं।

निजी एजेंसी करेगी सीमांकन: सीमांकन के मामले जल्दी निपटाने के लिए अब निजी प्राधिकृत एजेंसी की मदद ली जाएगी। प्रत्येक जिले के लिए एजेंसी पहले से तय की जाएगी। यदि तहसीलदार द्वारा सीमांकन आदेश के बाद पक्षकार संतुष्ट नहीं है, तो वह अनुविभागीय अधिकारी को आवेदन कर सकेगा। अनुविभागीय अधिकारी द्वारा विशेषज्ञ कर्मचारियों की टीम से सीमांकन करवाया जाएगा।

पटवारी हल्के के स्थान पर होगा सेक्टर का नाम

भू-अभिलेखों के संधारण तथा शहरी भूमि प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए शहरी क्षेत्रों में अब पटवारी हल्के के स्थान पर सेक्टर का नाम दिया जाएगा। आयुक्त भू-अभिलेख को सेक्टर पुनर्गठन के अधिकार होंगे। भू-अभिलेख संधारण के मामलों में ऐसी भूमियां, जिनका कृषि भूमि में कृषि से भिन्न प्रयोजन के लिए डायवर्सन कर लिया जाता है, उन्हें नक्शों में ब्लाक के रूप में दर्शाया जाएगा। यदि अनेक भूखंड धारक हैं, तो उनके अलग-अलग भू-खंड दर्शाए जाएंगे।

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