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21 जुलाई को आखिरी मुहूर्त, 19 नवंबर से फिर होंगी शादियां

21 जुलाई को भड़लिया नवमी पर शादी का आखिरी श्रेष्ठ मुहूर्त है। 23 को देवशयनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 14, 2018, 03:05 AM IST

21 जुलाई को भड़लिया नवमी पर शादी का आखिरी श्रेष्ठ मुहूर्त है। 23 को देवशयनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। इसके बाद शादियों की शहनाई 19 नवंबर को देव उठने के साथ ही बजेगी। 27 से चातुर्मास होगा। इस दौरान दो मलमास भी आएंगे।

भड़लिया नवमी पर सर्वाद्ध सिद्धि योग भी है। इसलिए जल्दी शादी करने के इच्छुक इस मुहूर्त में परिणय सूत्र में बंधेंगे। इसके बाद देव शयन और चातुर्मास शुरू हो जाने से शादियां नहीं होगी। ज्योतिषविदों के अनुसार नए परिवार की रचना के लिए होने वाले विवाह संस्कार शुभ मुहूर्त में करने के लिए सनातन धर्मी अच्छे मुहूर्त की तलाश करते हैं। जुलाई में 21 को सर्वाद्ध सिद्धि योग में सबसे ज्यादा शादियां होंगी। इसके बाद देवोत्थान एकादशी 19 नवंबर को अबूझ मुहूर्त से शादियों की शुरुआत होगी।

पं. हिमांशु शुक्ल के अनुसार देव उठनी ग्यारस के बाद नवंबर में विवाह का कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। जनवरी, फरवरी और मार्च में अच्छे मुहूर्त आएंगे, जिनमें लोग विवाह समारोह आयोजित कर सकेंगे। मांगलिक कार्य बंद हो जाने का असर बाजारों पर भी पड़ेगा। खासकर शादी-ब्याह में सराफा, किराना, कपड़ा, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक बाजार में खरीदी होती है, जो अब थम जाएगी। चातुर्मास के चलते भी बाजारों में मंदी का दौर रहेगा। केवल धार्मिक वस्तुओं, फलाहारी खानपान की सामग्री का बाजार ही चलेगा। बाजारों में दीपावली की तैयारियों से ही रौनक लौटेगी, जो शादी-ब्याह के सीजन तक बनी रहेगी।

ज्योतिष

23 को सो जाएंगे देव, एक मलमास 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक, दूसरा 15 मार्च से 14 अप्रैल तक

शादी के श्रेष्ठ मुहूर्त

कात्यायनोक्त यजुर्वेदीय मुहूर्त

दिसंबर 2018 -
12, 13, जनवरी 2019- 26, फरवरी 22, मार्च 9, 10

सपरिहार मुहूर्त : जनवरी 2019- 17, 18, 22, 23, 25, 26, 29, फरवरी- 8, 10, 19, 21, मार्च- 8, 9

दो मलमास रहेंगे

धनु संक्रांति पर 16 दिसंबर से 14 जनवरी 2019 तक।

मीन संक्रांति पर 15 मार्च से 14 अप्रैल 2019 तक।

(मल मास के दौरान किसी तरह के मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।)

ये तारे अस्त होंगे, रुकेंगे शुभ कार्य

शुक्र तारा 19 अक्टूबर से 19 नवंबर 2018 तक अस्त रहेगा। गुरु तारा 14 नवंबर से 8 दिसंबर 2018 तक अस्त रहेगा। भारतीय ज्योतिष शास्त्र की गणना में समस्त मांगलिक कार्यों में खास कर विवाह में गुरु और शुक्र तारों का उदय होना आवश्यक माना गया है। यानी गुरु और शुक्र तारे की उपस्थिति में ही मांगलिक व विवाह संस्कार शुभ फल देते हैं। गुरु तारे को संबंधों के आधार पर देखा जाता है। शुक्र तारे को सौभाग्य, समृद्धि तथा जीवन पर्यन्त यौवन की दृष्टि से देखा जाता है। जब विवाह कार्य इन तारों की उपस्थिति में होते हैं तो धर्म, ज्ञान, बुद्धि, स्वास्थ, दीर्घायु की पूर्णता प्राप्त होती है। ज्योतिषी विवाह और मांगलिक कार्यों के मुहूर्त तलाशते समय इसीलिए गुरु और शुक्र तारे के अस्त और उदय को देखते हैं।

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