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सरोगेसी के जरिए मां बनीं तो भी मिलेगा मातृत्व अवकाश

अब काॅलेजाें व विश्वविद्यालय की ऐसी महिला फैकल्टी को भी मातृत्व अवकाश का लाभ मिल सकेगा जो सरोगेसी के जरिए मां बनी...

Dainik Bhaskar

Aug 02, 2018, 03:05 AM IST
अब काॅलेजाें व विश्वविद्यालय की ऐसी महिला फैकल्टी को भी मातृत्व अवकाश का लाभ मिल सकेगा जो सरोगेसी के जरिए मां बनी हों यानी किराए की कोख से बच्चा प्राप्त किया होगा। इसके चलते यहां पदस्थ महिला टीचर्स फैकल्टी को 180 दिन का मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। सरकार ने विश्वविद्यालय व कॉलेज में टीचर्स अपॉइंटमेंट के मिनिमम क्वालिफिकेशन व अन्य एकेडमिक स्टॉफ के मानक तय कर यूजीसी रेगुलेशन-2018 जारी किया है। इसमें विभिन्न अवकाशों की श्रेणी में पहली बार सरोगेसी से मां बनने वाली महिलाओं को अवकाश देने का प्रावधान किया गया है।

इस मामले में केंद्रीय विद्यालय की एक टीचर ने दिल्ली हाईकोर्ट में रिट पिटिशन दायर की थी। इसमें उन्होंने बताया था कि वह सरोगेसी के जरिए जुड़वां बच्चों की मां बनी हैं। लेकिन, उसे मातृत्व अवकाश इसलिए नहीं दिया जा रहा है क्योंकि, उसने अपनी कोख से बच्चों को जन्म नहीं दिया है। इस मामले में कोर्ट ने 17 जुलाई 2015 को इस महिला टीचर को अवकाश देने का फैसला सुनाया था। कोर्ट के इस आदेश का पालन करने के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने 29 जनवरी 2018 को सभी विभागों को निर्देश जारी किए थे।

सरोगेसी से मां बनने वाली कॉलेज और विवि की महिला फैकल्टी को अवकाश देने का प्रावधान किया

असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती साक्षात्कार से ही

कॉलेज व विश्वविद्यालयों में होने वाली असिस्टेंट प्रोफेसर की सीधी भर्ती साक्षात्कार के आधार पर ही होगी। वहीं साक्षात्कार के लिए उम्मीदवारों की मेरिट लिस्ट उनके एकेडमिक रिकाॅर्ड, रिसर्च पब्लिकेशन और टीचिंग एक्सपीरियंस के अलावा एमफिल, पीएचडी, नेट, स्लेट, नेट जेआरएफ आदि आधार पर बनेगी। लेकिन, अंतिम चयन सिर्फ साक्षात्कार के आधार पर होगा। अभी तक 50 अंक एकेडमिक परफार्मेंस, 30 अंक रिसर्च वर्क और 20 अंक साक्षात्कार के होते थे। जिसे हटा दिया गया है।

टीचर्स फ्रेंडली है कॅरियर एडवांस स्कीम

प्राध्यापक संघ के पदाधिकारी ने बताया एकेडमिक परफार्मेंस इंडिकेटर (एपीआई) को लेकर चल रही कन्ट्रोवर्सी को दूर कर उसे टीचर्स फ्रेंडली बनाया गया है। वहीं संघ के द्वारा भेजे गए सुझाव को यूजीसी ने माना है। अब कॅरियर एडवांस स्कीम में एपीआई को खत्म कर ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया है। 8 हजार एकेडमिक ग्रेड पे (एजीपी) तक रिसर्च वर्क के अंक की जरूरत नहीं होगी।

ये भी प्रावधान





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