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प्रवचन में अहंकार रूपी चप्पल को बाहर उतारकर आएं

आज कल लोग हमारे पास इस डर से नहीं आते कि कहीं हम कोई नियम पच्चखाण न दे दें, कोई त्याग या क्रिया करने का न कहे। सभी को जो...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 11, 2018, 03:25 AM IST

आज कल लोग हमारे पास इस डर से नहीं आते कि कहीं हम कोई नियम पच्चखाण न दे दें, कोई त्याग या क्रिया करने का न कहे। सभी को जो मानव भव मिला है सा उसका मर्म धु साध्वी भगवंत समझाते हैं। आप किस तरह परमात्मा की आज्ञा का पालन कर सके वो समझाते हैं।

यह बात श्री आदिनाथ ऋषभदेव बावन जिनालय में चातुर्मास के लिए विराजित साध्वीश्री पुनीतप्रज्ञाश्रीजी ने शुक्रवार को धर्मसभा में कही। उन्होंने काउसग्ग का महत्व बताते हुए शुद्ध काउसग्ग करने की विधि की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा जानते हुए भी अशुद्ध रूप से क्रिया करने से बहुत कर्मबंध होता है। शांत सुधारस के प्रवचनों में साध्वी प्रमोदयशा श्रीजी ने कहा हमें हमारे अति मूल्यवान मानव भव को यूं ही प्रमादवश व्यर्थ न करें। हम बुद्धिशाली तब कहलाएंगे जब हम इस भव की चिंता छोड़ अगले भव के लिए पुण्य उपार्जन करके उसे अच्छा बनाएं।

उन्होंने कहा आप जब भी किसी के सु वचनों को सुनने प्रवचन में जाएं तब अहंकार व बुद्धि रूपी चप्पलों को बाहर उतार कर आएं। जैसे जब निगेटिव व पॉजिटिव चार्ज मिलने से लाइट उत्पन्न होती है उसी तरह जब हम परमात्मा की वाणी को पॉजिटिव व खुद को निगेटिव समझेंगे तो ज्ञान रूपी लाइट हमारे अंतर्मन में प्रकट होगी। साध्वीजी ने कहा जिन सोलह कषायों व नौ आश्रवों के कारण हम ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाते उनका त्याग करें, परिग्रह न करें। जितना ज्यादा परिग्रह उतनी ज्यादा आसक्ति होती है। आज कल के पेरेंट्स छोटे-छोटे बच्चों को प्ले स्कूल में डाल देते हैं तो संस्कार कैसे मिलेंगे। उन्हें कुत्तों को घुमाने की फुर्सत है, लेकिन बच्चों के लिए उनके पास वक्त नहीं है। इसलिए अनर्थ दंड के पापों से बचें, अपनी संस्कृति को न भूले। अब भी जागे व सुसंस्कृत सुसंस्कारी बने।

आयाेजन

बावन जिनालय में हुई धर्मसभा में साध्वीश्री प्रमोदयशाजी ने कहा

भाव यात्रा कल, आयंबिल हुए

बावन जिनालय से रविवार को सीमंधर स्वामी की भाव यात्रा निकलेगी। जिसमें संघपति बनने का लाभ आशीष कोठारी पारा वाले ने लिया है । शर्कसत्व का लाभ अंकित कटारिया परिवार ने लिया। शुक्रवार को पक्खी चतुर्दशी होने से बड़ी संख्या में आयंबिल किए गए। जिसका लाभ धर्मचंद मेहता परिवार ने लिया। आयंबिल की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में महिला परिषद, महिला मंडल, बहु मंडल एवं नवकार मंडल की भूमिका रही। श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता ने श्रीसंघ के सभी श्रावक-श्राविकाओं से प्रतिदिन होने वाले धर्मसभा में सपरिवार उपस्थित रह कर धर्मलाभ लेने का आह्वान किया।

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