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कुपोषण से हुई बच्चे की मौत, जन्मा 2 किलो का था, मरते वक्त 1.675 किग्रा का रह गया

Jhabua News - जिले के काकनवानी के तड़वी फलिया में ढाई माह के जुड़वा बेटा-बेटी की दो दिन में हुई मौत का कारण कुपोषण सामने आया है।...

Dainik Bhaskar

Aug 04, 2018, 03:30 AM IST
कुपोषण से हुई बच्चे की मौत, जन्मा 2 किलो का था, मरते वक्त 1.675 किग्रा का रह गया
जिले के काकनवानी के तड़वी फलिया में ढाई माह के जुड़वा बेटा-बेटी की दो दिन में हुई मौत का कारण कुपोषण सामने आया है। इलाज करने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर खुद कह रहे हैं कि बेटी की मौत के बाद अस्पताल लाए गए बेटे की मौत कुपोषण से ही हुई है। दम तोड़ते वक्त बालक का वजन महज 1.675 किग्रा था। जबकि ढाई माह के बच्चे का वजन लगभग ढाई से तीन किलो होना चाहिए। हैरान करने वाली बात यह है कि जन्म के वक्त पहली बार जब इस बालक का वजन किया गया, तब 2 किग्रा का था। यह वजन आंगनबाड़ी के रजिस्टर में दर्ज है। डॉक्टर ही नहीं, दोनों बच्चों के घर से 50 कदम की दूरी पर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता भी कह रही है कि बच्चे बहुत कमजोर थे। जन्म के समय जो टीका लगना था, वह ढाई महीने बाद हाथ में लगाया तो अन्य दो टीके पैरों में लगा दिए। कुपोषण से दो बच्चों की मौत ने सरकार के सुपाेषण के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भास्कर पड़ताल

बच्चों का मरने से पूर्व का फोटो, जिनमें दोनों की पसलियां नजर आ रही हैं।

और इधर दावा;

दो माह में C से B ग्रेड में आ गया झाबुआ जिला

महिला एवं बाल विकास विभाग सेवाओं के आधार पर जिलों की ग्रेडिंग करता है। इसमें मार्च 2018 की रिपोर्ट में 43.42 अंकों के साथ झाबुआ C ग्रेड में था। मई 2018 की रिपोर्ट में 51.47 के साथ B ग्रेड में आ गया।

कुपोषण पर एक नजर






स्रोत : राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की चौथी रिपोर्ट


टीकाकरण के पहले दूध पीते थे दोनों बच्चे, फिर कैसे कम हो गया वजन

आंगनबाड़ी के रजिस्टर में 19 मई 2018 को जन्म दोनों बच्चे का पहला वजन दर्ज है। उस समय बालक नीलेश का वजन 2 किग्रा और बालिका ललिता का 2.100 किग्रा था। 31 जुलाई को पहले बालिका की मौत हुई, उसका शव परिजन ने बिना पोस्टमार्टम के दफना दिया। 1 अगस्त को बालक की मौत होने पर माता-पिता ने पोस्टमार्टम करवाया। पोस्टमार्टम के वक्त बच्चे का वजन किया। वह 1.675 ग्राम का था। बच्चों की मां गब्बूबाई ने शुक्रवार को बताया कि बच्चे टीकाकरण के पहले तक दूध पी रहे थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि ढाई महीने में कुपोषण से बालक का वजन कम हो गया या यह फर्जी वजन की रिपोर्टिंग है।

मां भी कमजोर थी, बच्चे भी पैदायशी कमजोर थे, इलाज के लिए नहीं गए :आंगनबाड़ी कार्यकर्ता

बच्चों के घर से 50 कदम दूर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की कार्यकर्ता रेजिना डामाेर ने बताया-जन्म के वक्त बीसीजी का टीका लगता है। वह बालक को नहीं लगा था। इसलिए बालिका को डीपीटी और पोलियो के दो टीके लगाए। बालक को बीसीजी का टीका हाथ में और अन्य दो टीके पैरों में लगाए थे। मां गब्बूबाई गर्भवती थी, तब कमजोर थी। दोनों बच्चे हुए तो वे भी कमजोर हुए। गर्भवती थी, तब भी झाबुआ इलाज के लिए भेजा तो नहीं गई। टीके लगवाने भी नहीं आ रहे थे, बार-बार बुलवा कर लगवाए। जब बालिका की मौत हो गई तो मंगलवार को फिर बालक को झाबुआ ले जाने का बोला तो भी नहीं ले गए।

बच्चों की प्री मेच्योर डिलेवरी हुई थी, वह पैदायशी कमजाेर थे



इलाज के लिए चली जाती तो तीन और बच्चों को क्या खिलाती : मां

दोनों बच्चों की मां गब्बूबाई से भास्कर ने पूछा कि गर्भवती थी, तब कमजोरी बताई, तब इलाज क्यों नहीं कराया। गब्बूबाई ने कहा-तीन और बच्चे हैं। मैं अस्पताल में भर्ती होती तो बच्चों को क्या खिलाती। पिता कालिया ने कहा-जब हमने कमजोरी के कारण टीकाकरण का मना कर दिया था तो बार-बार घर आकर बुला कर टीकाकरण क्यों करवाया।

कुपोषण ही है मौत की वजह : डॉक्टर

काकनवानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉ. एस बबेरिया ने बताया-पोस्टमार्टम किया गया है। मौत की वजह कुपोषण है। बच्चों का वजन नहीं बढ़ रहा था। बालक को हमने झाबुआ रैफर किया था लेकिन परिवार के लोग ही लेकर नहीं गए। टीकाकरण के कारण मौत नहीं हुई। क्योंकि अन्य बच्चों का भी टीकाकरण किया गया था। तीन टीके एक साथ लगाने पर भी रिएक्शन होता तो 24 घंटे में होता। बालिका की तीन दिन और बालक की चार दिन बाद मौत हुई।


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कुपोषण से हुई बच्चे की मौत, जन्मा 2 किलो का था, मरते वक्त 1.675 किग्रा का रह गया
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