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जो परमात्मा का आज्ञाकारी है वो ही पच्चखाण का मन से पालन करता है

बावन जिनालय में हुई धर्मसभा में साध्वीश्री पुनीतप्रज्ञाश्रीजी ने कहा भास्कर संवाददाता | झाबुआ जो परमात्मा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 04, 2018, 03:31 AM IST

बावन जिनालय में हुई धर्मसभा में साध्वीश्री पुनीतप्रज्ञाश्रीजी ने कहा

भास्कर संवाददाता | झाबुआ

जो परमात्मा का आज्ञाकारी है वो ही नियमों अर्थात पच्चखणा का मन से पालन करता है। वह उसे बंधन न मानकर परमात्मा की आज्ञा मान श्रद्धा पूर्वक शिरोधार्य करता है। यह बात साध्वीश्री पुनीत प्रज्ञाश्री ने शुक्रवार को कही। वे बावन जिनालय में श्रावक-श्राविकाओं को पच्चखाण का महत्व बता रही थी।

साध्वीश्री ने व्रत में लेने वाले विभिन्न पच्चखाण के बारे में जानकारी दी और उनके उपयोगों को भी समझाया। उन्होंने बताया किसी भी क्रिया को विधि व मन से करने से लाभ मिलता है। इसलिए सच्चे श्रावकों को परमात्मा की आज्ञा को मान के क्रिया व नियम करने चाहिए, जिससे कर्म कटते है व मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। साध्वीश्री प्रमोद यशाश्रीजी ने शांत सुधारस पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा इस संसार में अविरति, कषाय, रोग व प्रमाद इन आश्रवों की सतत वर्षा हो रही है। इसी से ये संसार एक जंगल या जेल के समान है। यहां अपना वास्तविक स्वरूप दिखाई नहीं देता। अपना वास्तविक स्वरूप मोक्ष में ही दिखता है। इसलिए पाप करते समय हम अपने मन में सदा ये विचार रखें कि आज मेरा आखिरी दिन है और धर्म करते समय यह विचारें कि आज मेरा प्रथम दिन है। उन्होंने बताया इस तरह से आप पाप करने से भयभीत होंगे। धर्म क्रियाओं में रस प्राप्त करेंगे, जिससे आपका उल्लास धर्म में हमेशा बना रहेगा। पाप कर्म करते समय आत्मा को जरूर कहो आप के पाप का रस घटेगा। शुक्रवार को 51 आयंबिल हुए जिसका लाभ धर्मचंद मेहता परिवार ने लिया।

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