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मोहर्रम के जुलूस पर विवाद के मामले में आरएसएस कार्यकर्ताओं को क्लीनचिट

पेटलावद में डेढ़ साल पहले हुए मोहर्रम जुलूस विवाद में आरएसएस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को न्यायिक जांच आयोग ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:40 AM IST

पेटलावद में डेढ़ साल पहले हुए मोहर्रम जुलूस विवाद में आरएसएस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को न्यायिक जांच आयोग ने क्लीनचिट दे दी है। इसमें आयोग ने पुलिस कार्रवाई को द्वेषपूर्ण और बदला लेने वाली माना। तत्कालीन डीएसपी राकेश व्यास और तत्कालीन थाना प्रभारी करणी सिंह शक्तावत को सीधे तौर पर इसका दोषी ठहराया है। यह मामला सुर्खियों में आने के बाद संघ के नागपुर मुख्यालय ने टीम भेजी थी। उसकी सक्रियता के बाद रिटायर्ड जज आरके पांडे की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित हुआ। आयोग ने रिपोर्ट अक्टूबर 2017 में सौंप दी थी। पांच महीने से रिपोर्ट परीक्षण के लिए गृह विभाग में है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई कर इसे विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा।

यह था घटनाक्रम : 12 अक्टूबर 2016 को पेटलावद में मोहर्रम जुलूस रोके जाने पर सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई थी। इसमें पुलिस ने आरएसएस के नगर कार्यवाह संदीप भायल, पूर्व नगर कार्यवाह लूणचंद परमार, पूर्व महामंत्री मुकेश परमार, आकाश सोलंकी, नरेंद्र पडियार सहित अन्य पर मुकदमा दर्ज किया। बाद में उन्हें गिरफ्तार किया गया। आरएसएस मुख्यालय ने इस घटनाक्रम को लेकर पुलिस और सरकार की भूमिका पर नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक संजय तिवारी को वहां से हटाया गया। साथ ही तत्कालीन उप पुलिस अधीक्षक राकेश व्यास और थाना प्रभारी करणी सिंह शक्तावत को निलंबित कर दिया गया था।

ऐसे तैयार हुई आयोग की रिपोर्ट

पुलिस का दावा-1 : सांप्रदायिक तनाव के हालात थे, इसलिए आरएसएस कार्यकर्ताओं पर मुकदमा दर्ज किया गया।

आयोग का निष्कर्ष : हर वर्ष की तरह 12 अक्टूबर 2016 को भी मोहर्रम जुलूस निकाला गया। इसमें सांप्रदायिक विवाद जैसी कोई स्थिति पैदा नहीं हुई।

पुलिस का दावा-2 : आकाश चौहान व उसके साथी गोरक्षक बनकर गोवंश ले जाने वाले वाहनों को रोककर मारपीट व वसूली करते हैं।

आयोग का निष्कर्ष : पुलिस आरोपियों से द्वेष रखती है। मोहर्रम चल समारोह के दौरान पुलिस को उनसे बदला लेने का मौका मिला और झूठा केस दर्ज किया।

पुलिस का दावा-3 : आरोपी लूणचंद परमार और मुकेश परमार ने चल समारोह रोका और दूसरे रास्ते से ले जाने के लिए हंगामा किया। इससे तनाव की स्थिति बनी।

आयोग का निष्कर्ष : पेटलावाद में सांप्रदायिक तनाव का यह घटनाक्रम सुनियोजित रणनीति का हिस्सा नहीं था। इस दौरान सिर्वी समाज के मोहल्ले में अनेक लोग मौजूद थे।

पुलिस का दावा-4 : थाने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। इससे पुलिस को उन पर हल्का लाठी चार्ज करना पड़ा।

आयोग का निष्कर्ष : किसी भी पुलिस अधिकारी को द्वेषभावना से किसी भी व्यक्ति पर बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

रिपोर्ट में आयोग ने कहा कि संघ कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने द्वेषतापूर्ण कार्रवाई की। आकाश चौहान असली गोरक्षक हैं या नकली, इससे मतलब नहीं। पुलिस ने इन्हें अपने निशाने पर लेने के लिए कार्रवाई की।

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