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हरियाली तीज व शनि अमावस्या एक साथ, साढ़े साती शनि के ढलने से होगा फायदा

इस बार हरियाली तीज और शनि अमावस्या 11 अगस्त की शनिवार को पड़ेगी। एक साथ दोनों पड़ने से साडे साती व शनि की ढईया से...

Danik Bhaskar

Aug 10, 2018, 03:45 AM IST
इस बार हरियाली तीज और शनि अमावस्या 11 अगस्त की शनिवार को पड़ेगी। एक साथ दोनों पड़ने से साडे साती व शनि की ढईया से प्रभावित लोगों को हवन, जप, पूजापाठ से खास फायदा होगा। इसलिए इस शनि अमावस्या का इस बार अधिक महत्व रहेगा। इस अमावस्या को लेकर शहर सहित जिले के शनि मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। जिले के कई मंदिरों में विशेष अनुष्ठान व हवन-यज्ञ भी होंगे।

हरियाली व शनि अमावस्या एक ही दिन पड़ने से इस दिन का महत्व बढ़ जाता है। इस बार शनिवार होने से अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन जाप, हवन और पूजा पाठ का विशेष महत्व रहेगा। जो जातक वर्तमान में शनि की चाल से नकारात्मक रूप से प्रभावित है, विशेष कर जिन जातकों की कुंडली में शनि की महादशा, अंतरदशा, प्रत्यंतर दशा चल रही है या फिर जिन पर शनि की साढ़े साती, शनि की ढईया चल रही है। जिन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट शनि देव के कारण पहुंच रहा है वो जातक इस शनि अमावस्या पर शिव व शनि देव की साधना कर उनके प्रकोप से बच सकते है। पं विश्व‌नाथ शुक्ल ने बताया कि जीवन में कई तरह के संकट केवल शनि, राहु, केतु और कुंडली के कई अशुभ योगों के कारण आते है। इन सब दोषों का और जीवन के संकटों के नाश के लिए शनिचरी अमावस्या सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

कष्टों से प्रभावित लोग शनिवार को पड़ने वाली शनि अमावस्या पर हवन, जप और पूजा पाठ कर ले सकते हैं फायदा

जिलेभर में शनिदेव मंदिर में अमावस्या पर होंगे विशेष धार्मिक अनुष्ठान

िसटी पोस्ट ऑफिस के पीछे स्थित शनि मंदिर में शनि अमावस्या मनाई जाएगी। मंदिर में सुबह सवा सात बजे विशेष आरती होगी। दिनभर दर्शन का सिलिसला चलेगा। शाम 4 बजे शनिदेव का अभिषेक किया जाएगा। शाम सवा 7 बजे महाआरती का आयोजन होगा। इसके अलावा अन्य मंदिरों में विशेष शृंगार किया जाएगा। गोवर्धननाथ मंदिर व चारभुजानाथ मंदिर में विशेष दर्शन होंगे। इसके अलावा भी शहर के मंदिरों में विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।

भास्कर संवाददाता | झाबुआ

इस बार हरियाली तीज और शनि अमावस्या 11 अगस्त की शनिवार को पड़ेगी। एक साथ दोनों पड़ने से साडे साती व शनि की ढईया से प्रभावित लोगों को हवन, जप, पूजापाठ से खास फायदा होगा। इसलिए इस शनि अमावस्या का इस बार अधिक महत्व रहेगा। इस अमावस्या को लेकर शहर सहित जिले के शनि मंदिरों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। जिले के कई मंदिरों में विशेष अनुष्ठान व हवन-यज्ञ भी होंगे।

हरियाली व शनि अमावस्या एक ही दिन पड़ने से इस दिन का महत्व बढ़ जाता है। इस बार शनिवार होने से अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन जाप, हवन और पूजा पाठ का विशेष महत्व रहेगा। जो जातक वर्तमान में शनि की चाल से नकारात्मक रूप से प्रभावित है, विशेष कर जिन जातकों की कुंडली में शनि की महादशा, अंतरदशा, प्रत्यंतर दशा चल रही है या फिर जिन पर शनि की साढ़े साती, शनि की ढईया चल रही है। जिन्हें किसी भी प्रकार का कष्ट शनि देव के कारण पहुंच रहा है वो जातक इस शनि अमावस्या पर शिव व शनि देव की साधना कर उनके प्रकोप से बच सकते है। पं विश्व‌नाथ शुक्ल ने बताया कि जीवन में कई तरह के संकट केवल शनि, राहु, केतु और कुंडली के कई अशुभ योगों के कारण आते है। इन सब दोषों का और जीवन के संकटों के नाश के लिए शनिचरी अमावस्या सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

राशि व गृह शानि के लिए अपने घर पर पौधे लगाएं

यदि आप इस साल बारिश में पौधा लगाने जा रहे है तो अपनी राशि के अनुसार पौधा लगाएं। इससे पर्यावरण व भाग्य दोनों सुधरेंगे। कुंडली में स्थित कोई खराब गृह के कारण असफलता या किसी काम में बाधा आ रही है तो वह दूर होगी। ज्योतिष शास्त्र में हर राशि गृह व नक्षत्र के लिए एक वृक्ष है। इन्हें लगाने से फायदा होता है। पंडित के अनुसार ज्योतिष में गृह को मजबूत करने व उसकी सकारात्मक उर्जा पाने के लिए गृह व राशि के अनुसार पेड़ लगाने का भी उपाय है। राशि के अनुसार पेड़ लगाने से न केवल गृह शांत होता है, बल्कि जैसे जैसे पौधा बड़ता है व्यक्ति को उतना ही अधिक लाभ होता है।

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