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1 लाख लोन लेकर बनी बैंक सखी, 3 बैंकों का काम कर कमा लेती हैं 10 हजार रु. महीना

राणापुर ब्लॉक के ग्राम सरसवाट की मड़ीबाई। यह ग्रेजुएट दिव्यांग महिला 1 लाख रुपए लोन लेकर बैंक सखी बनीं। अब 3 बैंकों...

Danik Bhaskar | Jul 13, 2018, 03:50 AM IST
राणापुर ब्लॉक के ग्राम सरसवाट की मड़ीबाई। यह ग्रेजुएट दिव्यांग महिला 1 लाख रुपए लोन लेकर बैंक सखी बनीं। अब 3 बैंकों के कार्यों में सेवा देकर कमीशन के रूप में 10 हजार रुपए महीना कमा रही हैं। अपने क्षेत्र में मड़ीबाई की पहचान बैंक अधिकारी के रूप में हो गई है।

ग्रामीणों के बैंक संबंधी छोटे-छोटे लेन देन का काम करती हैं, जिससे हर ट्रांजेक्शन पर बैंक की तरफ से कमीशन मिल जाता है। ग्रामीणों को घर बैठे बैंक की सुविधा मिल रही है। मड़ीबाई ने बताया मैं जन्म से ही दिव्यांग थी। जब मैं 6टी कक्षा में पढ़ रही थी, तब ही अचानक पिताजी का देहांत हो गया। बड़ी मुश्किल से मैंने अपनी बीए तक की पढ़ाई पूरी की। मैंने नौकरी के लिए प्रयास किया लेकिन नहीं मिली। फिर आजीविका परियोजना के समूह में सदस्य बनी। मेरा चयन बैंक सखी के रूप में हुआ। बैंक सखी का काम आगे बढ़ाने के लिए बैंक से 1 लाख रुपए मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में ऋण लिया। इससे बैंक का कार्य करने के लिए लेपटॉप, इंटरनेट कनेक्शन एवं कियोस्क सेन्टर चलाने के लिए जरूरी उपकरण खरीदे। कार्य प्रारंभ करने के लिए आरसेटी संस्थान बैंक ऑफ बड़ौदा से प्रशिक्षण लिया। मड़ीबाई बताती हैं कि कभी यह नहीं सोचा था कि बैंक सखी के रूप में काम करने पर इतना सम्मान मिलेगा और पैसा भी। पहले मैं बड़े अधिकारियों से बात करने में संकोच करती थी और घर से बाहर निकलना तो मानो असंभव था। बैंक सखी बनने के बाद बड़े अधिकारियों से संपर्क होने लगा। लैपटाप के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। कम्प्यूटर व लेपटॉप की बटन पर हाथ रखने में भी डर लगता था। अब प्रशिक्षण के बाद बैंक का काम कर रही हूं। बच्चों की शिक्षा भी निजी स्कूलों में करवा पा रही हूं। मड़ीबाई नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की 4 शाखाओें के लिए 12 गांवों के लोगों को सेवाएं दे रही हैं। 50 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को वित्तीय लेनदेन से जोड़ा है। 10 गांवों के स्कूली विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति, गणवेश इत्यादि की राशि निकालने में भी सहयोग दे रही हैं। ग्रामीणों की पेंशन, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय की राशि, नरेगा की मजदूरी व अन्य भुगतान भी अपने केंद्र से देती है। अभी तक उन्होंने 1 करोड़ से अधिक का ट्रांजेक्शन कर दिया है।

मड़ीबाई के पास ट्रांजेक्शन कराने आ रहे हैं आसपास के क्षेत्रों से ग्रामीण।