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जहां पर करनी है वाहनों की पार्किंग वहां ट्रॉली में भरा पड़ा है बायो मेडिकल का वेस्ट

जिस जगह को पार्किंग के लिए चिन्हित किया है वहां इस तरह दो से तीन दिन तक कचरे से भरी ट्रॉली खड़ी रहती है। कलेक्टर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 18, 2018, 03:50 AM IST

जहां पर करनी है वाहनों की पार्किंग वहां ट्रॉली में भरा पड़ा है बायो मेडिकल का वेस्ट
जिस जगह को पार्किंग के लिए चिन्हित किया है वहां इस तरह दो से तीन दिन तक कचरे से भरी ट्रॉली खड़ी रहती है।

कलेक्टर ने दिए थे निर्देश

कलेक्टर आशीष सक्सेना जब निरीक्षण करने आए थे तब इस कचरे को रोजाना उठाने के निर्देश दिए थे। आश्चर्य है जहां ट्रॉली में बायो मेडिकल वेस्ट रखा जा रहा है उस स्थान को कलेक्टर ने पार्किंग के लिए चिन्हित किया था लेकिन यहां कचरे की वजह से लोग वाहन भी पार्किंग नहीं कर रहे हैं। कचरा ट्रॉली से गिरकर जमीन पर आ रहा है। बावजूद इसके अस्पताल प्रबंधन लापरवाह बना हुआ है।

नपा सीएमओ से कंटेनर रखने को कहा था

कलेक्टर ने नपा सीएमओ से कहा था कि कचरा फेंकने का स्थान बदला जाए, जिससे आसपास के क्षेत्रों में बदबू ना आए। कचरे के लिए चलित पैक कंटेनर रखने को कहा था, जिससे गंदगी भी बाहर ना फेंके। लेकिन निर्देशों के 15 दिन से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी उस पर अमल नहीं हो पा रहा। ना ही स्थान बदला और न ही रोज कचरा उठ रहा है। ऐसे में यह कचरा मरीजों सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

ऐसे होना चाहिए निपटारा : जानकारों के अनुसार जितना भी बॉयोमेडिकल वेस्ट है, उसके लिए अलग से भस्मक होना चाहिए। जहां अलग-अलग वेस्ट को जलाया जा सकें। इसके अलावा गहरा गड्ढ़ा खोदकर सारा बॉयो मेडिकल वेस्ट उसमें दबा देना चाहिए। यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।

वेस्ट के हिसाब से ऐसे होना चाहिए अलग डस्टबिन

पीला डस्टबिन :
कटे मानव अंग, हाथ-पैर, प्लेसेंट, नाल, आंत, बच्चादानी, कल्चर प्लेट, संक्रामक नमूने, जीवित या खराब टीके, खून, खंखार आदि से सने पड़े रुई, पट्टी, कटे हुए प्लास्टर।

लाल डस्टबिन : सभी डिस्पोजेबल आईवी सेट, स्केल्पवेन सेट, वेनफ्लान, कैथेटर, यूरोबेग, राइल्सट्यूब, ड्रेनेज ट्यूब एवं बेग, खून की खाली थैलियां, डायलिसिस के डिस्पोजेबल प्लास्टिक की सीरिंज

नीले डस्टबिन : नुकीली तेज धार वाली वस्तुएं जैसे सूइयां, लेंसेट, ब्लेड, टूटे कांच के एम्पूल, नाइफ, ब्लेड।

काला डस्टबिन : साधारण कचरा जैसे फल, सब्जियों के छिलके, पैकिंग की पन्नी, कागज, पुरानी खराब एक्सपायरी दवाइयां, इंसीनेटर से उत्पन्न राख, प्रयोगशाला एवं अस्पताल में उपयोग किया हुआ ठोस कीटनाशक एवं रसायन आदि।

कलेक्टर के जो भी निर्देश हैं उसका पालन करेंगे

हमने कचरा उठवा दिया है, यदि अब समय पर नहीं उठा तो नगर पालिका सीएमओ से बात करेंगे। कलेक्टर के जो भी निर्देश है उसका पालन किया जाएगा। आरएस प्रभाकर, सिविल सर्जन, झाबुआ

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