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घर में बैठकर अब सर्वे नहीं कर पाएंगे पटवारी

खेतों में बोई गई फसल, पेड़, रकबा, ट्यूबवेल की राजस्व विभाग के पास अब सटीक जानकारी दर्ज होगी। घर बैठकर मनमर्जी से...

Dainik Bhaskar

Jul 18, 2018, 03:50 AM IST
खेतों में बोई गई फसल, पेड़, रकबा, ट्यूबवेल की राजस्व विभाग के पास अब सटीक जानकारी दर्ज होगी। घर बैठकर मनमर्जी से जानकारी जुटाने वाले पटवारियों को अब फील्ड में जाकर ही फसलों से जुड़ी जानकारी अपलोड करना पड़ेगी। इसके लिए ई-गिरदावरी एप लाॅन्च किया गया है।

इस एप को मोबाइल फोन में अपलोड कर लोकेशन आॅन करना पड़ेगी, जिसके बाद इसमें जानकारी आॅनलाइन अपलोड होगी। इसका फायदा किसानों को यह मिलेगा कि वह एप में लोड जानकारी को देख सकते हैं, जिसके बाद मोबाइल पर आया ओटीपी देकर जानकारी फीड करा सकते हैं। पटवारियों का पूरा रिकॉर्ड अब मोबाइल एप से अपडेट होगा। किसानों द्वारा बोई जाने वाली फसल, रकबा और उत्पादन की जानकारी पटवारी खसरा रिकाॅर्ड में दर्ज करते हैं। इसमें कई पटवारी मौका मुआयना किए बगैर कोटवार और किसानों से पूछकर रिकॉर्ड अपडेट कर लेते थे, इसे देखते हुए मोबाइल एप से गिरदावरी का फैसला लिया है। इससे किसानों को बीमा लेने में भी आसानी होगी।

शासन के निर्देशानुसार गिरदावर एप के लिए पटवारियों ने मोबाइल फोन खरीद लिए हैं, जिससे फसल का रकबा और बोई गई फसल की भी सही जानकारी आॅनलाइन मिल जाएगी। किसानों को प्राकृतिक आपदा होने पर मुआवजे के लिए पटवारियों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। मुआवजा या बीमा राशि मिल जाएगी। किसान इस एप की मदद से भावांतर और समर्थन मूल्य का रजिस्ट्रेशन भी करा सकेंगे।

सुविधा

पटवारी खेतों में जाकर मोबाइल फोन से फसलों का सर्वे करेंगे, भावांतर व समर्थन मूल्य का रजिस्ट्रेशन भी करा सकेंगे

ऐसे काम करेगा ई-गिरदावरी एप

पटवारी मौके पर पहुंचकर एप पर किसान का नाम, खेत का सर्वे नंबर के साथ किसान का मोबाइल नंबर दर्ज करेगा। किसान के सर्वे नंबर पर उसके खेत व उसके रकबे में बोई फसल की जानकारी दर्ज की जाएगी। जैसे ही जानकारी एप पर डाउनलोड की जाएगी। किसान के मोबाइल पर दर्ज की जा रही फसल की जानकारी के व ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) आएगा। फसल सही दर्ज है तो किसान पटवारी को ओटीपी देगा। ओटीपी दर्ज करते ही फसल की जानकारी आॅनलाइन दर्ज हो जाएगी।

जिले में खरीफ फसल का रकबा 1.89 लाख हेक्टेयर

इस बार खरीफ के सीजन की फसलों का जिले में कुल रकबा 1 लाख 89 हजार हेक्टेयर है। इसमें 80 प्रतिशत बोवनी हो चुकी है। इसमें सोयाबीन, मक्का, मूंग एवं अरहर फसलें शामिल है। जिले के किसानों का इस बार भी मक्का और सोयाबीन की फसल की ओर ध्यान ज्यादा है। कृषि विभाग किसानों को फसलों का ध्यान रखने की सलाह दे रहा है। साथ ही समय-समय पर कृषि वैज्ञानिक भी किसानों से संपर्क कर उन्हें जानकारी दे रहे हैं।

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